गणेश जी का अद्भुत स्वरूप
भगवान गणेश जी का स्वरूप अत्यंत ही विचित्र और रहस्यमय है। उनका हाथी जैसा सिर, विशाल पेट, छोटी-छोटी आँखें और एक टूटा हुआ दांत उन्हें अन्य देवताओं से अलग बनाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणेश जी अपने हाथों में दांत क्यों रखते हैं? यह प्रश्न अक्सर भक्तों के मन में उठता है। आज हम इसी रहस्य को समझेंगे और गणेश जी के इस प्रतीकात्मक स्वरूप के पीछे छिपे गहरे अर्थ को जानेंगे।
गणेश जी का टूटा दांत: पौराणिक कथा
महाभारत लेखन की कहानी
गणेश जी के हाथ में दांत रखने के पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि जब महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखने का निर्णय लिया, तो उन्हें एक ऐसे लेखक की आवश्यकता थी जो उनकी गति से लिख सके। उन्होंने गणेश जी से आग्रह किया कि वे महाभारत का लेखन करें।
गणेश जी ने शर्त रखी कि वे तभी लिखेंगे जब वेदव्यास बिना रुके लगातार बोलेंगे। वेदव्यास ने भी शर्त रखी कि गणेश जी हर श्लोक का अर्थ समझे बिना नहीं लिखेंगे। इस प्रकार, जब वेदव्यास कठिन श्लोक बोलते, तो गणेश जी उसका अर्थ समझने में समय लगाते और इसी बीच वेदव्यास नए श्लोक की रचना कर लेते।
कथा के अनुसार, जब गणेश जी का लेखनी (कलम) टूट गई, तो उन्होंने अपना एक दांत तोड़कर उसे लेखनी के रूप में प्रयोग किया। इस प्रकार, गणेश जी ने अपने दांत से महाभारत लिखी और यही कारण है कि उन्हें “एकदंत” (एक दांत वाले) भी कहा जाता है।
परशुराम जी से युद्ध
एक अन्य कथा के अनुसार, जब परशुराम जी गणेश जी से मिलने कैलाश पर्वत पहुंचे, तो गणेश जी ने उन्हें रोक दिया क्योंकि भगवान शिव ध्यान में थे। इस पर परशुराम जी क्रोधित हो गए और उन्होंने गणेश जी पर अपना फरसा चला दिया। गणेश जी ने उस फरसे का वार अपने एक दांत से रोक लिया, जिससे उनका दांत टूट गया। इस घटना के बाद से ही गणेश जी को एकदंत कहा जाने लगा।
गणेश जी के हाथ में दांत का प्रतीकात्मक अर्थ
गणेश जी का टूटा दांत सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी देता है।
बुद्धि और विवेक का प्रतीक
- गणेश जी का दांत बुद्धि का प्रतीक है। जिस प्रकार उन्होंने अपने दांत को लेखनी बनाकर महाभारत लिखी, उसी प्रकार हमें भी अपनी बुद्धि का सदुपयोग करना चाहिए।
- दांत का टूटना यह संकेत देता है कि अहंकार को त्यागकर ज्ञान प्राप्त करना चाहिए।
स्वयं का बलिदान
- गणेश जी ने ज्ञान की रक्षा के लिए अपना दांत तोड़ दिया, यह त्याग का संदेश देता है।
- भक्ति में स्वार्थ नहीं होना चाहिए, बल्कि सेवा भाव होना चाहिए।
गणेश जी के दांत से जुड़े रोचक तथ्य
- गणेश जी के दांत को “मोदक प्रिय” भी कहा जाता है, क्योंकि वे मोदक (लड्डू) को अपने दांत से ही तोड़कर खाते हैं।
- कुछ मूर्तियों में गणेश जी के हाथ में दांत दिखाया जाता है, जो उनके ज्ञान और बलिदान का प्रतीक है।
- गणेश जी के दांत को “विघ्नहर्ता” (बाधाओं को दूर करने वाला) माना जाता है।
गणेश जी का संदेश
गणेश जी का टूटा दांत हमें यह सिखाता है कि ज्ञान और बुद्धि के लिए किसी भी त्याग के लिए तैयार रहना चाहिए। उनका यह स्वरूप हमें अहंकार छोड़कर निस्वार्थ भाव से जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥
आशा है कि गणेश जी के हाथ में दांत रखने के पीछे का रहस्य आपको समझ आया होगा। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी, तो इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें।

