MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: Vat Savitri Vrat 2025 वट सावित्री व्रत कथा अखंड सौभाग्य प्राप्ति
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

Vat Savitri Vrat 2025 वट सावित्री व्रत कथा अखंड सौभाग्य प्राप्ति

वट सावित्री व्रत 2025 की पूजा विधि और कथा जानें, अखंड सौभाग्य पाने के लिए। इस व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और आरती पढ़ें।

Published July 2, 2026
Share
6 Min Read

वट सावित्री व्रत 2025: अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का पावन अवसर

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से किया जाता है। 2025 में वट सावित्री व्रत का यह पावन पर्व अत्यंत शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा। इस लेख में हम आपको व्रत की पूजन विधि, कथा और महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
वट सावित्री व्रत 2025: अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का पावन अवसरवट सावित्री व्रत का महत्ववट सावित्री व्रत 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्तपूजा का शुभ समयवट सावित्री व्रत की पूजन विधिसुबह की तैयारीपूजा सामग्रीपूजा विधिवट सावित्री व्रत की पौराणिक कथासावित्री और सत्यवान की कथासावित्री और यमराज का संवादवट सावित्री व्रत के लाभविशेष सुझाव और सावधानियांक्या करेंक्या न करेंनिष्कर्ष

वट सावित्री व्रत का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत सावित्री और सत्यवान की अमर कथा से जुड़ा है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। वट वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है।

  • वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास
  • सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से छीनकर अमरत्व प्रदान किया
  • व्रत रखने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है

वट सावित्री व्रत 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

2025 में वट सावित्री व्रत 10 जून, मंगलवार को मनाया जाएगा। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि इस व्रत के लिए सर्वाधिक शुभ मानी जाती है।

पूजा का शुभ समय

  • सुबह 05:30 बजे से 10:15 बजे तक (ब्रह्म मुहूर्त)
  • मध्याह्न 12:00 बजे से 03:45 बजे तक (अभिजीत मुहूर्त)

वट सावित्री व्रत की पूजन विधि

इस व्रत को करने की विधि बेहद सरल है, लेकिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:

सुबह की तैयारी

  • प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
  • साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें (पीले या लाल रंग का वस्त्र शुभ)
  • पूजा की थाली तैयार करें

पूजा सामग्री

  • वट वृक्ष के पत्ते
  • फूल, अक्षत, रोली
  • कलावा, मौली
  • फल, मिठाई
  • दीपक, धूप

पूजा विधि

वट वृक्ष के नीचे बैठकर निम्न मंत्रों के साथ पूजा करें:

ॐ सावित्र्यै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें

वट वृक्ष के चारों ओर कलावा लपेटकर परिक्रमा करें और इस मंत्र का उच्चारण करें:

“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।”

वट सावित्री व्रत की पौराणिक कथा

इस व्रत की कथा सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। कहानी सत्यवान और सावित्री की अमर प्रेम गाथा पर आधारित है:

सावित्री और सत्यवान की कथा

एक समय की बात है, मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री थी। उसका विवाह सत्यवान नामक युवक से हुआ। सत्यवान के पिता राजा थे लेकिन वनवास के कारण गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे थे।

एक दिन नारद मुनि ने बताया कि सत्यवान की आयु केवल एक वर्ष शेष है। इसके बावजूद सावित्री ने पति का साथ नहीं छोड़ा। जिस दिन सत्यवान की मृत्यु होनी थी, वह दिन भी आ गया।

सावित्री और यमराज का संवाद

जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए, तो सावित्री ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उसकी निष्ठा और तपस्या से प्रसन्न होकर यमराज ने तीन वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने बुद्धिमानी से वरदान मांगे:

  • पहला वरदान: अपने ससुर का खोया हुआ राज्य वापस मिले
  • दूसरा वरदान: अपने माता-पिता को संतान सुख प्राप्त हो
  • तीसरा वरदान: स्वयं सौ पुत्रों की माता बनने का वरदान

यमराज ने तीनों वरदान दे दिए। जब यमराज जाने लगे तो सावित्री ने कहा – “हे यमराज! आपने मुझे सौ पुत्रों का वरदान दिया है, किंतु मेरे पति के बिना यह कैसे संभव है?” यमराज विवश हो गए और उन्हें सत्यवान के प्राण वापस लौटाने पड़े।

वट सावित्री व्रत के लाभ

इस व्रत को करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति
  • पारिवारिक सुख-शांति बनी रहती है
  • संतान सुख की प्राप्ति होती है
  • कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है
  • आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है

विशेष सुझाव और सावधानियां

वट सावित्री व्रत करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

क्या करें

  • व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • वट वृक्ष की पूजा सूर्योदय के समय करें
  • कथा को पूर्ण श्रद्धा से सुनें और सुनाएं

क्या न करें

  • व्रत के दिन किसी का अपमान न करें
  • नकारात्मक विचार मन में न लाएं
  • वट वृक्ष की पत्तियां न तोड़ें

निष्कर्ष

वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है जो सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। 2025 में वट सावित्री व्रत के इस पावन अवसर पर इस कथा को पढ़ने, सुनने और व्रत रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सावित्री की तरह हर स्त्री को अपने पति के प्रति समर्पण और निष्ठा रखनी चाहिए।

इस व्रत का संदेश है कि सच्ची भक्ति और दृढ़ संकल्प से किसी भी विपत्ति पर विजय प्राप्त की जा सकती है। आप सभी को वट सावित्री व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं!

You Might Also Like

हनुमानजी गुस्से में क्यों हैं तस्वीर बनाने वाला कौन

केदारनाथ दर्शन का फल इनके दर्शन से भी मिलता है

श्रावणी पर्व: धरती पर जीवन जागा

मौत की आहट सुन सकते हैं छह महीने पहले करें यह उपाय

Moon Black Spot: चंद्रमा को क्यों और किसने दिया श्राप दाग का रहस्य?

Share

Latest News

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
Religion Spirituality July 2, 2026
राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
Religion Spirituality July 2, 2026
Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
Religion Spirituality July 2, 2026
Durga Puja 2025 आज से शुरू जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Religion Spirituality July 2, 2026

You Might also Like

शिव और कृष्ण में छिड़ा संग्राम Shiv Krishna Yudh

July 2, 2026

गणेश पूजा और उत्सव की खास बातें जानिए

July 2, 2026

जनेऊ दाएं कान पर ही क्यों लपेटते हैं? Why is Janeu worn on the right ear?

July 2, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
  • राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
  • Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech HTML sitemap
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?