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मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनने की प्रथा का इतिहास

मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की प्रथा कैसे शुरू हुई जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा और महत्व

Published July 2, 2026
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5 Min Read

मकर संक्रांति हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह पर्व पौष मास की संक्रांति को पड़ता है और इसे भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे:

Contents
मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की पौराणिक कथाभगवान शिव और खिचड़ी का संबंधबाबा गोरखनाथ और खिचड़ी परंपराखिचड़ी का धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्वधार्मिक दृष्टिकोणआयुर्वेदिक लाभमकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की विधिसामग्री (4 लोगों के लिए)विधिमकर संक्रांति पर खिचड़ी दान का महत्वभारत के विभिन्न राज्यों में खिचड़ी की विविधताउत्तर प्रदेश की तहरीगुजरात की खिचड़ीबिहार की लिट्टी-खिचड़ीसंस्कृति और स्वास्थ्य का संगम
  • पंजाब में लोहड़ी
  • तमिलनाडु में पोंगल
  • असम में भोगली बिहू
  • उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी पर्व

इस दिन तिल-गुड़, दान-पुण्य, स्नान और खिचड़ी का विशेष महत्व होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की प्रथा कैसे शुरू हुई? आइए, इसके पीछे की रोचक कथा जानते हैं।

मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की पौराणिक कथा

भगवान शिव और खिचड़ी का संबंध

पुराणों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन ही भगवान शिव ने खिचड़ी का आविष्कार किया था। कहा जाता है कि एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा, “प्रभु, सर्दियों में ठंड से बचने के लिए ऐसा कोई सात्विक आहार बताइए जो शरीर को गर्मी दे और पोषण भी प्रदान करे।”

तब भगवान शिव ने चावल, दाल, हल्दी, नमक और घी को मिलाकर एक नया व्यंजन बनाया, जिसे आज हम खिचड़ी के नाम से जानते हैं। यह न केवल पौष्टिक था, बल्कि सर्दियों में शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता था।

बाबा गोरखनाथ और खिचड़ी परंपरा

एक अन्य मान्यता के अनुसार, यह प्रथा नाथ सम्प्रदाय के संत बाबा गोरखनाथ से जुड़ी हुई है। कहते हैं कि गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में सर्दियों के मौसम में योगियों को ठंड से बचाने के लिए खिचड़ी बनाकर वितरित की जाती थी। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे उत्तर भारत में फैल गई।

खिचड़ी का धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व

धार्मिक दृष्टिकोण

मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाना और दान करना पुण्य का काम माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है:

“माघमासे महाभाग, खिचड़ी दानमुत्तमम्।
तिलगुड़समायुक्तं, कोटिजन्मार्जितं फलम्॥”

अर्थात, माघ मास में तिल और गुड़ के साथ खिचड़ी का दान करने से कोटि जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

आयुर्वेदिक लाभ

खिचड़ी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आयुर्वेद में इसे संतुलित आहार माना गया है:

  • पाचन शक्ति को बढ़ाती है
  • ऊर्जा प्रदान करती है
  • वात-पित्त-कफ को संतुलित करती है
  • सर्दी-जुकाम से बचाव करती है

मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की विधि

सामग्री (4 लोगों के लिए)

  • 1 कप चावल
  • 1/2 कप मूंग दाल
  • 1 छोटा चम्मच हल्दी
  • नमक स्वादानुसार
  • 2 चम्मच घी
  • 1/2 छोटा चम्मच जीरा
  • 1 छोटा चम्मच अदरक (कद्दूकस किया हुआ)
  • 4 कप पानी

विधि

  1. सबसे पहले चावल और दाल को अच्छी तरह धो लें।
  2. प्रेशर कुकर में घी गर्म करें और जीरा डालकर भूनें।
  3. अदरक डालकर हल्का सा भूनें।
  4. अब चावल, दाल, हल्दी और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
  5. पानी डालकर 3-4 सीटी आने तक पकाएं।
  6. गर्म-गर्म खिचड़ी पर घी डालकर परोसें।

मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान का महत्व

इस दिन खिचड़ी दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि:

  • खिचड़ी दान करने से पितृ दोष दूर होता है
  • इसे ब्राह्मणों को दान देने से आयु और आरोग्य में वृद्धि होती है
  • गरीबों को खिचड़ी खिलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है

भारत के विभिन्न राज्यों में खिचड़ी की विविधता

उत्तर प्रदेश की तहरी

यहाँ चावल और दाल के साथ सब्जियाँ डालकर तहरी बनाई जाती है।

गुजरात की खिचड़ी

इसमें मूंगफली और घी का प्रयोग अधिक किया जाता है।

बिहार की लिट्टी-खिचड़ी

यहाँ खिचड़ी के साथ सत्तू की लिट्टी खाने का प्रचलन है।

संस्कृति और स्वास्थ्य का संगम

मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की प्रथा न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, बल्कि यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पूर्णतः उचित है। सर्दियों में यह शरीर को गर्मी देती है और पोषण प्रदान करती है। इसलिए इस पर्व पर घर में खिचड़ी अवश्य बनाएं और गरीबों को दान करके पुण्य कमाएं।

“मकर संक्रांति के पावन अवसर पर,
खिचड़ी दान से हो पाप का नाश।
तिल-गुड़ का प्रसाद ग्रहण कर,
जीवन में आए सुख-समृद्धि की लहर॥”

आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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