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क्यों मरते समय आँखें उलट जाती हैं? Why do eyes roll back at death?

जानें क्यों मरते समय किसी व्यक्ति की आंखें उलट जाती हैं - इस रहस्यमय शारीरिक प्रक्रिया के पीछे की वैज्ञानिक और मेडिकल वजहें समझें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

क्यों मरते समय किसी व्यक्ति की आंखें उलट जाती है?

मृत्यु एक ऐसा रहस्य है जिसने सदियों से मनुष्य को विचलित किया है। जब कोई व्यक्ति अपने जीवन की अंतिम सांसें लेता है, तो अक्सर उसकी आंखें ऊपर की ओर उलट जाती हैं। यह दृश्य देखने वालों के मन में कई सवाल पैदा करता है। क्या यह केवल शारीरिक प्रक्रिया है, या इसके पीछे कोई आध्यात्मिक रहस्य छिपा है? आइए, इस विषय को विज्ञान और आध्यात्मिकता दोनों के नजरिए से समझने का प्रयास करें।

Contents
क्यों मरते समय किसी व्यक्ति की आंखें उलट जाती है?शारीरिक कारण: विज्ञान की दृष्टि सेआध्यात्मिक व्याख्या: शास्त्रों के अनुसारमृत्यु के समय क्या करें?विभिन्न संस्कृतियों में मान्यताएंनिष्कर्ष: जीवन और मृत्यु का चक्र

शारीरिक कारण: विज्ञान की दृष्टि से

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, मृत्यु के समय आंखों का उलटना एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है। इसके पीछे कई कारक काम करते हैं:

  • मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का धीमा पड़ना: जब मृत्यु निकट होती है, तो मस्तिष्क के कई हिस्से काम करना बंद कर देते हैं। इससे आंखों की मांसपेशियों पर नियंत्रण खो जाता है।
  • रक्तचाप में गिरावट: हृदय के रुकने से शरीर में रक्त संचार कम हो जाता है, जिससे आंखों की पुतलियां ऊपर की ओर मुड़ सकती हैं।
  • पलकों का नियंत्रण खोना: चेहरे की मांसपेशियों का तनाव कम होने से आंखें अपने आप खुली रह जाती हैं और पुतलियां ऊपर की ओर चली जाती हैं।

आध्यात्मिक व्याख्या: शास्त्रों के अनुसार

हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथों में मृत्यु को एक दिव्य संक्रमण माना गया है। श्रीमद्भागवत गीता (8.6) में कहा गया है:

“अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम्।
यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः॥”

अर्थात, अंतिम समय में जो व्यक्ति मेरा (ईश्वर का) स्मरण करते हुए शरीर छोड़ता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है।

आंखों के उलटने की आध्यात्मिक व्याख्या:

  • आत्मा का ऊर्ध्वगमन: मान्यता है कि आत्मा शरीर छोड़कर ऊपर की ओर जाती है, इसलिए आंखें भी उसी दिशा में मुड़ जाती हैं।
  • ब्रह्मरंध्र से निकासी: कुछ संतों का मानना है कि आत्मा सिर के ऊपर स्थित ब्रह्मरंध्र से निकलती है, इसलिए आंखें उस ओर आकर्षित होती हैं।
  • दिव्य दृष्टि: कुछ लोग मानते हैं कि मरते समय व्यक्ति को भविष्य या परलोक के दर्शन होते हैं, जिसके कारण आंखें ऊपर उठ जाती हैं।

मृत्यु के समय क्या करें?

हमारे शास्त्रों में मृत्यु के समय किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण कार्य बताए गए हैं:

  • भगवान का नाम जप: मरने वाले व्यक्ति के कानों में भगवान के नाम का उच्चारण करना चाहिए।
  • तुलसी दल और गंगाजल: मुख में तुलसी का पत्ता और गंगाजल डालने की परंपरा है।
  • शांत वातावरण: आसपास शोरगुल नहीं होना चाहिए, ताकि व्यक्ति का मन शांत रहे।

विभिन्न संस्कृतियों में मान्यताएं

दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों में मृत्यु के समय आंखों के उलटने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं:

  • ईसाई धर्म: मान्यता है कि व्यक्ति स्वर्ग की ओर देख रहा होता है।
  • इस्लाम: कुछ परंपराओं में इसे अल्लाह के प्रकाश को देखने से जोड़ा जाता है।
  • बौद्ध धर्म: इसे चेतना के अंतिम क्षणों में मन की अवस्था से जोड़कर देखा जाता है।

निष्कर्ष: जीवन और मृत्यु का चक्र

मृत्यु के समय आंखों का उलटना चाहे शारीरिक प्रक्रिया हो या आध्यात्मिक संकेत, यह हमें जीवन की नश्वरता का स्मरण कराता है। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं:

“जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि॥”

(जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है और जो मरा है उसका जन्म निश्चित है। इसलिए इस अपरिहार्य विषय में तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।)

मृत्यु को समझने का प्रयास हमें जीवन की सच्चाई से रूबरू कराता है। आंखों का उलटना केवल एक शारीरिक घटना नहीं, बल्कि उस महान यात्रा का संकेत है जिसे हम सभी को एक न एक दिन करना ही है।

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