पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए समर्पित एक पवित्र अवधि है। 2025 में, सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष का अंतिम दिन) विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन सभी पितरों को तर्पण और श्राद्ध कर्म से संतुष्ट किया जा सकता है।
इस लेख में, हम जानेंगे कि सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों की कृपा पाने के लिए क्या करें और क्या न करें, साथ ही इस दिन के विशेष अनुष्ठानों के बारे में भी चर्चा करेंगे।
सर्वपितृ अमावस्या 2025: तिथि और समय
2025 में, सर्वपितृ अमावस्या 12 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन का विशेष मुहूर्त और शुभ समय निम्नलिखित है:
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 11 अक्टूबर 2025, रात 09:34 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 12 अक्टूबर 2025, रात 11:24 बजे
- श्राद्ध का शुभ मुहूर्त: प्रातः 06:30 से 11:00 बजे तक
सर्वपितृ अमावस्या पर क्या करें? (कर्म और अनुष्ठान)
1. पितरों को तर्पण दें
तर्पण एक पवित्र कर्म है जिसमें जल, काले तिल, दूध और फल अर्पित करके पितरों को शांति दी जाती है। इस दिन निम्न मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः। पितृदेवताभ्यो नमः।”
2. ब्राह्मण भोजन करवाएं
पितृ पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके लिए:
- सात्विक भोजन (दाल, चावल, सब्जी, घी) तैयार करें।
- भोजन कराने से पहले पितरों का स्मरण करें।
- भोजन के बाद दक्षिणा (दान) अवश्य दें।
3. दान-पुण्य करें
इस दिन दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। निम्न वस्तुएँ दान कर सकते हैं:
- काले तिल
- गाय का घी
- वस्त्र और अनाज
- गरीबों को भोजन
4. पीपल के पेड़ की पूजा
मान्यता है कि पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है। इस दिन:
- पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं।
- दीपक जलाएं और धूप दें।
- निम्न मंत्र बोलें: “ॐ पितृदेवताभ्यो नमः।”
सर्वपितृ अमावस्या पर क्या न करें? (वर्जित कार्य)
1. मांसाहार और मदिरा का सेवन न करें
इस दिन सात्विक आहार लेना चाहिए। मांस, मछली, अंडे और शराब से परहेज करें।
2. नए कार्यों की शुरुआत न करें
पितृ पक्ष में शुभ कार्य (विवाह, गृहप्रवेश, नया व्यवसाय) करने से बचें।
3. क्रोध और झगड़े से बचें
इस दिन मन को शांत रखें और किसी से विवाद न करें।
4. तामसिक भोजन न खाएं
लहसुन, प्याज और अधिक मसालेदार भोजन से दूर रहें।
पितरों की कृपा पाने के लिए विशेष उपाय
- गीता पाठ: इस दिन भगवद गीता का पाठ करने से पितरों को मोक्ष मिलता है।
- गायत्री मंत्र जप: 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करें।
- दीपदान: शाम को दीपक जलाकर पितरों का आशीर्वाद लें।
पितृ ऋण से मुक्ति का अवसर
सर्वपितृ अमावस्या पितृ ऋण से मुक्ति पाने का सबसे श्रेष्ठ दिन है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए कर्म पितरों को तृप्त करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।
याद रखें: पितरों का आशीर्वाद ही कुल की उन्नति और सुख-समृद्धि का आधार है।
“पितृदेवो भव।” (ऋग्वेद)
इस पावन अवसर पर पितरों को याद करें, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म अवश्य करें।

