सावन पूर्णिमा: 01 अगस्त को अधिक मास की पवित्र पूर्णिमा
हिंदू धर्म में सावन पूर्णिमा का विशेष महत्व है, खासकर जब यह अधिक मास (मलमास) में पड़ती है। 01 अगस्त 2024 को यह पावन अवसर मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रमा की पूर्ण कला भगवान शिव की कृपा दर्शाती है। इस लेख में जानिए इसका धार्मिक महत्व, पूजा विधि, दान का फल और आध्यात्मिक रहस्य।
सावन अधिक मास पूर्णिमा का महत्व
शास्त्रों में मलमास को शुभ कार्यों के लिए निषिद्ध माना गया है, लेकिन पूर्णिमा इस नियम का अपवाद है। सावन माह में पड़ने वाली यह पूर्णिमा तीन गुना पुण्यफल देने वाली मानी जाती है:
- त्रिविध पुण्य: सावन + पूर्णिमा + अधिक मास का संयोग
- शिव कृपा: इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुलते हैं
- चंद्र दोष शांति: पूर्ण चंद्र की शांत रोशनी मनोविकार दूर करती है
पौराणिक आधार
स्कंद पुराण में वर्णित है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान करने के बाद शिव ने सावन माह में चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया था। इसीलिए इस दिन चंद्र दर्शन और शिव पूजा का विधान है।
सावन पूर्णिमा पूजा विधि
सुबह का संकल्प
- ब्रह्म मुहूर्त (04:00-05:30 AM) में उठकर स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण कर इस मंत्र से संकल्प लें:
“ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः, अस्य श्री विष्णोः अधिकमासपूर्णिमाव्रतमहं करिष्ये”
शिव पूजा विधान
- शिवलिंग या शिव मूर्ति को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और बिल्व पत्र से स्नान कराएं
- चंदन, अक्षत, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें
- इस मंत्र से आरती करें:
“ॐ जय सोम सोमाय नमः, पूर्णचंद्र नमोस्तुते।
यज्ञेश्वराय देवाय, सोमाय च नमो नमः॥”
चंद्र दर्शन की विधि
सूर्यास्त के बाद चांदनी में बैठकर यह क्रिया करें:
- चांद को अर्घ्य देते हुए बोलें: “सोमाय नमः”
- चावल और फूलों से चंद्र की उपासना करें
- इस मंत्र का 108 बार जप करें:
“ॐ सों सोमाय नमः”
सावन पूर्णिमा के दान का महत्व
अधिक मास में किया गया दान 100 गुना फल देता है। इस दिन विशेष रूप से ये दान करें:
वस्तु अनुसार फल
- छाता/चप्पल दान: सूर्य/चंद्र ग्रह दोष से मुक्ति
- गुड़-चना दान: संतान सुख और आरोग्य लाभ
- वस्त्र दान: दरिद्रता दूर होना
- तिल-गंगाजल: पितृ दोष शांति
दान विधि
- लाल कपड़े पर गेहूं रखकर उस पर दान की वस्तु रखें
- हाथ में जल लेकर इस मंत्र का उच्चारण करें:
“इदं दानं मया दत्तं, प्रतिगृह्णातु मे प्रभो।
तव प्रसादात् सर्वाणि, दुःखानि मे विनश्यतु॥”
विशेष सावधानियां एवं टिप्स
- इस दिन उपवास रखकर केवल फलाहार ग्रहण करें
- क्रोध, झूठ और कलह से दूर रहें
- रुद्राक्ष धारण करने से पूजा का फल बढ़ जाता है
- रात्रि में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ अवश्य करें
संक्षेप में
01 अगस्त 2024 की सावन अधिक मास पूर्णिमा एक दुर्लभ योग है। इस दिन शिव आराधना, चंद्र दर्शन और दान से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। याद रखें – इस पूर्णिमा का व्रत करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाता है।
