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Shardiya Navratri 2025 शारदीय नवरात्रि तिथियां विजय दशमी तक

शारदीय नवरात्रि 2025 की तिथियां आरंभ से विजय दशमी तक जानें पूजा विधि और महत्व हिंदी में यहाँ पढ़ें

Published July 2, 2026
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5 Min Read

शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है, जो माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना को समर्पित है। 2025 में यह पर्व 26 सितंबर से 4 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस दिव्य उत्सव की सभी महत्वपूर्ण तिथियाँ, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व।

Contents
शारदीय नवरात्रि 2025 की प्रमुख तिथियाँघटस्थापना और कलश स्थापना का महत्वघटस्थापना मुहूर्त 2025नवरात्रि के नौ दिन और नौ देवियाँ1. प्रथमा (माँ शैलपुत्री)2. द्वितीया (माँ ब्रह्मचारिणी)3. तृतीया (माँ चंद्रघंटा)4. चतुर्थी (माँ कुष्मांडा)5. पंचमी (माँ स्कंदमाता)6. षष्ठी (माँ कात्यायनी)7. सप्तमी (माँ कालरात्रि)8. अष्टमी (माँ महागौरी)9. नवमी (माँ सिद्धिदात्री)विजय दशमी (दशहरा) का महत्वनवरात्रि पूजा के लिए आवश्यक सामग्रीनवरात्रि व्रत के नियमनिष्कर्ष

शारदीय नवरात्रि 2025 की प्रमुख तिथियाँ

  • प्रतिपदा (26 सितंबर 2025): घटस्थापना, कलश स्थापना, माँ शैलपुत्री पूजा
  • द्वितीया (27 सितंबर 2025): माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
  • तृतीया (28 सितंबर 2025): माँ चंद्रघंटा पूजा
  • चतुर्थी (29 सितंबर 2025): माँ कुष्मांडा पूजा
  • पंचमी (30 सितंबर 2025): माँ स्कंदमाता पूजा
  • षष्ठी (1 अक्टूबर 2025): माँ कात्यायनी पूजा, सरस्वती आवाहन
  • सप्तमी (2 अक्टूबर 2025): माँ कालरात्रि पूजा
  • अष्टमी (3 अक्टूबर 2025): माँ महागौरी पूजा, कन्या पूजन
  • नवमी (4 अक्टूबर 2025): माँ सिद्धिदात्री पूजा, हवन
  • दशमी (5 अक्टूबर 2025): विजय दशमी, दशहरा पर्व

घटस्थापना और कलश स्थापना का महत्व

नवरात्रि का प्रारंभ घटस्थापना से होता है। इस दिन मिट्टी के कलश में जल भरकर उस पर नारियल स्थापित किया जाता है। यह कलश माँ दुर्गा का प्रतीक माना जाता है। घटस्थापना के समय यह मंत्र पढ़ा जाता है:

“विघ्नहर्ता गणपति, पूजितो यत्र सर्वदा।
तत्र सिद्धिः सदा देवि, भविष्यति न संशयः।।
“

घटस्थापना मुहूर्त 2025

26 सितंबर 2025 को प्रातः 06:23 से 10:15 तक घटस्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा।

नवरात्रि के नौ दिन और नौ देवियाँ

नवरात्रि के प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है:

1. प्रथमा (माँ शैलपुत्री)

इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। इनकी पूजा से मनुष्य को आत्मबल प्राप्त होता है।

2. द्वितीया (माँ ब्रह्मचारिणी)

तपस्या की देवी माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना से धैर्य और साहस की प्राप्ति होती है।

3. तृतीया (माँ चंद्रघंटा)

इनके मस्तक पर अर्धचंद्र विराजमान है। इनकी पूजा से मानसिक शांति मिलती है।

4. चतुर्थी (माँ कुष्मांडा)

सृष्टि की आदि शक्ति माँ कुष्मांडा की उपासना से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

5. पंचमी (माँ स्कंदमाता)

कार्तिकेय की माता के रूप में पूजित इन देवी की कृपा से संतान सुख प्राप्त होता है।

6. षष्ठी (माँ कात्यायनी)

ऋषि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर जन्मीं माँ कात्यायनी विवाह और सुखद दांपत्य जीवन प्रदान करती हैं।

7. सप्तमी (माँ कालरात्रि)

यह माँ दुर्गा का भयंकर रूप है जो भक्तों की सभी बाधाओं का नाश करती हैं।

8. अष्टमी (माँ महागौरी)

श्वेत वस्त्र धारण करने वाली माँ महागौरी पापों से मुक्ति दिलाती हैं। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है।

9. नवमी (माँ सिद्धिदात्री)

नवरात्रि के अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

विजय दशमी (दशहरा) का महत्व

5 अक्टूबर 2025 को मनाए जाने वाले विजय दशमी पर्व के बारे में मान्यता है कि इसी दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। साथ ही, भगवान राम ने भी रावण पर इसी दिन विजय प्राप्त की थी।

इस दिन शस्त्र पूजन और रावण दहन की परंपरा है। विजय दशमी पर यह श्लोक पढ़ना शुभ माना जाता है:

“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
“

नवरात्रि पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

  • मिट्टी का कलश
  • नारियल और आम के पत्ते
  • लाल कपड़ा
  • अक्षत (चावल)
  • फूल और फल
  • दीपक और धूप
  • कुमकुम, हल्दी, चंदन
  • नवरात्रि व्रत कथा पुस्तक

नवरात्रि व्रत के नियम

नवरात्रि में व्रत रखने वाले भक्तों को इन नियमों का पालन करना चाहिए:

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें
  • मन को नकारात्मक विचारों से मुक्त रखें
  • प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
  • नौ दिनों तक बाल न कटवाएँ
  • झूठ, चोरी और किसी का अहित न करें

निष्कर्ष

शारदीय नवरात्रि का पर्व हमें आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। 2025 में इन पावन नौ दिनों में माँ दुर्गा की भक्ति से अपने जीवन को धन्य बनाएँ। सभी पाठकों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!

ध्यान दें: पूजा-विधि और मुहूर्त समय स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं।

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