हिंदू धर्म में व्रत और तपस्या का विशेष महत्व है। ये न केवल मनुष्य को पापों से मुक्ति दिलाते हैं, बल्कि प्रेत योनि जैसी भयावह गतियों से भी बचाते हैं। आज हम एक ऐसे व्रत के बारे में जानेंगे, जिसे करने से प्रेत बाधा, पितृ दोष और भयंकर पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत है पितृपक्ष में किया जाने वाला “श्राद्ध और तर्पण”।
क्यों जरूरी है यह व्रत?
गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति अपने पूर्वजों को श्राद्ध और तर्पण नहीं करता, उसकी आत्मा मृत्यु के बाद प्रेत योनि में भटकती है। पितृ दोष के कारण जीवन में अशांति, रोग और दरिद्रता आती है। इसलिए, पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक व्रत करना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार महत्व
- महाभारत में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया कि श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और वंश की रक्षा करते हैं।
- मार्कण्डेय पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति पितृपक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
कैसे करें यह व्रत?
इस व्रत को करने का सही तरीका जानना अत्यंत आवश्यक है। गलत विधि से किया गया श्राद्ध फलदायी नहीं होता।
विधि
- स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके पवित्र वस्त्र धारण करें। फिर काले तिल, जल और कुशा लेकर संकल्प लें: “मैं अपने पितरों की शांति के लिए श्राद्ध कर रहा हूँ।”
- तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, तिल, चावल और फूल अर्पित करें।
- ब्राह्मण भोजन: श्रद्धापूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।
- पिंड दान: काले तिल, गाय का दूध, शहद और घी मिलाकर पिंड बनाएं और पितरों को अर्पित करें।
मंत्र और श्लोक
श्राद्ध के समय इन मंत्रों का उच्चारण करें:
“ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।”
यह मंत्र पितरों को तृप्त करने वाला माना जाता है। इसके अलावा, इस श्लोक का पाठ भी करें:
“देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः॥”
क्या न करें?
श्राद्ध करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- लहसुन-प्याज का प्रयोग न करें।
- क्रोध या अशुद्ध मन से श्राद्ध न करें।
- अनाज न छोड़ें, पूरा भोजन ब्राह्मणों को दें।
फल: पापों से मुक्ति और आशीर्वाद
इस व्रत के नियमित पालन से:
- पितृ दोष समाप्त होता है।
- प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है।
- धन, स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है।
पितृ ऋण से मुक्ति
पितृपक्ष का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक भी है। जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करता है, उसके जीवन में पितरों का आशीर्वाद सदैव बना रहता है।
इसलिए, इस पितृपक्ष में पूर्ण श्रद्धा के साथ श्राद्ध करें और अपने पूर्वजों को मोक्ष का मार्ग दिखाएं।

