चंद्र दर्शन का रहस्य
गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान गणेश की पूजा-आराधना करने के साथ ही इस दिन एक विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है – चांद न देखने की। शास्त्रों के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन करना अशुभ माना जाता है। यहां तक कि भगवान कृष्ण को भी इसका दंड झेलना पड़ा था। आइए, जानते हैं इस परंपरा के पीछे की पौराणिक कथा और महत्व।
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा दर्शन क्यों वर्जित है?
हिंदू धर्म में चंद्रमा को देवता माना गया है, लेकिन गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे एक दिलचस्प पौराणिक कथा है, जो भगवान गणेश और चंद्रमा के बीच हुए विवाद से जुड़ी है।
पौराणिक कथा: गणेश जी और चंद्रमा का विवाद
- कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश अपने वाहन मूषक (चूहे) पर सवार होकर यात्रा कर रहे थे।
- चंद्रमा ने उनका मजाक उड़ाया क्योंकि एक विशालकाय गणेश जी छोटे से चूहे पर बैठे हुए थे।
- गणेश जी ने श्राप दिया कि जो भी गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखेगा, उसे मिथ्या कलंक का सामना करना पड़ेगा।
- चंद्रमा ने क्षमा मांगी, लेकिन गणेश जी ने श्राप को पूरी तरह वापस नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई अनजाने में चंद्रमा देख भी ले, तो गणेश चालीसा या मंत्र जाप करके इसके दोष से बच सकता है।
भगवान कृष्ण पर लगा था मिथ्या चोरी का आरोप
इसी श्राप का दंड भगवान कृष्ण को भी झेलना पड़ा था। श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित कथा के अनुसार:
- सत्यभामा के पारिजात पुष्प चुराने के आरोप में कृष्ण जी पर मिथ्या दोष लगा।
- कारण था गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन – उस दिन कृष्ण ने अनजाने में चांद देख लिया था।
- अंत में नारद जी ने बताया कि यह गणेश जी के श्राप का प्रभाव है और उपाय बताया।
क्या करें अगर अनजाने में चांद दिख जाए?
अगर गणेश चतुर्थी पर आपने अनजाने में चंद्रमा देख लिया है, तो घबराएं नहीं। शास्त्रों में इसके लिए कुछ उपाय बताए गए हैं:
- गणेश मंत्र जाप करें: “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें।
- गणेश चालीसा पढ़ें: इससे श्राप का प्रभाव कम होता है।
- दान करें: गरीबों को मिठाई या सामर्थ्य अनुसार दान दें।
गणेश चतुर्थी पूजा के महत्वपूर्ण नियम
इस पावन पर्व को शुभ बनाने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- मूर्ति स्थापना के समय मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा करें।
- मोदक का भोग लगाएं – यह गणेश जी का प्रिय प्रसाद है।
- चंद्रमा के उदय का समय जानें और उस दौरान सावधान रहें।
आस्था और सावधानी का संगम
गणेश चतुर्थी का पर्व हमें भगवान गणेश की कृपा पाने का अवसर देता है। चंद्रमा के दर्शन से बचने की परंपरा न सिर्फ एक पौराणिक घटना से जुड़ी है, बल्कि यह हमें संयम और सतर्कता का संदेश भी देती है। अगर अनजाने में कोई त्रुटि हो जाए, तो भक्ति और श्रद्धा से उसका समाधान संभव है। आइए, इस पावन पर्व को पूरी आस्था और उत्साह के साथ मनाएं।
गणपति बप्पा मोरया, पुण्याच्या वाढदिनाच्या हार्दिक शुभेच्छा!

