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चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से विक्रम संवत् 2077 आरंभ

25 मार्च से चैत्र नवरात्रि और विक्रम संवत् 2077 शुरू अधिमास के कारण आश्विन माह 58 दिन का होगा जानें महत्व और तिथियाँ

Published July 2, 2026
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3 Min Read

25 मार्च 2024 से हिंदू धर्म के दो महत्वपूर्ण पर्व एक साथ आरंभ हो रहे हैं – चैत्र नवरात्रि और विक्रम संवत् 2077। इस वर्ष खगोलीय गणना के अनुसार अधिक मास (मलमास) होने के कारण आश्विन माह 58 दिनों तक रहेगा, जो एक दुर्लभ घटना है। यह समय आध्यात्मिक साधना, नए प्रारंभ और देवी आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

Contents
चैत्र नवरात्रि 2024: देवी के नौ रूपों की आराधनानवरात्रि का महत्वनौ दिन, नौ देवियाँपूजा विधि एवं मंत्रविक्रम संवत् 2077: नववर्ष का ऐतिहासिक महत्वक्या है विक्रम संवत्?अधिमास का प्रभावनवसंवत्सर पर विशेषनवरात्रि और नववर्ष: आध्यात्मिक संदेशआत्मशुद्धि का समयसमाज के लिए प्रेरणाउपसंहार: नवचेतना का अवसर

चैत्र नवरात्रि 2024: देवी के नौ रूपों की आराधना

नवरात्रि का महत्व

  • चैत्र नवरात्रि हिंदू पंचांग के प्रथम माह चैत्र में मनाई जाती है।
  • इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी।
  • देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध कर धर्म की स्थापना की।

नौ दिन, नौ देवियाँ

दिन देवी का रूप विशेषता
प्रथम शैलपुत्री हिमालय की पुत्री
द्वितीय ब्रह्मचारिणी तपस्या की देवी
तृतीय चंद्रघंटा शांति की प्रतीक
चतुर्थ कुष्मांडा सृष्टि की आदिशक्ति
पंचम स्कंदमाता कार्तिकेय की माता
षष्ठ कात्यायनी ऋषि कात्यायन की पुत्री
सप्तम कालरात्रि अंधकार विनाशिनी
अष्टम महागौरी पवित्रता की देवी
नवम सिद्धिदात्री समस्त सिद्धियों की स्वामिनी

पूजा विधि एवं मंत्र

“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

  • प्रतिदिन लाल वस्त्र में कलश स्थापना करें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • नवरात्रि में उपवास रखकर सात्विक भोजन ग्रहण करें।

विक्रम संवत् 2077: नववर्ष का ऐतिहासिक महत्व

क्या है विक्रम संवत्?

राजा विक्रमादित्य द्वारा 57 ईसा पूर्व में प्रारंभ किया गया यह संवत्सर हिंदू संस्कृति का प्रमुख कैलेंडर है। इस वर्ष 25 मार्च 2024 को विक्रम संवत् 2077 का आरंभ हो रहा है।

अधिमास का प्रभाव

  • सूर्य और चंद्र मास के अंतर के कारण हर 32-36 माह में एक अधिक मास आता है।
  • इस वर्ष आश्विन माह 58 दिनों तक रहेगा (18 सितंबर से 14 नवंबर 2024)।
  • अधिमास में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, परंतु भक्ति-साधना श्रेयस्कर है।

नवसंवत्सर पर विशेष

“नवसंवत्सराय नमः, नवयुगाय नमः।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्षाय, नवचैतन्याय नमः॥”

इस दिन गुड़-नीम खाकर नववर्ष का स्वागत करने की परंपरा है। नीम की कड़वाहट और गुड़ की मिठास जीवन के उतार-चढ़ाव का प्रतीक है।

नवरात्रि और नववर्ष: आध्यात्मिक संदेश

आत्मशुद्धि का समय

नवरात्रि के नौ दिन मनुष्य को अपनी नौ इंद्रियों पर विजय पाने का संदेश देते हैं। विक्रम संवत् का प्रारंभ हमें समय के सदुपयोग की प्रेरणा देता है।

समाज के लिए प्रेरणा

  • नवरात्रि: नारी शक्ति के सम्मान का पर्व
  • विक्रम संवत्: स्वदेशी ज्ञान परंपरा का प्रतीक

उपसंहार: नवचेतना का अवसर

यह पावन समय हमें आंतरिक बुराइयों (महिषासुर) पर विजय पाने और नवीन संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का अवसर देता है। आइए, देवी के आशीर्वाद और नवसंवत्सर की शुभकामनाओं के साथ जीवन में नई ऊर्जा का संचार करें।

“सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥”

शुभ नवरात्रि एवं नवसंवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं!

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