मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह दिन मौन रहकर, व्रत-उपवास और पूजा-पाठ के लिए समर्पित होता है। 2025 में मौनी अमावस्या 28 जनवरी, मंगलवार को पड़ रही है। इस बार यह दिन और भी विशेष होगा क्योंकि इसी दिन शनि देव का राशि परिवर्तन भी होगा। शनि का मकर राशि से कुंभ राशि में गोचर होने से सभी राशियों पर प्रभाव पड़ेगा। आइए, जानते हैं इस पावन दिन का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि।
मौनी अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्त
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 27 जनवरी 2025 को रात 10:14 बजे से
- अमावस्या तिथि समाप्त: 28 जनवरी 2025 को रात 08:54 बजे तक
- स्नान-दान का शुभ समय: 28 जनवरी की सुबह 05:30 बजे से 08:00 बजे तक
- पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 06:00 बजे से 10:00 बजे तक
मौनी अमावस्या का महत्व
मौनी अमावस्या का नाम ‘मौन’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है मौन रहना। इस दिन व्रत रखकर मौन धारण करने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मौन रहकर पूजा-अर्चना करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
धार्मिक महत्व
- इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं।
- पितृदोष से मुक्ति के लिए इस दिन तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।
- भगवान विष्णु और शिवजी की विशेष पूजा की जाती है।
ज्योतिषीय महत्व
2025 की मौनी अमावस्या पर शनि देव का राशि परिवर्तन होगा। शनि 28 जनवरी को मकर राशि छोड़कर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। यह गोचर सभी राशियों को प्रभावित करेगा। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित जातकों के लिए यह समय महत्वपूर्ण होगा।
मौनी अमावस्या 2025 पर शनि का राशि परिवर्तन
शनि देव का कुंभ राशि में प्रवेश एक बड़ा ज्योतिषीय घटनाक्रम है। कुंभ राशि शनि की अपनी राशि मानी जाती है, इसलिए यहां उनकी स्थिति मजबूत होगी। इसका प्रभाव निम्नलिखित तरीके से देखने को मिलेगा:
- मेष, वृषभ, सिंह और वृश्चिक राशि वालों के लिए शुभ फलदायी होगा।
- कर्क, तुला, मकर और कुंभ राशि वालों को थोड़ी सावधानी बरतनी होगी।
- मिथुन, धनु और मीन राशि वालों को मध्यम परिणाम मिलेंगे।
शनि गोचर के समय करें यह उपाय
- शनिवार के दिन काले तिल का दान करें।
- शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें।
- नीले रंग के वस्त्र पहनकर शनि मंदिर में तेल चढ़ाएं।
मौनी अमावस्या की पूजा विधि
मौनी अमावस्या के दिन निम्नलिखित विधि से पूजा करनी चाहिए:
- सुबह स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल मिले जल से स्नान करें।
- मौन व्रत: पूरे दिन मौन रहकर भगवान का स्मरण करें।
- पूजा: काले तिल, फूल और धूप-दीप से शिवजी और विष्णुजी की पूजा करें।
- दान: गरीबों को अनाज, वस्त्र या दक्षिणा दान करें।
- तर्पण: पितरों के नाम से जल, काले तिल और कुशा अर्पित करें।
मौनी अमावस्या का मंत्र
इस दिन निम्न मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
मौनी अमावस्या का पावन दिन आध्यात्मिक उन्नति और पितृ शांति के लिए अद्वितीय अवसर प्रदान करता है। 2025 में यह दिन शनि के राशि परिवर्तन के साथ और भी विशेष हो गया है। इसलिए, इस दिन व्रत-पूजा करके शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं। मौन रहकर, दान-पुण्य करके और शनि देव की कृपा पाकर जीवन के कष्टों को दूर किया जा सकता है।
आप सभी को मौनी अमावस्या 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏

