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राम ने रावण का वध कैसे किया उस अभिशाप के कारण

Published October 25, 2025
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3 Min Read

रामायण एक पवित्र ग्रंथ है जिसमें भगवान राम के जीवन की अनेक घटनाएँ वर्णित हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण प्रसंग है रावण वध। परंतु क्या आप जानते हैं कि रावण के विनाश का कारण एक अभिशाप था? यह अभिशाप किसने दिया था और क्यों? आइए, इस रहस्य को समझते हैं।

Contents
रावण का अभिशाप: वरदान और अहंकारक्या था वह अभिशाप?राम के हाथों रावण का वध: कैसे पूरा हुआ श्राप?1. हनुमानजी की भूमिका2. विभीषण का सहयोग3. रावण की नाभि में अमृतअभिशाप और धर्म की विजय

रावण का अभिशाप: वरदान और अहंकार

रावण एक महान विद्वान और शिवभक्त था, लेकिन उसका अहंकार उसके पतन का कारण बना। उसने कठोर तपस्या करके ब्रह्माजी से अनेक वरदान प्राप्त किए, जिनके कारण वह अजेय हो गया। परंतु, एक अभिशाप ने उसकी शक्तियों को सीमित कर दिया।

क्या था वह अभिशाप?

  • नंदीश्वर का श्राप: एक बार रावण ने नंदीश्वर (भगवान शिव के वाहन) का अपमान किया। इस पर नंदीजी ने कहा— “तुम्हारा अहंकार तुम्हें नष्ट कर देगा। एक वानर तुम्हारे विनाश का कारण बनेगा।”
  • वेदवती का श्राप: रावण ने सती वेदवती को परेशान किया था, जिसने अगले जन्म में सीता के रूप में जन्म लेकर उसके विनाश का मार्ग प्रशस्त किया।

राम के हाथों रावण का वध: कैसे पूरा हुआ श्राप?

रावण को मारने के लिए भगवान राम ने एक विशेष रणनीति अपनाई। यहाँ वे प्रमुख कारण हैं जिनसे राम सफल हुए:

1. हनुमानजी की भूमिका

नंदीश्वर के श्राप के अनुसार, एक वानर रावण के विनाश का कारण बना। हनुमानजी ने लंका दहन किया, सेना को हतोत्साहित किया और अंततः राम की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2. विभीषण का सहयोग

रावण का छोटा भाई विभीषण धर्म के मार्ग पर चला और उसने राम को रावण की कमजोरियों के बारे में बताया। इससे युद्ध में राम को लाभ मिला।

3. रावण की नाभि में अमृत

रावण की नाभि में अमृत था, जिसके कारण उसका सिर काटने पर भी वह जीवित रहता था। लेकिन राम ने उसकी नाभि पर वार करके उसे मार डाला।

अभिशाप और धर्म की विजय

रामायण हमें सिखाती है कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है। रावण शक्तिशाली था, लेकिन उसके कर्मों और अभिशापों ने उसके पतन को तय कर दिया। भगवान राम ने धर्म की रक्षा के लिए उसका वध किया, जो हमें सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भगवान की कृपा सदैव सत्य के साथ होती है। अतः हमें भी अहंकार त्यागकर धर्म का पालन करना चाहिए।

जय श्री राम! 🙏

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