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Vrischika Sankranti 2025 वृश्चिक संक्रांति पूजा विधि भाग्योदय

Vrischika Sankranti 2025 पूजा विधि जानें और भाग्योदय के लिए शुभ मुहूर्त में करें विशेष पूजा इस दिन

Published July 2, 2026
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3 Min Read

वृश्चिक संक्रांति हिंदू पंचांग के अनुसार एक अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जब सूर्य देव तुला राशि से वृश्चिक (वृश्चिक) राशि में प्रवेश करते हैं। यह पर्व 15 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान सूर्य की विशेष पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।

Contents
शुभ मुहूर्त (2025)वृश्चिक संक्रांति पूजा विधि: सरल और प्रभावी तरीकासामग्रीविधिवृश्चिक संक्रांति के लाभ: क्यों है यह विशेष?विशेष उपाय: इन बातों का रखें ध्यानपौराणिक कथा: वृश्चिक संक्रांति से जुड़ी रोचक गाथाआध्यात्मिक उन्नति का अवसर

शुभ मुहूर्त (2025)

  • संक्रांति तिथि: 15 नवंबर 2025 (शनिवार)
  • सूर्योदय: सुबह 6:45 बजे (लगभग)
  • सूर्यास्त: शाम 5:30 बजे (लगभग)
  • पुण्य काल: सुबह 6:45 से 12:00 बजे तक

वृश्चिक संक्रांति पूजा विधि: सरल और प्रभावी तरीका

इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है। निम्न विधि से पूजा करें:

सामग्री

  • लाल कपड़ा (आसन के लिए)
  • लाल फूल (गुड़हल, गुलाब आदि)
  • गंगाजल
  • रोली, अक्षत, धूप-दीप
  • गुड़ और तिल (नैवेद्य के रूप में)

विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर सूर्य देव का आह्वान करें।
  3. ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
  4. सूर्य को जल अर्पित करते हुए गायत्री मंत्र बोलें: ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
  5. अंत में तिल-गुड़ का दान करें और प्रसाद वितरित करें।

वृश्चिक संक्रांति के लाभ: क्यों है यह विशेष?

इस दिन की गई पूजा से निम्न लाभ प्राप्त होते हैं:

  • रोग मुक्ति: सूर्य की कृपा से शारीरिक और मानसिक रोग दूर होते हैं।
  • धन वृद्धि: वृश्चिक राशि के प्रभाव से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
  • कर्मफल: पूर्वजन्म के पापों का प्रायश्चित होता है।

विशेष उपाय: इन बातों का रखें ध्यान

  • इस दिन लाल वस्त्र पहनने से सूर्य की कृपा बढ़ती है।
  • पूजा के बाद गरीबों को अन्नदान अवश्य करें।
  • ताम्बे के बर्तन में जल भरकर सूर्य को अर्पित करें।

पौराणिक कथा: वृश्चिक संक्रांति से जुड़ी रोचक गाथा

पुराणों के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया, तब सूर्य देव ने उन्हें आशीर्वाद देने के लिए वृश्चिक राशि में प्रवेश किया था। इसी दिन से यह पर्व धर्म और न्याय की विजय का प्रतीक माना जाता है।

आध्यात्मिक उन्नति का अवसर

वृश्चिक संक्रांति का पर्व हमें प्रकृति और ईश्वर के साथ जुड़ने का मौका देता है। सूर्य देव की कृपा पाने के लिए इस दिन सात्विक भाव से पूजा-अर्चना करें और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।

🌞 सूर्य देव आप सभी को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें! 🌞

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