नृसिंह जयंती हिंदू धर्म में एक पवित्र त्योहार है जो भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। 2025 में नृसिंह जयंती 12 मई, सोमवार को मनाई जाएगी।
इस दिन विशेष स्तुति, मंत्र और पूजा-अर्चना करने से भगवान नृसिंह की कृपा प्राप्त होती है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से उनकी आराधना करता है, उसके सभी भय दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
नृसिंह अवतार की पौराणिक कथा
भगवान नृसिंह का अवतार असुर राज हिरण्यकशिपु के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए हुआ था। हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि:
- न कोई मनुष्य उसे मार सके, न ही कोई पशु
- न दिन में मृत्यु हो, न रात में
- न धरती पर मरें, न आकाश में
- न किसी अस्त्र से, न शस्त्र से
इस वरदान के बाद हिरण्यकशिपु ने स्वयं को अमर समझ लिया और भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को मारने का प्रयास किया। तब भगवान विष्णु ने नृसिंह (आधा मनुष्य, आधा सिंह) का रूप धारण किया और संध्या के समय (न दिन, न रात), अपनी जंघा पर रखकर (न धरती, न आकाश), नाखूनों से (न अस्त्र, न शस्त्र) हिरण्यकशिपु का वध किया।
नृसिंह जयंती 2025 की विशेष पूजा विधि
सुबह की शुरुआत
- प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- भगवान नृसिंह की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
मुख्य पूजा विधान
- भगवान को हल्दी, कुमकुम, चंदन अर्पित करें।
- लाल फूल, तुलसी दल और धूप-दीप जलाएं।
- नैवेद्य के रूप में गुड़, चना और मिष्ठान्न चढ़ाएं।
भगवान नृसिंह की प्रसन्नता के लिए विशेष स्तुति
इस दिन निम्न मंत्रों का जाप करने से भगवान नृसिंह अत्यंत प्रसन्न होते हैं:
नृसिंह मूल मंत्र
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं
ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं
मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
नृसिंह गायत्री मंत्र
ॐ नृसिंहाय विद्महे
वज्रनखाय धीमहि।
तन्नो सिंहः प्रचोदयात्॥
प्रह्लाद कृत नृसिंह स्तोत्र
इस स्तोत्र का पाठ करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं:
नमस्ते नरसिंहाय
प्रह्लादह्लाददायिने।
हिरण्यकशिपोर्वक्षः
शिलाटङ्कनखाय च॥
नृसिंह जयंती का महत्व
- इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- नृसिंह भगवान की पूजा से शत्रु भय, भूत-प्रेत बाधा दूर होती है।
- संतान प्राप्ति और उनकी रक्षा के लिए यह दिन विशेष फलदायी है।
नृसिंह जयंती पर विशेष सुझाव
- इस दिन उग्र नृसिंह मंत्र का जाप 108 बार करें।
- गरीबों को भोजन, वस्त्र दान करें।
- पूजा के बाद नृसिंह कथा का श्रवण या पाठ करें।
नृसिंह जयंती का पर्व हमें यह संदेश देता है कि भक्ति और धर्म की रक्षा के लिए भगवान किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। इस पावन दिन उपरोक्त मंत्रों और स्तुतियों के साथ भगवान नृसिंह की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भक्त को दिव्य आनंद की प्राप्ति होती है।
ध्यान रखें: मंत्रों का उच्चारण सही उच्चारण के साथ करें। संस्कृत श्लोकों के अर्थ को समझकर पढ़ने से अधिक लाभ मिलता है।
