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चैत्र नवरात्रि 2025 मां चंद्रघंटा पूजन विधि वरदान

चैत्र नवरात्रि 2025 में मां चंद्रघंटा की पूजा विधि जानें मनवांछित वरदान पाएं और शत्रुओं पर विजय का आशीर्वाद प्राप्त करें

Published July 2, 2026
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6 Min Read

चैत्र नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शक्ति-उपासना का महत्वपूर्ण समय होता है। यह नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व है, जिसमें तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत दिव्य और तेजस्वी है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।

Contents
मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्वचैत्र नवरात्रि 2025 में मां चंद्रघंटा पूजन की तिथि और शुभ मुहूर्तशुभ पूजा मुहूर्त:मां चंद्रघंटा पूजन विधि (विस्तृत चरण)1. सुबह की तैयारी2. कलश स्थापना और दीप प्रज्वलन3. मां चंद्रघंटा की प्रतिमा/चित्र स्थापना4. षोडशोपचार पूजनमां चंद्रघंटा के मंत्र और स्तोत्र1. मूल मंत्र2. ध्यान मंत्र3. स्तोत्र पाठमां चंद्रघंटा की कथा और प्रेरणापूजा का फल और विशेष उपायविशेष उपाय:मां की कृपा पाने का मार्ग

इनकी पूजा से भक्तों को शत्रुओं पर विजय, मनोवांछित फल की प्राप्ति और आंतरिक शक्ति का आशीर्वाद मिलता है। आइए, जानते हैं चैत्र नवरात्रि 2025 में मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र और विशेष फल के बारे में।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व

मां चंद्रघंटा दुर्गा जी का तीसरा स्वरूप हैं। इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र विद्यमान हैं। इनके माथे पर घंटे के आकार का चंद्रमा सुशोभित है, जिससे इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।

  • शत्रु बाधा निवारण: इनकी पूजा से शत्रुओं का भय दूर होता है और विजय प्राप्त होती है।
  • साहस और शक्ति: भक्तों को आंतरिक बल और निर्भयता का वरदान मिलता है।
  • मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से की गई पूजा से मां प्रसन्न होकर मनवांछित वरदान देती हैं।

चैत्र नवरात्रि 2025 में मां चंद्रघंटा पूजन की तिथि और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2025 में मां चंद्रघंटा की पूजा 31 मार्च 2025, सोमवार को की जाएगी। तृतीया तिथि का प्रारंभ 30 मार्च को रात 10:15 बजे से होगा और समापन 31 मार्च को रात 08:32 बजे तक होगा।

शुभ पूजा मुहूर्त:

  • प्रातःकाल पूजन: 06:00 AM से 08:00 AM
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:45 AM से 12:30 PM

मां चंद्रघंटा पूजन विधि (विस्तृत चरण)

1. सुबह की तैयारी

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • साफ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • लाल या पीले रंग का आसन बिछाएं।

2. कलश स्थापना और दीप प्रज्वलन

  • मिट्टी के कलश में जल भरकर उस पर नारियल और आम के पत्ते रखें।
  • कलश के सामने घी का दीपक जलाएं।

3. मां चंद्रघंटा की प्रतिमा/चित्र स्थापना

  • मां की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
  • उन्हें लाल चुनरी चढ़ाएं और सिंदूर लगाएं।

4. षोडशोपचार पूजन

निम्नलिखित क्रम से पूजा करें:

  1. आवाहन: मां को आमंत्रित करें।
  2. आसन: पीले फूल अर्पित करें।
  3. पाद्य: चरणों को जल अर्पित करें।
  4. अर्घ्य: जल, फूल और अक्षत चढ़ाएं।
  5. आचमन: शुद्ध जल से आचमन कराएं।
  6. स्नान: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं।
  7. वस्त्र: लाल वस्त्र अर्पित करें।
  8. यज्ञोपवीत: मोतियों की माला चढ़ाएं।
  9. गंध: चंदन का लेप लगाएं।
  10. पुष्प: गुलाब और कमल के फूल अर्पित करें।
  11. धूप: गुग्गुल या कपूर की धूप दें।
  12. दीप: घी का दीपक जलाएं।
  13. नैवेद्य: खीर या मालपुआ का भोग लगाएं।
  14. ताम्बूल: पान और सुपारी अर्पित करें।
  15. आरती: “जय चंद्रघंटा माता” की आरती करें।
  16. प्रणाम: मां के चरणों में श्रद्धा से प्रणाम करें।

मां चंद्रघंटा के मंत्र और स्तोत्र

1. मूल मंत्र

  
ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः॥  
(Om Devi Chandraghantayai Namah)  

2. ध्यान मंत्र

  
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।  
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥  

3. स्तोत्र पाठ

मां चंद्रघंटा के इस स्तोत्र का नियमित पाठ करें:

  
या देवी सर्वभूतेषु चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।  
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥  

मां चंद्रघंटा की कथा और प्रेरणा

पौराणिक कथा के अनुसार, मां चंद्रघंटा ने अपने तेज से अनेक राक्षसों का वध किया था। इनकी घंटे की ध्वनि से दुष्ट शक्तियाँ भाग जाती हैं। एक बार जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ, तो मां ने अपने शत्रुसंहारक स्वरूप से देवताओं की रक्षा की।

पूजा का फल और विशेष उपाय

  • शत्रु पर विजय: जो भक्त सच्चे मन से मां की आराधना करते हैं, उन्हें शत्रुओं पर विजय मिलती है।
  • कष्टों से मुक्ति: मां अपने भक्तों के सभी संकट दूर कर देती हैं।
  • सुख-समृद्धि: घर में सुख, शांति और धन की वृद्धि होती है।

विशेष उपाय:

  • मां को सफेद फूल अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है।
  • नवरात्रि के तीसरे दिन दूध से बने व्यंजन का दान करें।
  • मंत्र जप के समय कमल गट्टे की माला का उपयोग करें।

मां की कृपा पाने का मार्ग

चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है। यदि आप सच्चे मन से मां के मंत्रों का जाप करें और विधि-विधान से पूजा करें, तो निश्चित ही आपको उनकी कृपा प्राप्त होगी। मां चंद्रघंटा की आराधना से भक्तों को शक्ति, साहस और विजय का आशीर्वाद मिलता है।

आप सभी को चैत्र नवरात्रि 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं! मां चंद्रघंटा आपके जीवन को सुख, समृद्धि और विजय से भर दें।


जय माता दी! 🙏

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