रमजान का पवित्र महीना: एक परिचय
आज से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है। यह इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र महीनों में से एक है। रमजान के दौरान मुसलमान पूरे महीने रोज़ा (उपवास) रखते हैं, जिसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक न तो कुछ खाया-पिया जाता है और न ही किसी प्रकार की बुराई की ओर मन उचटने दिया जाता है। यह महीना इबादत, तपस्या और आत्मशुद्धि का समय होता है।
रमजान का इतिहास: कैसे हुई शुरुआत?
रमजान का महीना इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत हिजरी संवत 2 में हुई थी, जब पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मक्का से मदीना हिजरत (प्रवास) करने के बाद रोज़े का आदेश दिया गया। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने में पवित्र कुरान का अवतरण हुआ था।
कुरान का अवतरण और लैलतुल कद्र
कुरान शरीफ में सूरह अल-बक़ारा (2:185) में कहा गया है:
“रमजान वह महीना है, जिसमें कुरान उतारा गया, जो मनुष्यों के लिए मार्गदर्शन और स्पष्ट प्रमाण है।”
इस महीने की सबसे पवित्र रात लैलतुल कद्र (शब-ए-क़द्र) मानी जाती है, जो रमजान के आखिरी 10 दिनों में किसी विषम रात (21, 23, 25, 27 या 29वीं रात) को आती है। इस रात की इबादत का सवाब (पुण्य) हजार महीनों की इबादत से भी ज्यादा माना जाता है।
रमजान का महत्व: आध्यात्मिक और सामाजिक पहलू
रमजान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का महीना नहीं, बल्कि यह आत्मसंयम, संवेदनशीलता और ईश्वर के प्रति समर्पण का समय है। इस महीने का विशेष महत्व निम्नलिखित कारणों से है:
- रोज़े का फर्ज: इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक रोज़ा रमजान में ही रखा जाता है।
- तक़वा (ईश्वर-भय): रोज़े का मुख्य उद्देश्य इंसान के अंदर तक़वा पैदा करना है।
- ग़रीबों की मदद: ज़कात और फितरा देकर समाज में समानता बढ़ाना।
- कुरान की तिलावत: पूरे महीने कुरान पढ़ने और समझने का विशेष महत्व है।
रोज़े के नियम और तरीका
रोज़े की शुरुआत सहरी (सुबह की भोजन) से होती है और इफ्तार (सूर्यास्त के बाद भोजन) के साथ खत्म होती है। रोज़े के दौरान निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- नियत (इरादा): रोज़े की नियत दिल से करें।
- खाने-पीने से परहेज: सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ न खाएं-पिएं।
- गुनाहों से बचें: झूठ, ग़िबत (चुगली), क्रोध आदि से दूर रहें।
- नमाज़ और दुआ: पांचों वक्त की नमाज़ के साथ तरावीह भी पढ़ें।
रमजान के विशेष दिन और अमल
1. अशरा-ए-मुबाश्शरा (पहले 10 दिन)
रमजान के पहले 10 दिन रहमत (दया) के होते हैं। इन दिनों में अल्लाह की रहमत की बारिश होती है।
2. मध्य के 10 दिन (मगफिरत)
बीच के 10 दिन मगफिरत (क्षमा) के होते हैं। इन दिनों में गुनाहों से तौबा करने का विशेष महत्व है।
3. आखिरी 10 दिन (नजात)
आखिरी 10 दिन नजात (मुक्ति) के होते हैं। इन दिनों में एतेकाफ (मस्जिद में इबादत के लिए बैठना) का भी विशेष महत्व है।
रमजान 2025: महत्वपूर्ण तिथियाँ
- पहला रोज़ा: 1 मार्च 2025 (शनिवार)
- शब-ए-क़द्र: 26-27 रमजान (अनुमानित)
- ईद-उल-फितर: 30 मार्च 2025 (रमजान का आखिरी दिन)
समाज में रमजान की भूमिका
रमजान का महीना सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है। इफ्तार पार्टियाँ और सामूहिक तरावीह इस महीने की खास पहचान हैं। इस दौरान मुसलमान ग़रीबों को दान देकर और उनके साथ इफ्तार करके समाज में समरसता फैलाते हैं।
रमजान की सीख
रमजान हमें सिखाता है कि धैर्य, संयम और ईमानदारी से जीवन जीने में ही सच्ची खुशी है। यह महीना न सिर्फ मुसलमानों के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक संदेश लेकर आता है कि भूखे को खिलाओ, ग़रीब की मदद करो और अपने अंदर की बुराइयों को दूर करो।
आइए, इस पाक महीने में हम सभी अल्लाह की रहमत, मगफिरत और नजात के हक़दार बनें। रमजान मुबारक!

