स्कंद षष्ठी, जिसे चंपा षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में, चंपा षष्ठी 25 अक्टूबर को पड़ रही है। इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान से भगवान स्कंद की पूजा करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं।
चंपा षष्ठी का महत्व
चंपा षष्ठी का व्रत भगवान स्कंद की कृपा पाने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर पूजन करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इस व्रत का विशेष महत्व निम्नलिखित कारणों से है:
- संतान प्राप्ति: जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
- रोग मुक्ति: भगवान स्कंद की कृपा से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है।
- शत्रु पर विजय: इस व्रत को करने से शत्रुओं का भय समाप्त होता है।
- धन-समृद्धि: भगवान कार्तिकेय की कृपा से घर में सुख-समृद्धि आती है।
चंपा षष्ठी पूजन विधि
चंपा षष्ठी का व्रत रखने वाले भक्तों को निम्नलिखित विधि से पूजन करना चाहिए:
सुबह की तैयारी
- प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- भगवान स्कंद की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
पूजा सामग्री
- चंपा के फूल (या लाल रंग के अन्य फूल)
- धूप, दीप, अगरबत्ती
- फल, मिठाई, पंचामृत
- कुमकुम, हल्दी, चावल
- सिंदूर और रोली
पूजन विधि
- सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें।
- फिर भगवान स्कंद की मूर्ति पर चंपा के फूल अर्पित करें।
- धूप-दीप जलाकर आरती करें।
- निम्न मंत्र का जाप करें:
ॐ स्कन्दाय नमः (108 बार जपें)
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
व्रत कथा सुनें
पूजन के बाद चंपा षष्ठी की कथा सुननी चाहिए। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
चंपा षष्ठी व्रत कथा
प्राचीन काल में एक गरीब ब्राह्मण दंपत्ति रहते थे। उनके कोई संतान नहीं थी। एक बार ऋषि नारद ने उन्हें चंपा षष्ठी का व्रत करने की सलाह दी। ब्राह्मण दंपत्ति ने पूरी श्रद्धा से व्रत किया और भगवान स्कंद की आराधना की। कुछ समय बाद उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। यह देखकर अन्य लोगों ने भी इस व्रत को करना शुरू कर दिया और सभी को मनोवांछित फल प्राप्त हुआ।
चंपा षष्ठी के मंत्र
इस व्रत में निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
- मूल मंत्र: “ॐ स्कन्दाय नमः”
- स्कंद गायत्री मंत्र: “ॐ शरवणभवाय विद्महे, शक्तिहस्ताय धीमहि, तन्नो स्कन्द प्रचोदयात्॥”
- भक्ति मंत्र: “जय जय स्कंद हरे, मुरुगन शरणम्। भक्तजन पालक, करुणा निधानम्॥”
व्रत के नियम
चंपा षष्ठी का व्रत रखने वाले भक्तों को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:
- पूरे दिन उपवास रखें या फलाहार करें।
- सत्य बोलें और किसी का दिल न दुखाएं।
- शाम को भगवान स्कंद की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए समय बिताएं।
निष्कर्ष
चंपा षष्ठी का व्रत भगवान स्कंद की कृपा पाने का एक श्रेष्ठ अवसर है। इस दिन पूर्ण श्रद्धा से पूजन करने और व्रत रखने से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। 2025 में यह पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर भगवान कार्तिकेय की आराधना करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।
ॐ स्कन्दाय नमः॥
