पीपल का वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि देवताओं का निवास स्थान है। हिंदू धर्म में पीपल को अक्षय वट कहा जाता है, जिसका अर्थ है—अनश्वर, अमर। शास्त्रों में पीपल की पूजा को अत्यंत फलदायी बताया गया है। यह वृक्ष भगवान विष्णु, शनिदेव और अन्य देवी-देवताओं का प्रिय है।
पीपल वृक्ष की धार्मिक मान्यताएँ
1. त्रिमूर्ति का वास
मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का निवास होता है।
- जड़ों में – ब्रह्माजी
- तने में – भगवान विष्णु
- शाखाओं में – भगवान शिव
2. शनिदेव की कृपा
शनिदेव पीपल के वृक्ष को अपना प्रिय स्थान मानते हैं। शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाने और जल चढ़ाने से शनि की कुंडली के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।
मंत्र:
“ॐ शं शनैश्चराय नमः”
पीपल की पूजा के लाभ
- पितृ दोष शांति: पीपल के नीचे तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है।
- संतान प्राप्ति: संतान सुख के लिए पीपल की नियमित पूजा करें।
- धन लाभ: पीपल के नीचे हनुमान जी की पूजा करने से आर्थिक समृद्धि बढ़ती है।
- रोग निवारण: पीपल की परिक्रमा करने से स्वास्थ्य लाभ होता है।
पीपल पूजा की सही विधि
1. सामग्री
- जल, दूध, फूल, अक्षत
- दीपक, धूप
- लाल या पीला वस्त्र
2. विधि
- सुबह स्नान करके पीपल के पास जाएँ।
- पेड़ के तने को गंगाजल से शुद्ध करें।
- लाल वस्त्र चढ़ाएँ और धूप-दीप जलाएँ।
- “ॐ वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें।
- पेड़ की 5 या 11 परिक्रमा करें।
वैज्ञानिक दृष्टि से पीपल का महत्व
पीपल का वृक्ष वातावरण को शुद्ध करता है। यह 24 घंटे ऑक्सीजन देता है और हानिकारक गैसों को अवशोषित करता है। आयुर्वेद में भी पीपल के पत्ते, छाल और फल का उपयोग कई रोगों के इलाज में किया जाता है।
पीपल की पूजा न केवल आध्यात्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभकारी है। शनिदेव की कृपा पाने के लिए नियमित रूप से पीपल की पूजा करें और इस पवित्र वृक्ष का सम्मान करें।
श्लोक:
“मूलतो ब्रह्मरूपाय, मध्यतो विष्णुरूपिणे।
अग्रतः शिवरूपाय, वृक्षराजाय ते नमः॥”
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