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Chaitra Navratri 2025 नवमी मां सिद्धिदात्री आराधना

नवमी आज मां सिद्धिदात्री की आराधना करें इस विधि और आरती से चैत्र नवरात्रि 2025 में पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व जानें

Published July 2, 2026
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4 Min Read

चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन, जिसे नवमी कहा जाता है, मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष दिन होता है। यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत पावन माना जाता है, क्योंकि मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।

Contents
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप और महत्वमां सिद्धिदात्री का स्वरूपमां सिद्धिदात्री का महत्वनवमी पूजन की विधिसुबह की तैयारीपूजा सामग्रीपूजा विधिमां सिद्धिदात्री के मंत्रमूल मंत्रध्यान मंत्रस्तोत्र पाठमां सिद्धिदात्री की आरतीमां सिद्धिदात्री की कथानवमी के दिन कन्या पूजन

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे आप मां सिद्धिदात्री की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, हम आपको उनकी विधि, आरती, मंत्र और कथा के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप और महत्व

मां सिद्धिदात्री दुर्गा मां का नौवां और अंतिम स्वरूप हैं। इन्हें सभी सिद्धियों की दात्री माना जाता है। इनकी उपासना से भक्तों को अष्ट सिद्धियां और नौ निधियां प्राप्त होती हैं।

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप

  • मां सिद्धिदात्री कमल के आसन पर विराजमान हैं।
  • इनके चार हाथ हैं, जिनमें गदा, चक्र, शंख और कमल सुशोभित हैं।
  • इनका वाहन सिंह है, जो शक्ति और निर्भयता का प्रतीक है।

मां सिद्धिदात्री का महत्व

  • इनकी पूजा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
  • जीवन में सफलता और समृद्धि आती है।

नवमी पूजन की विधि

नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:

सुबह की तैयारी

  • प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • लाल या पीले रंग का आसन बिछाएं।

पूजा सामग्री

  • मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र
  • लाल फूल, फल, नारियल, मिष्ठान
  • धूप, दीप, अगरबत्ती
  • कुमकुम, हल्दी, चावल, रोली

पूजा विधि

  1. सबसे पहले मां सिद्धिदात्री के चरणों में जल अर्पित करें।
  2. उन्हें लाल फूल, फल और मिष्ठान का भोग लगाएं।
  3. धूप-दीप जलाकर मां की आरती उतारें।
  4. मां सिद्धिदात्री के मंत्रों का जाप करें।

मां सिद्धिदात्री के मंत्र

मां सिद्धिदात्री की पूजा में निम्न मंत्रों का जाप करना चाहिए:

मूल मंत्र

“ॐ ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः॥”

ध्यान मंत्र

“वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥”

स्तोत्र पाठ

“सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥”

मां सिद्धिदात्री की आरती

पूजा के अंत में मां सिद्धिदात्री की आरती करें:


जय सिद्धिदात्री माता, मैया जय सिद्धिदात्री माता।
अष्ट सिद्धि दायिनी शुभ दाता, ब्रह्मा विष्णु सदा ध्याता॥

कमल गदा धारिणी माता, शंख चक्र वरदाता।
हिमाचल घर जननी, मैया हिमाचल घर जननी॥

सुर नर मुनि जन सेवत, तिनके दुख हरता।
भक्ति भाव से जो शरण गहत, तिनके काज सरता॥

तुम ही शक्ति तुम ही भक्ति, तुम ही धर्म की रीति।
सब पर कृपा दृष्टि रखो, मैया सब पर कृपा दृष्टि रखो॥

सिद्धिदात्री की आरती, जो कोई नर गावे।
सुख सम्पत्ति उसको मिले, दुःख दरिद्र नसावे॥

मां सिद्धिदात्री की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की उपासना से भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर का रूप धारण किया था। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां सिद्धिदात्री की पूजा करता है, उसे सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

नवमी के दिन कन्या पूजन

नवमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है। इस दिन नौ कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा देनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण करती हैं।

चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। यदि आप भी मां के आशीर्वाद को प्राप्त करना चाहते हैं, तो उपरोक्त विधि के अनुसार पूजा करें और मां की कृपा पाएं।

मां सिद्धिदात्री आप सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएं। जय माता दी!

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