Kharmas 2025: आज से शुरू हो रहा है खरमास, जानें इस दौरान क्या करें और क्या नहीं
हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व है। यह वह समय होता है जब सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। साल 2025 में खरमास 16 दिसंबर से शुरू होकर 14 जनवरी तक रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्यों को टालने की परंपरा है, लेकिन भक्ति और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए यह समय अत्यंत फलदायी माना जाता है। आइए, जानते हैं कि खरमास के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
खरमास क्या है?
खरमास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – “खर” (गधा) और “मास” (महीना)। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान सूर्य देव गधे पर सवार होकर यात्रा करते हैं, इसलिए इसे अशुभ माना जाता है। हालाँकि, यह समय आत्मशुद्धि और भगवान की भक्ति के लिए आदर्श होता है।
खरमास का धार्मिक महत्व
- इस अवधि में सूर्य देव की ऊर्जा कमजोर मानी जाती है।
- शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण आदि नहीं किए जाते।
- भगवान विष्णु और शिव की आराधना का विशेष महत्व है।
खरमास 2025 में क्या करें?
खरमास के दौरान निम्नलिखित कार्य करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है:
1. भगवान विष्णु और शिव की पूजा
- नित्य “ॐ नमो नारायणाय” या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- श्रीमद्भागवत गीता या शिव पुराण का पाठ करें।
- तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाएं।
2. दान-पुण्य का समय
- गरीबों को अनाज, कंबल या गर्म कपड़े दान करें।
- गायों को हरा चारा खिलाएं।
- धार्मिक स्थलों पर दीपदान करें।
3. मौन व्रत और सत्संग
- अधिक बोलने से बचें और आत्मचिंतन करें।
- संतों के प्रवचन सुनें या धार्मिक ग्रंथ पढ़ें।
खरमास में क्या न करें?
इस अवधि में कुछ कार्यों से बचना चाहिए:
1. शुभ संस्कारों से परहेज
- विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य न करें।
- नए व्यवसाय या नौकरी की शुरुआत टालें।
2. तामसिक भोजन से बचें
- मांस-मदिरा और प्याज-लहसुन का सेवन न करें।
- सात्विक भोजन (फल, दूध, घी) ग्रहण करें।
3. अनावश्यक यात्रा न करें
- अगर यात्रा जरूरी हो तो श्री हनुमान चालीसा का पाठ करके निकलें।
खरमास में विशेष मंत्र और आरती
इस समय निम्न मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है:
सूर्य मंत्र
“ॐ घृणि सूर्याय नमः” – 108 बार जाप करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
शिव मंत्र
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्” – इससे कुंडली के दोष दूर होते हैं।
निष्कर्ष
खरमास भले ही शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त न माना जाता हो, लेकिन यह आत्मसुधार और भक्ति का सुनहरा अवसर है। इस समय का सदुपयोग ध्यान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य में करके हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं। 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त होगा और फिर से शुभ कार्यों की शुरुआत होगी।
