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Padmini Ekadashi Vrat 2025: अधिक मास में इस व्रत का बड़ा महत्व

अधिक मास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी व्रत 2025 का विशेष महत्व जानें। इस व्रत के नियम, पूजा विधि और फल के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करें।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

Padmini Ekadashi Vrat 2025: अधिक मास में है इस एकादशी व्रत का बड़ा महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन जब यह व्रत अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास में पड़ता है, तो इसकी पवित्रता और भी बढ़ जाती है। वर्ष 2025 में पद्मिनी एकादशी का व्रत अधिक मास में मनाया जाएगा, जो भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी होगा। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। आइए, जानते हैं इस व्रत की पूजा विधि, महत्व और कथा के बारे में विस्तार से।

Contents
Padmini Ekadashi Vrat 2025: अधिक मास में है इस एकादशी व्रत का बड़ा महत्वपद्मिनी एकादशी 2025: तिथि और समयपद्मिनी एकादशी व्रत का महत्वअधिक मास का विशेष संयोगपद्मिनी एकादशी व्रत विधिपारण विधिपद्मिनी एकादशी की कथापद्मिनी एकादशी व्रत के लाभनिष्कर्ष

पद्मिनी एकादशी 2025: तिथि और समय

वर्ष 2025 में पद्मिनी एकादशी का व्रत अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाएगा। इसकी तिथि और मुहूर्त निम्नलिखित है:

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 22 जुलाई 2025, सुबह 05:32 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 23 जुलाई 2025, सुबह 07:53 बजे
  • व्रत पारण का समय: 24 जुलाई 2025, सुबह 05:43 बजे से 08:29 बजे तक

पद्मिनी एकादशी व्रत का महत्व

अधिक मास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत को करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत के संबंध में कई मान्यताएं हैं:

  • यह व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
  • अधिक मास में किए गए पुण्य कर्म का फल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए इस दिन व्रत रखना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • इस व्रत से घर में सुख-समृद्धि आती है और पारिवारिक कलह दूर होती है।

अधिक मास का विशेष संयोग

हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिक मास हर तीन वर्ष में एक बार आता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है। पद्मिनी एकादशी का अधिक मास में पड़ना भक्तों के लिए एक सुनहरा अवसर है।

पद्मिनी एकादशी व्रत विधि

इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करना चाहिए:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान: एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • व्रत का संकल्प: भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा विधि: तुलसी के पास दीपक जलाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर पर फूल, तुलसी दल, फल और मेवे अर्पित करें।
  • मंत्र जाप: इस दिन निम्न मंत्र का जाप करें:
    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • रात्रि जागरण: रात में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

पारण विधि

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन सूर्योदय के बाद करना चाहिए। पारण के समय सबसे पहले तुलसी दल ग्रहण करें और फिर फलाहार या सात्विक भोजन करें।

पद्मिनी एकादशी की कथा

पद्मिनी एकादशी की कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक राजा थे जिनका नाम कार्तवीर्य था। वे बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे और नियमित रूप से एकादशी व्रत रखते थे। एक बार अधिक मास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी के दिन उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना की। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हुई और उनका राज्य समृद्धिशाली बन गया।

इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत सच्चे मन से करने पर भगवान विष्णु अपने भक्तों पर अवश्य कृपा बरसाते हैं।

पद्मिनी एकादशी व्रत के लाभ

इस व्रत को करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • जीवन के सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
  • आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • अधिक मास में इस व्रत को करने से पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है।

निष्कर्ष

पद्मिनी एकादशी का व्रत अधिक मास में पड़ने के कारण वर्ष 2025 में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और जीवन के सभी कष्टों को दूर करने का सर्वोत्तम साधन है। इस दिन पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखकर भक्त भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर पद्मिनी एकादशी का व्रत रखकर अपने जीवन को धन्य बनाएं।

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