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Somvati Amavasya 2025 आज और कल मनाई जाएगी मौनी अमावस्या

Published June 26, 2026
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4 Min Read

मौनी अमावस्या का महत्व

हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है, लेकिन जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। साल 2025 में यह पर्व दो दिनों तक मनाया जाएगा, जिससे भक्तों को भगवान शिव की आराधना का अधिक अवसर मिलेगा। इस दिन मौन व्रत रखकर शिवलिंग का अभिषेक करने से समस्त पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Contents
मौनी अमावस्या का महत्वसोमवती अमावस्या 2025: तिथि और समयसोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व1. पितृ दोष से मुक्ति2. भगवान शिव की विशेष कृपा3. संतान प्राप्ति और सुखी वैवाहिक जीवनसोमवती अमावस्या व्रत विधिसुबह की शुरुआतशिवलिंग अभिषेक की विधिमौन व्रत का पालनसोमवती अमावस्या की कथाविशेष मंत्र और आरतीशिव अभिषेक मंत्रमहामृत्युंजय मंत्रशिव आरतीसोमवती अमावस्या पर विशेष सुझाव

सोमवती अमावस्या 2025: तिथि और समय

2025 में सोमवती अमावस्या 26 और 27 जनवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिषियों के अनुसार, अमावस्या तिथि की अवधि दो दिनों तक रहने के कारण यह विशेष संयोग बन रहा है।

  • 26 जनवरी: अमावस्या प्रारंभ – सुबह 10:15 बजे से
  • 27 जनवरी: अमावस्या समाप्त – रात 08:45 बजे तक

सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व

1. पितृ दोष से मुक्ति

इस दिन पितरों को तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।

2. भगवान शिव की विशेष कृपा

सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। अमावस्या के साथ सोमवार का संयोग होने से इस व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

3. संतान प्राप्ति और सुखी वैवाहिक जीवन

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से संतान सुख प्राप्त होता है और कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं।

सोमवती अमावस्या व्रत विधि

सुबह की शुरुआत

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • साफ वस्त्र धारण करके भगवान शिव का स्मरण करें।
  • व्रत का संकल्प लें: “मैं आज मौन व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करूंगा/करूंगी।”

शिवलिंग अभिषेक की विधि

शिव मंदिर जाकर या घर पर ही निम्नलिखित विधि से अभिषेक करें:

  1. सर्वप्रथम शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएं।
  2. फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
  3. बेलपत्र, आक के फूल और धतूरा अर्पित करें।
  4. भस्म और चंदन का लेप लगाएं।
  5. दीपक जलाकर ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।

मौन व्रत का पालन

इस दिन मौन रहकर अपने मन को शिव चिंतन में लगाएं। यदि संभव हो तो केवल फलाहार करें।

सोमवती अमावस्या की कथा

पुराणों में एक कथा प्रचलित है कि एक गरीब ब्राह्मणी अपने पति के साथ तीर्थयात्रा पर निकली। रास्ते में उसकी मुलाकात एक ऋषि से हुई, जिन्होंने उसे सोमवती अमावस्या का व्रत करने की सलाह दी। ब्राह्मणी ने विधि-विधान से व्रत किया और अंततः उसे धन-संपत्ति तथा सुखी जीवन का आशीर्वाद मिला।

विशेष मंत्र और आरती

शिव अभिषेक मंत्र

ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय
गंगाजलं समर्पयामि नमः

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

शिव आरती

जय शिव ओंकारा, भोले हर महादेवा…
सहस्त्र नामों से तुमको, हम सब नमन करें॥

सोमवती अमावस्या पर विशेष सुझाव

  • इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करें और जल चढ़ाएं।
  • गरीबों को भोजन, वस्त्र या दान देकर पुण्य कमाएं।
  • रुद्राक्ष धारण करने से शिव कृपा प्राप्त होती है।
  • यदि संभव हो तो हरिद्वार, काशी या उज्जैन में स्नान करें।

सोमवती अमावस्या का पर्व भक्ति और संयम का संगम है। इस दिन मौन रहकर भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। 2025 में यह अवसर दो दिनों तक मनाया जाएगा, इसलिए भक्तों को अधिक लाभ प्राप्त होगा। शिव जी की कृपा पाने के लिए इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करें।

हर हर महादेव!

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