हिंदू धर्म में मालाएं केवल गले का आभूषण नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति का प्रतीक हैं। ये मालाएं भक्ति, सुरक्षा और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करती हैं। तुलसी, रुद्राक्ष, कमलगट्टे जैसी मालाओं को धारण करने से देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं कौन-सी मालाएं आपके जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति ला सकती हैं।
1. तुलसी माला: विष्णु प्रिय, पापनाशक
क्यों है खास?
- भगवान विष्णु और कृष्ण को तुलसी अत्यंत प्रिय है।
- इसकी माला धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- मन की एकाग्रता बढ़ती है और रोगों से मुक्ति मिलती है।
मंत्र एवं धारण विधि
मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
तुलसी माला को गंगाजल से शुद्ध करके विष्णु या कृष्ण की मूर्ति के समक्ष रखें। प्रतिदिन 108 बार मंत्र जाप करें।
2. रुद्राक्ष माला: शिव की अनुपम कृपा
क्यों है खास?
- रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न हुआ माना जाता है।
- इसे धारण करने से मनोवैज्ञानिक शांति मिलती है।
- 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष अलग-अलग फल प्रदान करते हैं।
मंत्र एवं धारण विधि
मंत्र: “ॐ नमः शिवाय”
रुद्राक्ष को दूध एवं गंगाजल से धोकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसे रवि या सोमवार को धारण करना शुभ होता है।
3. कमलगट्टे की माला: लक्ष्मी का आशीर्वाद
क्यों है खास?
- कमलगट्टे को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
- धन-संपदा में वृद्धि होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंत्र एवं धारण विधि
मंत्र: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”
शुक्रवार के दिन कमलगट्टे की माला को केसर-चंदन से पूजित कर धारण करें।
4. स्फटिक माला: चंद्रमा की शीतलता
क्यों है खास?
- स्फटिक माला मन को शांत करती है और तनाव दूर करती है।
- इसे “देवताओं का आंसू” भी कहा जाता है।
- साधना में एकाग्रता बढ़ाने के लिए उत्तम है।
मंत्र एवं धारण विधि
मंत्र: “ॐ सोम सोमाय नमः”
सोमवार के दिन सफेद वस्त्र पहनकर स्फटिक माला धारण करें। मंत्र जाप के लिए विशेष फलदायी है।
5. मूंगा माला: मंगल का प्रभाव
क्यों है खास?
- मूंगा माला मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम करती है।
- साहस और आत्मविश्वास बढ़ाती है।
- विवाहित जीवन में सुख-शांति लाती है।
मंत्र एवं धारण विधि
मंत्र: “ॐ अं अंगारकाय नमः”
मंगलवार के दिन लाल कपड़े में लपेटकर मूंगा धारण करें। गुरु या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
मालाओं का सही चयन
मालाएं केवल फैशन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का माध्यम हैं। अपनी जन्मकुंडली और आवश्यकता के अनुसार ही माला का चयन करें। शुद्धता और श्रद्धा से धारण की गई माला अवश्य ही देवकृपा का मार्ग प्रशस्त करेगी।
क्या आपने इनमें से कोई माला धारण की है? अपने अनुभव हमारे साथ साझा करें!
नोट: मंत्रों का उच्चारण विधिवत करें। किसी भी माला को धारण करने से पहले किसी योग्य पंडित या आचार्य से परामर्श लें।

