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Navratri 2025: कंजक पूजन में नौ कन्याओं के साथ लड़के का पूजन क्यों

जानिए नवरात्रि 2025 में कंजक पूजन में नौ कन्याओं के साथ एक लड़के का पूजन क्यों किया जाता है इसका महत्व और विधि

Published July 2, 2026
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5 Min Read

कंजक पूजन का महत्व

नवरात्रि के पावन पर्व पर कंजक पूजन का विशेष महत्व होता है। यह परंपरा नौ कन्याओं और एक लड़के की पूजा से जुड़ी है, जो देवी के नौ रूपों और भगवान शिव के प्रतीक के रूप में मानी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नौ कन्याओं के साथ एक लड़के की पूजा क्यों की जाती है? आइए, इस पवित्र परंपरा के रहस्य को समझते हैं।

Contents
कंजक पूजन का महत्वकंजक पूजन क्या है?नौ कन्याएँ और एक लड़का: पौराणिक महत्व1. नौ कन्याएँ – देवी के नौ स्वरूप2. एक लड़का – भैरव का प्रतीककंजक पूजन की विधि1. पूजा की तैयारी2. पूजन विधिक्यों जरूरी है लड़के का पूजन?पौराणिक कथा: कंजक पूजन का रहस्यनिष्कर्ष: पूर्णता का प्रतीक

कंजक पूजन क्या है?

कंजक पूजन नवरात्रि के नवमी या अष्टमी तिथि पर किया जाने वाला एक पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें:

  • नौ कन्याओं (जो माँ दुर्गा के नौ रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं) की पूजा की जाती है।
  • एक लड़के (जिसे “भैरव” या “लांगुर” कहा जाता है) का भी आह्वान किया जाता है।

इस पूजा का उद्देश्य देवी के आशीर्वाद के साथ-साथ सुरक्षा और समृद्धि प्राप्त करना है।

नौ कन्याएँ और एक लड़का: पौराणिक महत्व

1. नौ कन्याएँ – देवी के नौ स्वरूप

शास्त्रों के अनुसार, नौ कन्याएँ माँ दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक हैं:

  • कुमारी (1-2 वर्ष) – माँ शैलपुत्री
  • त्रिमूर्ति (3 वर्ष) – माँ ब्रह्मचारिणी
  • कल्याणी (5 वर्ष) – माँ चंद्रघंटा
  • रोहिणी (7 वर्ष) – माँ कुष्मांडा
  • कालिका (9 वर्ष) – माँ स्कंदमाता
  • चंडिका (11 वर्ष) – माँ कात्यायनी
  • शांभवी (13 वर्ष) – माँ कालरात्रि
  • दुर्गा (15 वर्ष) – माँ महागौरी
  • सुभद्रा (16 वर्ष) – माँ सिद्धिदात्री

इन कन्याओं को भोजन कराकर, नए वस्त्र और उपहार देकर पूजा जाता है, जिससे देवी प्रसन्न होती हैं।

2. एक लड़का – भैरव का प्रतीक

नौ कन्याओं के साथ एक लड़के की पूजा का विधान भी है, जिसे “भैरव” या “लांगुर” (हनुमान जी का रूप) माना जाता है। इसके पीछे कई मान्यताएँ हैं:

  • शक्ति और शिव का संतुलन: देवी शक्ति हैं और भैरव शिव के रूप। दोनों का पूजन शुभता लाता है।
  • रक्षा का प्रतीक: लड़का (भैरव) देवी की रक्षा करने वाला माना जाता है।
  • संपूर्णता का भाव: नौ कन्याएँ + एक लड़का = दशमी (पूर्णता) का प्रतीक।

कंजक पूजन की विधि

यदि आप नवरात्रि में कंजक पूजन करना चाहते हैं, तो इस विधि का पालन करें:

1. पूजा की तैयारी

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • लाल या पीले रंग का आसन बिछाएँ।
  • नौ कन्याओं और एक लड़के को आमंत्रित करें।

2. पूजन विधि

  • कन्याओं के पैर धोकर तिलक लगाएँ।
  • उन्हें मिष्ठान, हलवा-पूड़ी या चना-पूड़ी का भोग लगाएँ।
  • इस मंत्र का उच्चारण करें:

    “सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्य सुतान्वित:। मनुष्यो मत्प्रसादेन, भविष्यति न संशय:।।”

  • अंत में उन्हें दक्षिणा और उपहार देकर विदा करें।

क्यों जरूरी है लड़के का पूजन?

कई लोग सोचते हैं कि सिर्फ कन्याओं की पूजा ही क्यों नहीं की जाती? इसके पीछे गहरा तात्पर्य है:

  • द्वैत भाव का प्रतीक: शिव और शक्ति, नर और नारी, ग्रहण और दान – सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए दोनों की उपस्थिति जरूरी है।
  • भैरव की भूमिका: भगवान भैरव देवी के अनुचर हैं और उनकी रक्षा करते हैं। इसलिए उनका पूजन भी आवश्यक है।
  • अशुभ शक्तियों से बचाव: मान्यता है कि लड़के (भैरव) की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

पौराणिक कथा: कंजक पूजन का रहस्य

एक कथा के अनुसार, माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया, लेकिन उसके बाद भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। तब भगवान शिव ने भैरव के रूप में प्रकट होकर देवी को शांत किया। तभी से नौ कन्याओं के साथ भैरव (लड़के) की पूजा की परंपरा शुरू हुई।

निष्कर्ष: पूर्णता का प्रतीक

कंजक पूजन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि देवी और शिव के संयुक्त तत्व का प्रतीक है। नौ कन्याएँ और एक लड़का – यह संयोजन हमें याद दिलाता है कि जीवन में शक्ति और संरक्षण दोनों जरूरी हैं। इस नवरात्रि, इस पवित्र परंपरा को पूरे विश्वास के साथ निभाएँ और माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करें।

“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।”

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