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Anang Trayodashi Vrat Katha: अनंग त्रयोदशी व्रत कथा पढ़ें शिव प्रसन्न होंगे

अनंग त्रयोदशी व्रत कथा पढ़कर भगवान शिव को प्रसन्न करें। जानें इस पावन व्रत का महत्व, विधि और फल, सुख-समृद्धि पाने के लिए।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

अनंग त्रयोदशी व्रत कथा: भगवान शिव की प्रसन्नता का पर्व

हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व है, खासकर जब यह भगवान शिव की उपासना से जुड़ी हो। अनंग त्रयोदशी व्रत एक ऐसा ही पावन अवसर है जिसमें भक्त महादेव की कृपा पाने के लिए व्रत रखते हैं और कथा सुनते हैं। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस लेख में हम आपको अनंग त्रयोदशी व्रत की पूजन विधि, कथा और महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
अनंग त्रयोदशी व्रत कथा: भगवान शिव की प्रसन्नता का पर्वअनंग त्रयोदशी व्रत का महत्वअनंग त्रयोदशी व्रत पूजन विधिसुबह का संकल्पपूजा सामग्रीविशेष पूजन विधिअनंग त्रयोदशी व्रत कथाकथा का उपसंहारअनंग त्रयोदशी व्रत के लाभनिष्कर्ष

अनंग त्रयोदशी व्रत का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। “अनंग” शब्द का अर्थ है “बिना शरीर वाला” जो भगवान शिव के निराकार स्वरूप को दर्शाता है। इस दिन व्रत रखकर कथा सुनने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और उसे शिवलोक की प्राप्ति होती है।

  • इस व्रत से भक्तों को अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है
  • वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बढ़ती है
  • कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं
  • मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

अनंग त्रयोदशी व्रत पूजन विधि

इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:

सुबह का संकल्प

प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करके इस मंत्र के साथ संकल्प लें:

“ॐ नमः शिवाय। मम सर्वपापक्षयपूर्वक सर्वाभीष्टफलप्राप्त्यर्थे अनंगत्रयोदशीव्रतमहं करिष्ये।”

पूजा सामग्री

  • शिवलिंग या शिवजी की मूर्ति
  • बिल्व पत्र, धतूरा, आक के फूल
  • चंदन, रोली, अक्षत
  • दीपक, धूप, कपूर
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)

विशेष पूजन विधि

सर्वप्रथम शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। बिल्व पत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें:

“त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”

शिवजी को धतूरे के फूल अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के अंत में आरती करके प्रसाद वितरण करें।

अनंग त्रयोदशी व्रत कथा

प्राचीन काल में विदर्भ देश में एक ब्राह्मण रहता था जिसका नाम था देवशर्मा। वह अत्यंत धार्मिक और शिवभक्त था। एक बार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन वह जंगल में लकड़ियाँ लेने गया। वहाँ उसे एक विशाल वृक्ष दिखाई दिया जिसके नीचे एक ज्योतिर्लिंग स्थापित था।

देवशर्मा ने उस लिंग को प्रणाम किया और बिल्व पत्रों से पूजा की। संयोग से वह दिन अनंग त्रयोदशी था। जब वह घर लौटा तो उसने अपनी पत्नी को यह सारी घटना सुनाई और दोनों ने उस दिन से नियमित रूप से इस व्रत को करने का संकल्प लिया।

कथा का उपसंहार

कुछ वर्षों बाद देवशर्मा और उसकी पत्नी की मृत्यु हुई। यमदूत उन्हें लेने आए, लेकिन शिवगणों ने उन्हें रोक दिया। भगवान शिव की कृपा से देवशर्मा और उसकी पत्नी को शिवलोक की प्राप्ति हुई। इस प्रकार जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करता है और कथा सुनता है, उसे महादेव की असीम कृपा प्राप्त होती है।

अनंग त्रयोदशी व्रत के लाभ

  • मोक्ष की प्राप्ति: इस व्रत को करने वाले को अंततः शिवलोक की प्राप्ति होती है
  • कष्टों से मुक्ति: जीवन के सभी संकट दूर होते हैं
  • सुखी वैवाहिक जीवन: दांपत्य जीवन में प्रेम और सद्भाव बढ़ता है
  • आरोग्य लाभ: गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है

निष्कर्ष

अनंग त्रयोदशी व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली उपाय है। इस व्रत के माध्यम से भक्त न केवल भौतिक सुखों को प्राप्त करते हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। यदि आप भी जीवन में सुख-शांति और मोक्ष की कामना करते हैं, तो इस पावन तिथि पर विधि-विधान से यह व्रत अवश्य करें। ॐ नमः शिवाय के मंत्र का जाप करते हुए महादेव की कृपा प्राप्त करें।

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