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Varuthini Ekadashi 2025 व्रत विधि कथा और महत्व

वरुथिनी एकादशी 2025 का महत्व, व्रत विधि और कथा जानें। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताए इस पावन व्रत का पालन करके पाएं मोक्ष और सुख-समृद्धि। पूरी जानकारी यहाँ।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

वरुथिनी एकादशी 2025: भगवान श्रीकृष्ण ने बताया था व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और वरुथिनी एकादशी इनमें से एक पावन तिथि है। यह व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस व्रत के महत्व को समझाया है, जिससे भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस लेख में हम वरुथिनी एकादशी 2025 की तिथि, व्रत विधि, कथा और इसके फल के बारे में विस्तार से जानेंगे।

Contents
वरुथिनी एकादशी 2025: भगवान श्रीकृष्ण ने बताया था व्रत का महत्ववरुथिनी एकादशी 2025 की तिथि और मुहूर्तव्रत का महत्ववरुथिनी एकादशी व्रत विधिव्रत से पहले की तैयारीपूजा विधिव्रत के नियमवरुथिनी एकादशी की पौराणिक कथावरुथिनी एकादशी व्रत के लाभविशेष सावधानियाँनिष्कर्ष

वरुथिनी एकादशी 2025 की तिथि और मुहूर्त

2025 में वरुथिनी एकादशी 14 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 अप्रैल 2025 को रात 09:14 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 14 अप्रैल 2025 को रात 11:36 बजे
  • पारण समय (व्रत तोड़ने का समय): 15 अप्रैल सुबह 06:07 से 08:39 तक

व्रत का महत्व

वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

वरुथिनी एकादशी व्रत विधि

इस व्रत को करने की विधि निम्नलिखित है:

व्रत से पहले की तैयारी

  • दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।

पूजा विधि

  • भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें।
  • घी का दीपक जलाएं और धूप बत्ती दिखाएं।
  • निम्न मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नारायणाय नमः” मंत्र का जाप करें।

व्रत के नियम

  • पूरे दिन अन्न ग्रहण न करें, फलाहार या दूध से ही उपवास रखें।
  • क्रोध, झूठ और बुरे विचारों से बचें।
  • रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना शुभ माना जाता है।

वरुथिनी एकादशी की पौराणिक कथा

भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत की कथा सुनाई थी। प्राचीन समय में मान्धाता नाम के एक राजा थे, जो बहुत धार्मिक और प्रजापालक थे। एक बार वन में तपस्या करते समय उन पर एक भयंकर राक्षस ने आक्रमण कर दिया। राजा ने भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की।

भगवान विष्णु ने उन्हें वरुथिनी एकादशी का व्रत करने का आदेश दिया। राजा ने पूरी श्रद्धा से इस व्रत को किया, जिसके प्रभाव से राक्षस का विनाश हुआ और राजा को पुनः अपना राज्य मिल गया। इसके बाद से ही इस व्रत को मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है।

वरुथिनी एकादशी व्रत के लाभ

  • पापों से मुक्ति: इस व्रत से पूर्वजन्म और इस जन्म के पापों का नाश होता है।
  • आर्थिक समृद्धि: व्रत करने से धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  • सुखी वैवाहिक जीवन: कुंवारे लोगों को अच्छा जीवनसाथी मिलता है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: अंत समय में भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष मिलता है।

विशेष सावधानियाँ

  • एकादशी के दिन चावल, लहसुन, प्याज और मसूर की दाल का सेवन वर्जित है।
  • व्रत तोड़ते समय द्वादशी तिथि का ध्यान रखें, अगर एकादशी दो दिन हो तो पहले दिन व्रत रखें।
  • बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति डॉक्टर की सलाह के बाद ही व्रत रखें।

निष्कर्ष

वरुथिनी एकादशी का व्रत भक्ति और विश्वास के साथ करने पर भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। यह न केवल मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि सांसारिक सुखों की प्राप्ति में भी सहायक है। 2025 में इस पावन तिथि पर पूर्ण श्रद्धा से व्रत रखकर भक्त भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

ध्यान दें: सभी धार्मिक कार्य अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ही करें। मंत्रों का उच्चारण किसी विद्वान पंडित की उपस्थिति में सीखकर ही करें।

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