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गणेश पूजा और उत्सव की खास बातें जानिए

Published September 28, 2025
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5 Min Read

गणेश जी की महिमा

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति कहा जाता है। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य गणेश जी की पूजा के बिना पूरा नहीं होता। उनकी कृपा से सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक उनके उत्सव का विशेष महत्व है। आइए, इस लेख में गणेश पूजा और उत्सव से जुड़ी कुछ खास बातें जानते हैं।

Contents
गणेश जी की महिमागणेश पूजा का महत्वक्यों करते हैं गणेश पूजा?गणेश चतुर्थी: उत्सव की शुरुआतगणेश चतुर्थी की विशेषताएंगणेश पूजा विधिसामग्रीपूजा विधिगणेश उत्सव: 10 दिनों का महापर्वउत्सव के प्रमुख आयोजनविसर्जन: भगवान की विदाईविसर्जन का महत्वगणेश जी के प्रिय भोगप्रमुख भोगगणेश मंत्र और उनका महत्वप्रमुख गणेश मंत्रगणेश जी की कृपा सदैव बनी रहे

गणेश पूजा का महत्व

गणेश जी की पूजा का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक भी है। उनकी आराधना से मन को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

क्यों करते हैं गणेश पूजा?

  • विघ्नों का नाश: गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए उनकी पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
  • ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति: वे विद्या और बुद्धि के देवता हैं, इसलिए छात्र उनसे ज्ञान की कामना करते हैं।
  • धन और समृद्धि: गणेश जी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है।

गणेश चतुर्थी: उत्सव की शुरुआत

गणेश चतुर्थी का त्योहार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन गणेश जी की मूर्ति स्थापित की जाती है और 10 दिनों तक उनकी पूजा-आराधना की जाती है।

गणेश चतुर्थी की विशेषताएं

  • मूर्ति स्थापना: घर या पंडाल में गणेश जी की मूर्ति स्थापित की जाती है।
  • मंत्रोच्चार: “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जाता है।
  • प्रसाद: मोदक, लड्डू और फल चढ़ाए जाते हैं।

गणेश पूजा विधि

गणेश जी की पूजा करने का एक विशेष तरीका होता है। यदि आप भी उनकी पूजा करना चाहते हैं, तो इस विधि का पालन करें।

सामग्री

  • गणेश जी की मूर्ति या चित्र
  • रोली, चंदन, अक्षत, फूल
  • दीपक, धूप, अगरबत्ती
  • मोदक, लड्डू, नारियल

पूजा विधि

  1. सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  3. गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  4. उन्हें रोली, चंदन, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
  5. दीपक जलाकर धूप-अगरबत्ती दें।
  6. मोदक, लड्डू और नारियल का भोग लगाएं।
  7. गणपति अथर्वशीर्ष या “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
  8. अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

गणेश उत्सव: 10 दिनों का महापर्व

गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक 10 दिनों तक गणेश उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान भक्त गणेश जी की विशेष पूजा करते हैं और उनके गुणगान करते हैं।

उत्सव के प्रमुख आयोजन

  • भजन-कीर्तन: गणेश जी के भजन और आरतियां गाई जाती हैं।
  • प्रसाद वितरण: मोदक और लड्डू भक्तों में बांटे जाते हैं।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: नृत्य, नाटक और संगीत का आयोजन होता है।

विसर्जन: भगवान की विदाई

अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। यह एक भावुक पल होता है, जब भक्त उन्हें विदा करते हुए “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” का उद्घोष करते हैं।

विसर्जन का महत्व

  • प्रकृति से जुड़ाव: मिट्टी की मूर्ति जल में विलीन होकर प्रकृति का हिस्सा बन जाती है।
  • अगले वर्ष की आशा: भक्त अगले साल फिर से गणेश जी के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं।

गणेश जी के प्रिय भोग

गणेश जी को मोदक बहुत प्रिय हैं, इसलिए उन्हें मोदकप्रिय भी कहा जाता है। उन्हें अलग-अलग तरह के भोग चढ़ाए जाते हैं।

प्रमुख भोग

  • मोदक: गुड़ और नारियल से बनी मिठाई
  • लड्डू: बेसन या मावे के लड्डू
  • दूर्वा घास: 21 या 108 दूर्वा अंकुर चढ़ाए जाते हैं

गणेश मंत्र और उनका महत्व

गणेश जी के मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है। यहां कुछ प्रमुख मंत्र दिए गए हैं।

प्रमुख गणेश मंत्र

  • “ॐ गं गणपतये नमः” – सभी कार्यों में सफलता के लिए
  • “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥” – विघ्नों को दूर करने के लिए

गणेश जी की कृपा सदैव बनी रहे

गणेश पूजा और उत्सव हमें यह संदेश देते हैं कि ईश्वर की कृपा से ही जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। गणेश जी की आराधना करके हम न केवल अपने मन को शुद्ध करते हैं, बल्कि समाज में प्रेम और एकता का संदेश भी फैलाते हैं। आइए, इस वर्ष गणेश उत्सव को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाएं और गणपति बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त करें।

गणपति बप्पा मोरया!

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