नवरात्रि 2025: कलश स्थापना के मंत्र, विधि और पूजा
नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का समय होता है। कलश स्थापना नवरात्रि के पहले दिन की जाने वाली प्रमुख रस्म है, जिसे घटस्थापना भी कहते हैं। इस लेख में हम नवरात्रि 2025 के लिए कलश स्थापना के मंत्र, विधि और पूजा की सम्पूर्ण जानकारी सरल भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं।
कलश स्थापना का महत्व
कलश को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में कलश स्थापना के पीछे मान्यता है कि इसमें देवी दुर्गा सहित सभी देवताओं का आह्वान किया जाता है। कलश के माध्यम से दिव्य ऊर्जा को आमंत्रित करने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है।
- कलश में जल भरकर उस पर नारियल रखा जाता है, जो चंद्रमा और सूर्य का प्रतीक है
- मिट्टी के बर्तन में जौ बोने की परंपरा नवजीवन और उर्वरता का संकेत देती है
- कलश के आसपास दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
नवरात्रि 2025 में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि 2025 में कलश स्थापना के लिए शुभ तिथि और समय इस प्रकार है:
- तिथि: 1 अप्रैल 2025 (मंगलवार)
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 31 मार्च 2025 को रात 11:50 बजे से
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: 1 अप्रैल 2025 को रात 09:11 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:54 तक
ध्यान रखें: कलश स्थापना हमेशा सुबह के समय ही करनी चाहिए। यदि किसी कारणवश सुबह न हो पाए तो अभिजीत मुहूर्त में भी कर सकते हैं।
कलश स्थापना की तैयारी
आवश्यक सामग्री
- मिट्टी का कलश: तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश उपयुक्त रहता है
- जल: गंगाजल या साफ पानी
- नारियल: लाल कपड़े में लिपटा हुआ
- आम के पत्ते: 5 या 7 पत्तों का गुच्छा
- सुपारी, सिक्का, फूल, अक्षत: पूजा के लिए
- जौ: मिट्टी के बर्तन में बोने के लिए
- कुमकुम, हल्दी, चंदन: सजावट और पूजा हेतु
पूजा स्थल की तैयारी
कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लें:
- घर के पूर्व या उत्तर दिशा में साफ स्थान चुनें
- चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं
- गोबर से मंडप बनाकर उसे फूलों से सजाएं
- कलश रखने के लिए चावल की ढेरी बनाएं
कलश स्थापना की विधि
चरण 1: कलश की सजावट
- कलश में थोड़ा सा जल डालकर सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें
- कलश के मुख पर रोली से स्वस्तिक बनाएं
- कलश के गले में मौली बांधें और आम के पत्ते लगाएं
- कलश पर कुमकुम, हल्दी और चंदन का तिलक करें
चरण 2: कलश स्थापना मंत्र
कलश पर हाथ रखकर निम्न मंत्र बोलें:
“ॐ आयांतु देवपूज्यार्थं गृह्यतां कलशो मया।
सर्वसमृद्धिकरणं सर्वाभीष्टफलप्रदम्॥”
इसके बाद कलश को चावल की ढेरी पर स्थापित करें और नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर रखें।
चरण 3: कलश पूजन
- कलश पर फूल चढ़ाएं और धूप-दीप दिखाएं
- इस मंत्र से कलश में देवताओं का आह्वान करें:
“कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रिताः।
मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥”
जौ बोने की विधि
कलश स्थापना के साथ ही मिट्टी के बर्तन में जौ बोने की परंपरा है:
- मिट्टी के छोटे बर्तन में उपजाऊ मिट्टी भरें
- जौ के दाने बोने से पहले इस मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं नवदुर्गायै नमः, जौ रोपणं करिष्ये”
- जौ के ऊपर हल्की मिट्टी डालकर पानी छिड़कें
- इस बर्तन को कलश के पास रखें और प्रतिदिन पानी दें
नवरात्रि में दैनिक पूजा विधि
कलश स्थापना के बाद नौ दिनों तक इस प्रकार पूजा करें:
- प्रातः: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- आचमन: गंगाजल से आचमन कर शुद्धि मंत्र बोलें
- ध्यान: माँ दुर्गा के रूप का ध्यान करें
- आरती: दुर्गा चालीसा या सप्तश्लोकी पाठ के बाद आरती करें
- प्रसाद: नैवेद्य अर्पित कर भक्तों में वितरित करें
कलश विसर्जन की विधि
नवरात्रि के अंतिम दिन कलश का विसर्जन करें:
- सुबह पूजा के बाद कलश को प्रणाम करें
- कलश का जल किसी पवित्र नदी या घर के पौधों में डालें
- नारियल को प्रसाद के रूप में वितरित करें
- जौ के पौधे को किसी पवित्र स्थान पर रख दें
इस प्रकार कलश स्थापना से लेकर विसर्जन तक की सम्पूर्ण विधि पूर्ण होती है।
निष्कर्ष
नवरात्रि का पर्व आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का सुअवसर है। कलश स्थापना इस पर्व का प्रथम और महत्वपूर्ण चरण है जो सम्पूर्ण पूजा को सफल बनाता है। 2025 की नवरात्रि में उपरोक्त विधि से कलश स्थापना कर आप माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें, श्रद्धा और विश्वास से की गई छोटी सी पूजा भी महाफल देने वाली होती है।
शुभ नवरात्रि! माँ दुर्गा आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।
