दशहरा और शमी पूजन का महत्व
दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दशहरा पर शमी के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है? आइए, इस पवित्र परंपरा के पीछे छिपे धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक रहस्यों को समझते हैं।
शमी का पेड़: एक दिव्य वृक्ष
शमी का पेड़ (Prosopis cineraria) भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसके कई नाम हैं जैसे – खेजड़ी, जांटी, या शमी वृक्ष। यह वृक्ष रेतीले और शुष्क इलाकों में भी हरा-भरा रहता है, जो इसकी मजबूती का प्रतीक है।
शमी पूजा का धार्मिक महत्व
- महाभारत काल से जुड़ी कथा: शमी पूजन की परंपरा महाभारत काल से जुड़ी है। पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने शस्त्र इसी पेड़ में छुपाए थे और बाद में विजयादशमी के दिन उन्हें वापस लेकर युद्ध के लिए प्रस्थान किया था।
- शमी को ‘शमीक’ भी कहा जाता है: संस्कृत में शमी का अर्थ होता है ‘शमन करने वाला’ यानी पापों और बुराइयों को नष्ट करने वाला।
- भगवान शिव का प्रिय वृक्ष: कहा जाता है कि शमी के पेड़ में भगवान शिव और देवी पार्वती का वास होता है।
शमी पूजा की पौराणिक कथा
एक प्राचीन कथा के अनुसार, राजा रघु ने अपने गुरु को गुरुदक्षिणा के रूप में सोना देना चाहा, लेकिन उनके पास पर्याप्त धन नहीं था। तब उन्होंने शमी के पेड़ की पूजा की और उसके नीचे से सोने के सिक्के प्राप्त किए। इसके बाद से शमी को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाने लगा।
दशहरा पर शमी पूजा की विधि
दशहरा के दिन शमी के पेड़ की पूजा करने का विधान इस प्रकार है:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शमी के पेड़ के नीचे एक कलश स्थापित करें और उसमें जल भरकर नारियल रखें।
- पेड़ के चारों ओर लाल या पीले रंग का धागा लपेटें।
- पेड़ की जड़ों में जल चढ़ाएं और सिंदूर, हल्दी, चावल, फूल आदि अर्पित करें।
- इस मंत्र का उच्चारण करें:
“शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी।
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥” - अंत में पेड़ की परिक्रमा करें और आशीर्वाद लें।
शमी पूजा का वैज्ञानिक महत्व
वैज्ञानिक दृष्टि से शमी का पेड़ पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह वृक्ष:
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है।
- वायु प्रदूषण को कम करने में सहायक है।
- इसकी पत्तियों और छाल का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है।
दशहरा 2025 में शमी पूजा का शुभ मुहूर्त
दशहरा 2025 में 2 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। शमी पूजा का शुभ समय दोपहर 1:15 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
शमी पूजा से मिलता है आशीर्वाद
शमी का पेड़ न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से पवित्र है, बल्कि यह प्रकृति का अनमोल उपहार भी है। दशहरा पर शमी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और बुरी शक्तियों का नाश होता है। इस बार दशहरा 2025 पर शमी पूजा का विधिवत पालन करें और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें।
शुभ विजयादशमी!

