प्रभु के चरणों का अमृत: एक पवित्र वरदान
भगवान के चरणों से निकला जल, जिसे हम चरणामृत कहते हैं, केवल एक पवित्र तरल नहीं है। यह दिव्य ऊर्जा, आध्यात्मिक शक्ति और भक्ति का प्रतीक है। हिंदू धर्म में चरणामृत को अमृत के समान माना जाता है, जो न सिर्फ शरीर को शुद्ध करता है बल्कि आत्मा को भी पवित्र बनाता है।
चरणामृत क्या है?
चरणामृत दो शब्दों से मिलकर बना है – “चरण” (भगवान के पैर) और “अमृत” (अमरता का रस)। यह वह पवित्र जल है जो किसी देवता की मूर्ति या चरण पादुका को धोने के बाद प्राप्त होता है। इसे भक्तों पर छिड़का जाता है या पिलाया जाता है, जिससे उन्हें दिव्य आशीर्वाद प्राप्त हो।
चरणामृत की दिव्य शक्तियाँ
चरणामृत साधारण जल नहीं है। इसमें भगवान की असीम कृपा और आध्यात्मिक ऊर्जा समाई होती है। आइए जानते हैं इसकी कुछ अद्भुत शक्तियाँ:
- पापों का नाश: शास्त्रों के अनुसार, चरणामृत पीने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और मन शुद्ध होता है।
- रोगों से मुक्ति: इसमें रोगनाशक गुण होते हैं, जो शारीरिक और मानसिक बीमारियों को दूर करते हैं।
- मन की शांति: चरणामृत पीने से चित्त में शांति आती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह साधक को भगवान के और करीब ले जाता है, भक्ति भावना को बढ़ाता है।
चरणामृत पीने के लाभ
1. शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा
चरणामृत में तुलसी के पत्ते डाले जाते हैं, जो एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और संक्रमण से बचाता है।
2. मानसिक शुद्धि
इसे पीने से मन में सात्विक विचारों का उदय होता है। क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकार दूर होते हैं।
3. आत्मिक शांति
चरणामृत पीने वाले को भगवान की कृपा का अनुभव होता है, जिससे जीवन में आत्मिक संतुष्टि मिलती है।
चरणामृत कैसे बनाया जाता है?
चरणामृत बनाने की विधि बेहद पवित्र और सरल है:
- सबसे पहले साफ तांबे या चांदी के पात्र में जल लें।
- इसमें तुलसी के पत्ते, दूध की कुछ बूंदें और थोड़ा सा गंगाजल मिलाएँ।
- इस जल से भगवान की मूर्ति के चरण धोएँ या उनके चरणों में अर्पित करें।
- धोने के बाद जो जल एकत्र हो, वही पवित्र चरणामृत है।
चरणामृत पीने की सही विधि
चरणामृत पीते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- इसे हमेशा दाएँ हाथ से लें और “ॐ नमो नारायणाय” या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र बोलते हुए पिएँ।
- चरणामृत को कभी भी पैरों से छूने न दें।
- इसे पीने से पहले सिर पर छिड़क लें, इससे दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शास्त्रों में चरणामृत का महत्व
पद्म पुराण में कहा गया है:
“चरणामृतं यः पिबति श्रद्धया परया युतः।
स पापेभ्यो विमुच्येत स याति परमां गतिम्॥”
अर्थात, जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक चरणामृत पीता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है।
चरणामृत केवल एक जल नहीं, बल्कि भगवान की असीम कृपा का प्रतीक है। इसे पीने से हमारा शरीर, मन और आत्मा तीनों शुद्ध होते हैं। इसलिए, जब भी अवसर मिले, चरणामृत को पूरी श्रद्धा के साथ ग्रहण करें और भगवान का आशीर्वाद पाएँ।

