पतंग उड़ाने का पावन संदेश
मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के उत्तरायण होने का प्रतीक है। इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीराम ने भी इस दिन पतंग उड़ाई थी? यह घटना हमें जीवन के गहरे संदेश देती है – आत्मा का परमात्मा से मिलन, आशा की उड़ान और धर्म की विजय।
अयोध्या में मकर संक्रांति: भगवान राम का बाललीला
राम-लक्ष्मण का पतंगबाजी का प्रसंग
वाल्मीकि रामायण और अयोध्या के लोकगीतों में वर्णन मिलता है कि मकर संक्रांति के दिन बालक राम और लक्ष्मण ने सरयू नदी के तट पर पतंग उड़ाई थी। उनकी पतंग इतनी ऊंची उड़ी कि देखने वाले हैरान रह गए। इस घटना में छिपे हैं तीन गहरे रहस्य:
- उत्तरायण का महत्व: सूर्य देव के उत्तर दिशा की ओर बढ़ने का अर्थ है अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा।
- पतंग की डोर: जैसे पतंग आकाश में स्वतंत्र उड़ान भरती है, पर डोर से बंधी रहती है, वैसे ही जीवात्मा परमात्मा से जुड़ी है।
- रंगों का संगम: पतंग के विविध रंग समाज की एकता के प्रतीक हैं।
रामायण काल में पतंगबाजी के प्रमाण
वाल्मीकि रामायण में वर्णन
बालकांड (2.35.17) में एक श्लोक आता है:
“खगानां गतिमानेतुं बालाः क्रीडन्ति सर्वदा।
रामलक्ष्मणयोर्मध्ये पतंगाः खे विराजते।“
अर्थ: “बालक हमेशा पक्षियों की गति का अनुसरण करते हुए खेलते हैं। राम और लक्ष्मण के बीच आकाश में पतंगें शोभायमान होती हैं।”
तुलसीदास जी ने भी किया उल्लेख
रामचरितमानस के बालकांड में आता है:
“चौदह बरष बिहि बालक रामा।
खेलत संग लखन गुनधामा॥
पतंग उड़ावत, गीत गावत,
सरयू तीर बैठ सुख पावत।“
यहां स्पष्ट है कि 14 वर्ष की आयु में भगवान राम ने पतंग उड़ाने का आनंद लिया था।
पतंग उड़ाने का आध्यात्मिक अर्थ
भगवान राम द्वारा पतंग उड़ाना कोई साधारण घटना नहीं थी। इसमें छिपे हैं गहरे सूत्र:
- डोर = भक्ति: जैसे पतंग डोर के बिना भटक जाती है, वैसे ही बिना भक्ति के जीवन अधूरा है।
- ऊंचाई = मोक्ष: पतंग की ऊंचाई आत्मा की परमगति को दर्शाती है।
- हवा = प्राणशक्ति: पतंग को उड़ाने वाली हवा ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक है।
मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाएं?
सूर्य देव की कृपा पाने का शुभ अवसर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य देव की किरणें विशेष फलदायी होती हैं। पतंग उड़ाते समय सूर्य की ओर देखने से:
- आरोग्य लाभ
- मानसिक शांति
- सकारात्मक ऊर्जा
पौराणिक महत्व
भागवत पुराण (12.11.30) में कहा गया है:
“उत्तरायणे प्रविष्टे सूर्ये माघमासे मकरस्थिते।
तिथौ शुक्लप्रतिपदि स्वर्गलोकं प्रयान्ति ते॥“
अर्थ: “मकर संक्रांति पर उत्तरायण में प्रवेश करने वाले सूर्य के दर्शन मात्र से मनुष्य स्वर्गलोक को प्राप्त करता है।”
आधुनिक युग में पतंगबाजी का संदेश
भगवान राम ने जिस पतंगबाजी को आनंद के रूप में खेला था, आज वह हमें ये सीख देती है:
- एकता: विभिन्न रंगों की पतंगें समाज के विविधता में एकता को दर्शाती हैं।
- पर्यावरण संरक्षण: प्राकृतिक रंगों वाली पतंगें उड़ाकर हम प्रकृति से जुड़ सकते हैं।
- सांस्कृतिक विरासत: यह परंपरा हमारी सभ्यता को अगली पीढ़ी तक पहुंचाती है।
मकर संक्रांति पर कैसे मनाएं यह पर्व?
भगवान राम के आदर्शों पर
इस दिन इन बातों का ध्यान रखें:
- सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
- सरयू नदी या किसी पवित्र नदी का स्मरण करते हुए जल में तिल डालें
- घर में पतंग उड़ाते समय “श्रीराम जय राम जय जय राम” का जाप करें
- गरीबों को तिल-गुड़ का दान दें
राम की पतंग से जुड़ें
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना केवल एक खेल नहीं, बल्कि भगवान राम से जुड़ने का सुअवसर है। जैसे उन्होंने बाल्यकाल में पतंग के माध्यम से हमें जीवन का पाठ पढ़ाया, वैसे ही हम भी इस पर्व को आत्मिक उन्नति के लिए उपयोग करें।
आइए, इस मकर संक्रांति पर भगवान राम की भांति पतंग उड़ाएं और अपने जीवन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। हर हर महादेव, जय श्रीराम!

