भगवान श्री कृष्ण का नाम आते ही हमारे मन में प्रेम, भक्ति और विश्वास की अद्भुत छवि उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के समय में कई मुस्लिम भाई-बहन भी श्री कृष्ण की कृपा से मालामाल हो रहे हैं? यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि एक सच्चाई है जो हमें धर्म से ऊपर उठकर ईश्वर के प्रति श्रद्धा का संदेश देती है।
कृष्ण भक्ति में डूबे मुस्लिम और उनकी सफलता की कहानियाँ
1. मोहम्मद रफीक: मथुरा के मशहूर कृष्ण भक्त
- मथुरा के रहने वाले मोहम्मद रफीक एक छोटे से दुकानदार थे, लेकिन आज वह शहर के जाने-माने व्यापारी हैं।
- उनकी सफलता का राज़? हर सुबह श्री कृष्ण के मंदिर में जाकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करना।
- रफीक साहब कहते हैं, “कृष्ण जी ने मेरी मेहनत को आशीर्वाद दिया। मैं उनकी कृपा को कभी नहीं भूल सकता।”
2. फातिमा बेगम: कृष्ण भक्ति से मिली नई पहचान
- वृंदावन की फातिमा बेगम ने श्री कृष्ण के नाम पर एक छोटी सी मिठाई की दुकान शुरू की थी।
- आज उनकी दुकान पर “माखन मिश्री” और “कृष्ण प्रसाद” की इतनी मांग है कि वह दिनभर में हजारों रुपये कमा लेती हैं।
- फातिमा कहती हैं, “मेरे घर में रोज़ शाम को कृष्ण भजन गूँजते हैं। यही मेरी ताकत है।”
श्री कृष्ण की कृपा किसी धर्म को नहीं देखती
भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है:
“ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।”
(जो जिस भाव से मेरी शरण में आता है, मैं उसे वैसे ही स्वीकार करता हूँ।)
यही कारण है कि आज:
- मुस्लिम कलाकार कृष्ण भजन गाकर लाखों फैन्स बना रहे हैं।
- मुस्लिम व्यापारी कृष्ण-लीला से जुड़े सामान बेचकर मुनाफ़ा कमा रहे हैं।
- मुस्लिम युवा वृंदावन में होने वाले कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
कैसे पा सकते हैं श्री कृष्ण की कृपा?
1. निष्काम भाव से करें सेवा
- श्री कृष्ण उन्हें पसंद करते हैं जो बिना स्वार्थ के सेवा करते हैं।
- चाहे मंदिर में फूल चढ़ाना हो या गरीबों को भोजन कराना, निष्काम भाव ही महत्वपूर्ण है।
2. नित्य पढ़ें यह छोटा सा मंत्र
“क्लीं कृष्णाय नमः”
- इस मंत्र का 108 बार जाप करने से धन और सुख की प्राप्ति होती है।
- मुस्लिम भक्त भी इस मंत्र की महिमा को स्वीकार करते हैं।
3. बाँसुरी की धुन सुनें
- श्री कृष्ण की बाँसुरी की मधुर धुन मन को शांत करती है।
- रोज़ सुबह-शाम 5 मिनट बाँसुरी संगीत सुनने से व्यापार और नौकरी में लाभ होता है।
समाज में फैल रहा है प्रेम का संदेश
जब एक मुस्लिम युवक वृंदावन में कृष्ण भजन गाता है या एक मुस्लिम महिला जन्माष्टमी के उत्सव में शामिल होती है, तो यह समाज को एक नया संदेश देता है:
- ईश्वर एक है, बस नाम और पूजा के तरीके अलग-अलग हैं।
- भक्ति की शक्ति किसी भी धर्म या जाति की सीमा नहीं मानती।
- श्री कृष्ण सबके हैं, चाहे आप हिंदू हों या मुस्लिम।
भक्ति ही असली धर्म है
इन कहानियों से हमें यह सीख मिलती है कि ईश्वर की कृपा पाने के लिए धर्म नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्रेम की आवश्यकता होती है। श्री कृष्ण ने स्वयं गीता में कहा है:
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।”
(सभी धर्मों का परित्याग करके केवल मेरी शरण में आ जाओ।)
आइए, हम भी श्री कृष्ण के इस संदेश को अपनाएँ और प्रेम, भक्ति और सद्भाव के मार्ग पर चलें। जय श्री कृष्ण!

