ईश्वर की अनुभूति हर कण में
सनातन धर्म की सबसे गहरी शिक्षाओं में से एक यह है कि परमात्मा सिर्फ मंदिरों या मूर्तियों में ही नहीं, बल्कि हर वस्तु, प्राणी और कण में विराजमान हैं। यह दर्शन हमें वेदों, उपनिषदों और गीता में स्पष्ट रूप से मिलता है। जब हम इस सत्य को समझ लेते हैं, तो हमारा जीवन ही बदल जाता है। हर पल, हर साँस में ईश्वर के दर्शन का यही तो सच्चा योग है।
वेदों और उपनिषदों में ईश्वर का सर्वव्यापी स्वरूप
ऋग्वेद का दिव्य संदेश
ऋग्वेद में कहा गया है:
“ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किंच जगत्यां जगत्।”
(ईशावास्योपनिषद् 1)
अर्थात, “यह सम्पूर्ण जगत ईश्वर से आवृत है।” चाहे वह पेड़ हो, पत्थर हो, नदी हो या फिर कोई व्यक्ति – सबमें वही एक परमात्मा हैं।
गीता का ज्ञान
भगवान श्रीकृष्ण गीता में अर्जुन को समझाते हैं:
“वासुदेवः सर्वमिति”
(श्रीमद्भगवद्गीता 7.19)
यानी, “वासुदेव (ईश्वर) ही सब कुछ हैं।” जो व्यक्ति इस सच को जान लेता है, वह हर जगह भगवान के दर्शन करने लगता है।
दैनिक जीवन में ईश्वर के दर्शन कैसे करें?
1. प्रकृति में ईश्वर का स्वरूप
- सूर्य: सूर्योदय देखें – यह भगवान के प्रकाश का प्रतीक है।
- नदी: गंगा, यमुना जैसी नदियों में माँ की ममता देखें।
- वृक्ष: पेड़ों को देखें – ये बिना स्वार्थ के फल-छाया देते हैं, ठीक भगवान की तरह।
2. मनुष्य में दिव्यता का भाव
जब हम किसी से मिलते हैं, तो यह सोचें कि “यह शरीर नहीं, भगवान का ही एक रूप है।” चाहे वह बच्चा हो, बूढ़ा हो, गरीब हो या अमीर – सबमें एक ही आत्मा का वास है।
3. घर की छोटी-छोटी वस्तुओं में
- दीपक: ज्योति परमात्मा का प्रतीक है।
- भोजन: अन्न में अन्नपूर्णा का स्वरूप देखें।
- कपड़ा: वस्त्रों में माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद समझें।
संतों ने क्या कहा?
मीराबाई का प्रेम
मीरा ने गाया:
“मेरे तो गिरिधर गोपाल, दूसरो न कोय।”
उन्होंने हर जगह श्रीकृष्ण को ही देखा – चाहे वह मंदिर हो या फिर राजमहल।
कबीरदास जी का दोहा
“मोको कहाँ ढूँढ़े बंदे, मैं तो तेरे पास में।”
ईश्वर कहीं दूर नहीं, बल्कि हमारे ही अंदर और आस-पास हैं।
आधुनिक जीवन में इस शिक्षा का महत्व
आज के समय में जब हम भौतिकवाद में खो गए हैं, यह शिक्षा और भी ज़रूरी हो जाती है:
- सम्मान: अगर हम हर चीज़ में भगवान देखेंगे, तो प्रकृति और लोगों का सम्मान अपने-आप बढ़ेगा।
- शांति: ईश्वर को हर जगह पाकर मन को शांति मिलती है।
- एकता: जाति, धर्म का भेद मिट जाता है क्योंकि सबमें एक ही तत्व दिखाई देता है।
जीवन को पवित्र बनाएँ
सनातन धर्म हमें यही सिखाता है कि ईश्वर दूर किसी स्वर्ग में नहीं, बल्कि यहीं हैं। फूल में उनकी सुगंध है, हवा में उनकी श्वास है, और प्रेम में उनकी गर्माहट। जब हम यह दृष्टि विकसित कर लेते हैं, तो हमारा हर कर्म पूजा बन जाता है।
आइए, इस पावन ज्ञान को अपने जीवन में उतारें और हर पल, हर वस्तु में परमात्मा के दर्शन करें।
“यत्र यत्र राघव कीर्तनं, तत्र तत्र कृतमस्तकांजलिम्।”
(जहाँ-जहाँ भगवान का नाम होता है, वहाँ-वहाँ हम सिर झुकाते हैं।)

