हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह वह पावन तिथि है जब भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा के बाद जागते हैं। इस दिन से सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन आदि शुरू हो जाते हैं। 2025 में यह पर्व 8 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा।
देवउठनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक योगनिद्रा में रहते हैं। इस दिन उनके जागने के साथ ही धरती पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कथा: भगवान विष्णु और दैत्य मुर का युद्ध
एक पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्य मुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। तब देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान ने मुर से युद्ध किया, लेकिन दैत्य छल से युद्धभूमि में छिप गया। विष्णु जी ने उसे ढूंढ़ते-ढूंढ़ते थककर एक गुफा में विश्राम किया। मुर ने उसी समय आक्रमण करना चाहा, लेकिन भगवान की माया से उसका वध हो गया। तब से यह दिन देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है।
देवउठनी एकादशी 2025: शुभ मुहूर्त और तिथि
- तिथि: 8 नवंबर 2025, शनिवार
- एकादशी प्रारंभ: 7 नवंबर की रात 10:15 बजे से
- एकादशी समाप्त: 8 नवंबर की रात 11:55 बजे तक
- पारण मुहूर्त: 9 नवंबर सुबह 6:45 से 9:00 बजे तक
देवउठनी एकादशी के विशेष उपाय
इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और कष्ट दूर होते हैं:
1. तुलसी-शालिग्राम का विवाह
इस दिन तुलसी जी और शालिग्राम जी का विवाह कराना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और पितृदोष शांत होता है।
2. दीपदान करें
शाम के समय तुलसी के पास या मंदिर में घी का दीपक जलाएं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
3. यह मंत्र जपें
इस दिन इस मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
4. दान-पुण्य करें
- गरीबों को अनाज, वस्त्र या दक्षिणा दें।
- तुलसी का पौधा लगाएं या दान करें।
देवउठनी एकादशी व्रत विधि
इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। व्रत विधि इस प्रकार है:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें।
- दिन भर फलाहार करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन करें और जागरण करें।
- अगले दिन ब्राह्मण को भोजन कराकर व्रत का पारण करें।
निष्कर्ष: आध्यात्मिक जागरण का पर्व
देवउठनी एकादशी न केवल भगवान विष्णु के जागरण का पर्व है, बल्कि यह हमारे अंदर की आध्यात्मिक चेतना को जगाने का भी अवसर है। इस दिन पूजा-उपवास करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
