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Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी पर त्रियोग सफलता मिलेगी

अहोई अष्टमी 2025 पर त्रियोग का संयोग होगा जिससे हर काम में मिलेगी सफलता पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानें

Published July 2, 2026
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5 Min Read

हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का विशेष स्थान है। यह व्रत संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए माताओं द्वारा किया जाता है। 2025 में अहोई अष्टमी (28 अक्टूबर) पर त्रियोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इस व्रत की महिमा को और बढ़ा देगा। इस दिन व्रत रखकर अहोई माता की पूजा करने से हर काम में सफलता मिलती है और संतान पर माँ की कृपा बनी रहती है।

Contents
अहोई अष्टमी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्तत्रियोग का संयोग: क्यों है विशेष?अहोई अष्टमी व्रत विधि: पूजन की सही प्रक्रिया1. सुबह की तैयारी2. अहोई माता का चित्र बनाना3. कलश स्थापना और पूजन4. कथा सुनना और आरतीअहोई अष्टमी की पौराणिक कथामंत्र और आरतीअहोई माता मंत्रअहोई माता आरतीव्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं?अहोई अष्टमी के लिए विशेष टिप्सआशीर्वाद और शुभकामनाएँ

अहोई अष्टमी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

  • तिथि: 28 अक्टूबर 2025 (मंगलवार)
  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 27 अक्टूबर को रात 10:15 बजे से
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 28 अक्टूबर को रात 08:35 बजे तक
  • पूजा का शुभ समय: सुबह 06:15 से 08:45 तक (प्रातःकाल)
  • त्रियोग संयोग: रवि-सोम-मंगल योग (अत्यंत शुभ)

त्रियोग का संयोग: क्यों है विशेष?

2025 की अहोई अष्टमी पर रवि (सूर्य), सोम (चंद्र) और मंगल (मंगल ग्रह) का योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह त्रियोग अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना जाता है। इस संयोग में व्रत-पूजन करने से:

  • संतान की रक्षा होती है और उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  • किसी भी कार्य में सफलता मिलती है।

अहोई अष्टमी व्रत विधि: पूजन की सही प्रक्रिया

1. सुबह की तैयारी

व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर की सफाई करके पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।

2. अहोई माता का चित्र बनाना

दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाएं। साथ ही सेई (सियारिन) और उसके बच्चों का भी चित्र बनाएं। कुछ परंपराओं में कागज पर प्रिंटेड चित्र भी लगाया जाता है।

3. कलश स्थापना और पूजन

  • एक कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का और दूर्वा डालें।
  • कलश के ऊपर रोली से स्वास्तिक बनाएं।
  • अहोई माता के चित्र के सामने दीपक जलाएं।

4. कथा सुनना और आरती

पूजा के बाद अहोई अष्टमी की कथा सुनें या पढ़ें। कथा समाप्त होने पर आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

अहोई अष्टमी की पौराणिक कथा

एक समय की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। बेटी विवाह के बाद ससुराल गई। दीपावली से पहले घर की लिपाई-पुताई के लिए मिट्टी लाने वह जंगल गई। वहाँ उसने अनजाने में सेई (सियारिन) के बच्चों को मार दिया। इस पाप के कारण उसके सभी भाइयों की मृत्यु हो गई। पश्चाताप करने पर एक साध्वी ने उसे अहोई माता का व्रत करने को कहा। व्रत करने से उसके भाई जीवित हो गए। तभी से यह व्रत संतान की लंबी आयु के लिए किया जाता है।

मंत्र और आरती

अहोई माता मंत्र

  
ॐ श्री अहोई मातायै नमः  

अहोई माता आरती

  
जय अहोई माता, मैया जय अहोई माता।  
तुमको निसदिन ध्यावत, हरि विष्णु विधाता॥  

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रूप।  
अम्बर पर आभूषण, सोहे मनमोह॥  

एक समय की बेटी, मांगने आई करधनी।  
रूप चौदह का दिया, तब लागी पूजन॥  

जो कोई तुमको ध्यावत, नित मंगल पावत।  
कहत अटूट शिवशंकर, दुःख दारिद्र मिटावत॥  

व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं?

  • खाने योग्य: साबुदाना खिचड़ी, सिंघाड़े का आटा, मखाना, दूध, फल, मेवा।
  • न खाएं: नमक, अनाज, प्याज-लहसुन, तेल में तला भोजन।

अहोई अष्टमी के लिए विशेष टिप्स

  • व्रत के दिन किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन दान करें।
  • अहोई माता के मंदिर में जाकर दीपक जलाएँ।
  • संतान की सुरक्षा के लिए रक्षा कवच का पाठ करें।

आशीर्वाद और शुभकामनाएँ

2025 की अहोई अष्टमी का यह पावन अवसर त्रियोग के संयोग के कारण और भी विशेष हो गया है। इस दिन व्रत रखकर अहोई माता की कृपा पाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और संतान पर माँ की दया बनी रहती है। आप सभी को अहोई अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🙏

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