जीवन और मृत्यु का रहस्य
मृत्यु एक ऐसा सत्य है जिससे कोई भी नहीं बच सकता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मृत्यु की आहट को छह महीने पहले ही सुना जा सकता है? हमारे शास्त्रों और ऋषि-मुनियों ने इसके कई संकेत बताए हैं। यदि समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए और कुछ विशेष उपाय किए जाएं, तो मृत्यु के भय को कम किया जा सकता है।
मृत्यु से पहले दिखने वाले संकेत
1. शरीर में होने वाले परिवर्तन
- आँखों की रोशनी कमजोर होना: जब व्यक्ति की मृत्यु निकट होती है, तो उसकी आँखों की चमक धीरे-धीरे कम होने लगती है।
- शरीर का रंग पीला पड़ना: त्वचा का रंग फीका पड़ने लगता है और शरीर में सूजन आ सकती है।
- नाड़ी की गति असामान्य होना: हृदय की धड़कन या तो बहुत तेज हो जाती है या फिर धीमी पड़ने लगती है।
2. मनोवैज्ञानिक परिवर्तन
- अचानक भय या बेचैनी: व्यक्ति को बिना किसी कारण के डर लगने लगता है।
- सपनों में पूर्वजों का दिखाई देना: कई बार मृत्यु से पहले व्यक्ति को अपने पूर्वज या दिवंगत परिजन सपनों में दिखाई देते हैं।
- वर्तमान से विमुख होना: व्यक्ति का मन दुनियादारी से हटकर आध्यात्मिक चिंतन में लगने लगता है।
मृत्यु के भय को दूर करने के उपाय
1. हनुमान चालीसा का नियमित पाठ
हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से मृत्यु का भय कम होता है और आत्मबल बढ़ता है।
मंत्र:
“बाल समय रवि भक्षी लियो, तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥”
2. महामृत्युंजय मंत्र का जाप
यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और इसे मृत्यु पर विजय पाने का सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है।
मंत्र:
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
3. तुलसी के पत्तों का सेवन
तुलसी को अमृत समान माना गया है। प्रतिदिन तुलसी के पत्तों का सेवन करने से न केवल रोग दूर होते हैं, बल्कि मृत्यु का भय भी कम होता है।
4. गंगाजल का सेवन
गंगाजल को पवित्र माना जाता है। प्रतिदिन सुबह गंगाजल का सेवन करने से मन शुद्ध होता है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
जीवन के अंतिम समय में क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को लगे कि उसकी मृत्यु निकट है, तो उसे निम्नलिखित कार्य अवश्य करने चाहिए:
- भगवान का नाम जपें: अंतिम समय में “ॐ नमः शिवाय” या “हरे कृष्ण” का जाप करना चाहिए।
- दान-पुण्य करें: गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन दान करने से पुण्य मिलता है।
- परिवार को सांत्वना दें: अपने प्रियजनों को धैर्य बँधाएँ और उन्हें समझाएँ कि मृत्यु जीवन का अटल सत्य है।
मृत्यु नहीं, जीवन का परिवर्तन है
मृत्यु से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि यह तो बस एक दूसरे लोक की यात्रा है। हमारे ऋषियों ने बताया है कि जो व्यक्ति भक्ति और सत्कर्म करता है, उसकी आत्मा को शांति मिलती है। इसलिए, जीवन को पूरी निष्ठा से जिएँ और मृत्यु को एक नए आरंभ के रूप में देखें।
ध्यान रखें: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
आपका जीवन सुखमय और भयमुक्त हो, यही हमारी कामना है। 🙏

