अक्षय तृतीया 2025: 14 मई को है शुभ अवसर, जानें इसकी महिमा और पूजा विधि
हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। यह त्योहार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। सन 2025 में यह पर्व 14 मई, बुधवार को पड़ रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है तथा सुख-समृद्धि के लिए विशेष योग बनते हैं। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की महिमा, पौराणिक कथाएं और शुभ मुहूर्त।
अक्षय तृतीया का अर्थ और महत्व
संस्कृत शब्द “अक्षय” का अर्थ है – जिसका कभी क्षय न हो, जो कभी नष्ट न हो। इस दिन किए गए दान, पूजन और जप का फल अक्षय होता है। शास्त्रों में इसे “सर्वसिद्धिदायक तिथि” कहा गया है।
- इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म हुआ था
- महाभारत काल में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को अक्षय तृतीया का महत्व बताया था
- इसी दिन गंगा नदी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था
- वेदव्यास जी और भगवान गणेश ने महाभारत का लेखन इसी दिन प्रारंभ किया था
2025 में अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त
14 मई 2025, बुधवार को पड़ने वाली अक्षय तृतीया के दिन विशेष योग बन रहे हैं:
- तिथि: वैशाख शुक्ल तृतीया
- प्रारंभ: 13 मई रात 11:05 बजे से
- समाप्त: 14 मई रात 10:06 बजे तक
- पूजा का श्रेष्ठ समय: प्रातः 05:43 से 12:18 तक
- अभिजीत मुहूर्त: 11:51 से 12:40 तक
अक्षय तृतीया की पौराणिक कथा
पुराणों में वर्णित है कि एक बार महर्षि दुर्वासा के श्राप से माता लक्ष्मी क्षीरसागर छोड़कर चली गईं। इससे तीनों लोकों में दुःख छा गया। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अमृत का दान किया और अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी वापस लौटीं। तभी से यह तिथि धन-धान्य की देवी के आगमन के रूप में मनाई जाती है।
अक्षय तृतीया की पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें:
- लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें
- पंचामृत से अभिषेक करें तथा चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें
- निम्न मंत्र से आवाहन करें: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः”
- सुगंधित धूप-दीप दिखाकर मिष्ठान्न का भोग लगाएं
- अंत में इस मंत्र से आरती करें: “ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता…”
अक्षय तृतीया के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य
इस दिन विशेष कार्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है:
- स्वर्ण/चांदी खरीदना: इस दिन बिना मुहूर्त देखे सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है
- दान-पुण्य: जल, छाता, वस्त्र, फल, मिष्ठान्न आदि का दान करें
- तुलसी पूजन: तुलसी के पौधे में गंगाजल चढ़ाएं और दीपक जलाएं
- अन्नदान: गरीबों को भोजन कराने से अन्न की कभी कमी नहीं होती
- पितृ तर्पण: पितरों को जल अर्पित करने से वंश वृद्धि होती है
अक्षय तृतीया का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन सूर्य और चंद्रमा अपने उच्च बल में होते हैं। 2025 में यह तिथि रोहिणी नक्षत्र में पड़ रही है जो शुभता को और बढ़ा देती है। इस दिन कुंडली के सभी दोषों का निवारण स्वतः हो जाता है।
अक्षय तृतीया के विशेष मंत्र
इस दिन निम्न मंत्रों का जप विशेष फलदायी होता है:
- महालक्ष्मी मंत्र: “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः”
- विष्णु गायत्री मंत्र: “ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्”
- कुबेर मंत्र: “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा”
निष्कर्ष
अक्षय तृतीया का पर्व हमें यह संदेश देता है कि ईश्वर की कृपा और पुण्य कर्मों का फल कभी नष्ट नहीं होता। 14 मई 2025 को इस पावन तिथि पर सच्चे मन से पूजन-अर्चन करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। यह दिन नए शुभ कार्यों को प्रारंभ करने, दान-पुण्य करने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम है। अक्षय तृतीया की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!
