हिंदू धर्म में हनुमान जी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। हनुमान जयंती या हनुमान जन्मोत्सव का पर्व भक्तों के लिए विशेष आस्था और उत्साह लेकर आता है। वर्ष 2025 में यह पर्व चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाएगा। इस दिन हनुमान जी के भक्त उनकी विशेष पूजा-आरती करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
हनुमान जन्मोत्सव का महत्व
हनुमान जी को संकटमोचन, भक्ति और बल के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। उनका जन्मोत्सव मनाने का उद्देश्य उनकी भक्ति, शक्ति और निष्ठा को याद करना है। इस दिन विशेष रूप से:
- हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है।
- सुंदरकांड का पाठ करने से विशेष फल मिलता है।
- हनुमान जी को सिंदूर और मिष्ठान्न चढ़ाया जाता है।
- भक्त हनुमान आरती गाकर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।
हनुमान जन्म की पौराणिक कथा
अंजनी और केसरी के पुत्र हनुमान
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म अंजनी और केसरी के घर हुआ था। वे पवन देव के आशीर्वाद से प्राप्त हुए थे, इसलिए उन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है। बचपन से ही उनमें अद्भुत शक्तियाँ थीं, जिनका उपयोग उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए किया।
सूर्य को फल समझने की कथा
एक बार बाल हनुमान ने सूर्य को फल समझकर निगलने का प्रयास किया। इससे देवताओं में हलचल मच गई, और इंद्र ने उन पर वज्र से प्रहार किया। इस घटना के बाद पवन देव ने प्राण त्यागने की ठानी, जिससे समस्त संसार में हाहाकार मच गया। तब ब्रह्मा जी ने हनुमान जी को अमरता का वरदान दिया।
हनुमान जयंती 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2025 में हनुमान जयंती 12 अप्रैल, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन पूर्णिमा तिथि रहेगी, जो हनुमान जी के जन्म का प्रतीक है। शुभ मुहूर्त निम्नानुसार है:
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 11 अप्रैल 2025, रात 09:07 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 12 अप्रैल 2025, रात 11:31 बजे
- पूजा का शुभ समय: प्रातः 06:00 बजे से 10:00 बजे तक
हनुमान जी की पूजा विधि
सुबह की पूजा
हनुमान जयंती के दिन प्रातः काल स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें। फिर निम्न विधि से पूजा करें:
- हनुमान जी की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
- उन पर सिंदूर और लाल फूल चढ़ाएँ।
- गुड़ और चना का भोग लगाएँ।
- हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।
हनुमान आरती
पूजा के अंत में हनुमान आरती का पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है। यह आरती इस प्रकार है:
आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए, लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे, सियारामजी के काज संवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे, आनि संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पताल तोरि जमकारे, अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाईं भुजा असुर संहारे, दाहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि जन आरती उतारे, जय जय जय हनुमान उचारे॥
कंचन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरती गावे, बसि बैकुंठ परम पद पावे॥
हनुमान जयंती पर विशेष उपाय
इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है:
- 11 हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- गरीबों को भोजन दान करें।
- लाल वस्त्र में बंधे गुड़-चना का प्रसाद बाँटें।
- हनुमान मंदिर में घी का दीपक जलाएँ।
हनुमान जी की कृपा पाने का दिन
हनुमान जयंती का पर्व भक्तों के लिए विशेष आशीर्वाद लेकर आता है। इस दिन सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं। हनुमान चालीसा और आरती का पाठ करके आप भी उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
जय श्री राम! जय हनुमान!

