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सावन की पवित्र एकादशी जानें इसका महत्व

सावन महीने की पवित्र एकादशी का महत्व जानें इस दिन व्रत रखने से मिलता है मोक्ष और भगवान विष्णु की कृपा

Published July 2, 2026
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4 Min Read

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और व्रत-उपवास के लिए विशेष माना जाता है। इस पावन माह में पड़ने वाली कामिका एकादशी सबसे पवित्र और फलदायी मानी जाती है। यह एकादशी भक्तों के लिए मोक्ष, पापों की मुक्ति और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का सुनहरा अवसर होती है।

Contents
कामिका एकादशी: शुभ तिथि और मुहूर्त2024 में कामिका एकादशी की तिथिपारण का समय (एकादशी व्रत तोड़ने का शुभ मुहूर्त)कामिका एकादशी का धार्मिक महत्वक्यों है यह विशेष?पौराणिक कथा: कामिका एकादशी व्रत की उत्पत्तिगांव का ब्राह्मण और उसका पापकामिका एकादशी व्रत विधिव्रत की तैयारी (दशमी के दिन)एकादशी के दिन क्या करें?विशेष मंत्र और आरतीकामिका एकादशी मंत्रविष्णु आरतीकामिका एकादशी का फलआध्यात्मिक लाभ की अनुपम तिथि

इस लेख में हम जानेंगे:

  • कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व
  • व्रत कथा और पूजा विधि
  • इस दिन किए जाने वाले विशेष मंत्र एवं आरती
  • सावन एकादशी के अनुष्ठानों का फल

कामिका एकादशी: शुभ तिथि और मुहूर्त

2024 में कामिका एकादशी की तिथि

इस वर्ष कामिका एकादशी 10 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी।

पारण का समय (एकादशी व्रत तोड़ने का शुभ मुहूर्त)

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 09 अगस्त को रात 09:32 बजे से
  • एकादशी तिथि समाप्त: 10 अगस्त को रात 11:43 बजे तक
  • पारण मुहूर्त: 11 अगस्त को सुबह 05:43 से 08:16 तक

कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व

पुराणों के अनुसार, सावन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को “कामिका एकादशी” कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे करने से सभी पापों का नाश होता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में इसका विस्तार से वर्णन मिलता है।

क्यों है यह विशेष?

  • सावन में शिव आराधना के साथ विष्णु भक्ति का संयोग
  • एक व्रत से दोनों देवताओं की कृपा प्राप्ति
  • पितृ दोष और कर्ज से मुक्ति का अवसर

पौराणिक कथा: कामिका एकादशी व्रत की उत्पत्ति

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा: “हे प्रभु! सावन मास की कृष्ण एकादशी का क्या महत्व है?” तब श्रीकृष्ण ने इसकी कथा सुनाई:

गांव का ब्राह्मण और उसका पाप

एक गाँव में एक पापी ब्राह्मण रहता था। उसने चोरी, झूठ और हिंसा जैसे अनेक पाप किए। एक दिन उसे गहरी पीड़ा हुई और वह मृत्यु के भय से व्याकुल हो गया। तब एक संत ने उसे कामिका एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ब्राह्मण ने पूरी श्रद्धा से व्रत किया और अंततः उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

कामिका एकादशी व्रत विधि

व्रत की तैयारी (दशमी के दिन)

  • सूर्यास्त से पहले भोजन करें
  • रात को पूजा स्थल की सफाई करें
  • शुद्ध जल से स्नान कर नए वस्त्र धारण करें

एकादशी के दिन क्या करें?

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  2. भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए संकल्प लें
  3. घर के मंदिर में तुलसी दल, फल और फूल चढ़ाएं
  4. इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

विशेष मंत्र और आरती

कामिका एकादशी मंत्र

इस दिन इस मंत्र का जाप अवश्य करें:

“श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा।
एकादशी के व्रत को मैं नियम से करता हूँ, मेरे सभी पापों का नाश हो।”

विष्णु आरती

व्रत के अंत में यह आरती करें:

  
जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।  
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥  

कामिका एकादशी का फल

शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से:

  • 100 अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है
  • पितृ दोष और कुंडली के अशुभ योग दूर होते हैं
  • आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है

आध्यात्मिक लाभ की अनुपम तिथि

सावन की कामिका एकादशी भक्ति और संयम का अनुपम संगम है। यह व्रत न केवल मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि सांसारिक सुखों की प्राप्ति में भी सहायक है। इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए पूरी श्रद्धा से व्रत करें और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करें।

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