हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है, और जब यह दत्तात्रेय जयंती के रूप में मनाई जाती है, तो इसकी महिमा और भी बढ़ जाती है। दत्त पूर्णिमा भगवान दत्तात्रेय के प्रकटोत्सव के रूप में मनाई जाती है, जो त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—के सम्मिलित स्वरूप माने जाते हैं। इस वर्ष, 18 दिसंबर 2023 को यह पावन पर्व मनाया जाएगा। आइए, जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और रोचक कथा।
दत्त पूर्णिमा 2023 का शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समापन समय निम्नलिखित है:
- पूर्णिमा तिथि आरंभ: 17 दिसंबर 2023, रात 09:01 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 18 दिसंबर 2023, रात 10:41 बजे
इस वर्ष दत्त पूर्णिमा का पर्व 18 दिसंबर को मनाया जाएगा। पूजा के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल या सायंकाल का माना जाता है।
दत्त पूर्णिमा का महत्व
दत्तात्रेय भगवान को त्रिमूर्ति का अवतार माना जाता है। उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली दत्त पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है:
- इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
- दत्तात्रेय जी की कृपा से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।
- इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
- भक्तों को आध्यात्मिक शांति और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।
दत्त पूर्णिमा पूजा विधि
दत्त पूर्णिमा के दिन निम्नलिखित विधि से पूजा करनी चाहिए:
सामग्री
- दत्तात्रेय जी की मूर्ति या चित्र
- लाल या पीले वस्त्र
- फूल, अक्षत, चंदन
- धूप, दीप, नैवेद्य (मीठा भोग)
- तुलसी दल और जल
पूजा विधि
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- दत्तात्रेय जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- उन्हें लाल या पीले वस्त्र अर्पित करें।
- फूल, अक्षत और चंदन से उनका श्रृंगार करें।
- धूप-दीप जलाकर निम्न मंत्र का जाप करें:
ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः॥
- भोग के रूप में मीठा प्रसाद अर्पित करें।
- दत्तात्रेय चालीसा या दत्त स्तोत्र का पाठ करें।
- आरती करके प्रसाद वितरण करें।
भगवान दत्तात्रेय की रोचक कथा
दत्तात्रेय जी के जन्म की कथा अत्यंत रोचक और प्रेरणादायक है। पुराणों के अनुसार, एक बार महर्षि अत्रि और उनकी पत्नी अनुसूया ने घोर तपस्या करके त्रिदेवों को प्रसन्न किया। त्रिदेवों ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे। इस प्रकार, ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अंश से दत्तात्रेय का जन्म हुआ।
दत्तात्रेय जी को 24 गुरुओं से ज्ञान प्राप्त हुआ था, जिनमें पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, सूर्य, चंद्रमा, कबूतर, अजगर, समुद्र, पतंगा, मधुमक्खी, हाथी, हिरण, मछली, कुरर पक्षी, बालक, कुमारी, सर्प, बाण, मकड़ी और भृंगी शामिल हैं। इनसे उन्होंने जीवन के गहन सत्य सीखे।
दत्त पूर्णिमा व्रत कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण दम्पति थे जिनके कोई संतान नहीं थी। एक दिन, एक संत ने उन्हें दत्त पूर्णिमा का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने पूरी श्रद्धा से व्रत रखा और भगवान दत्तात्रेय की आराधना की। कुछ समय बाद, उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जो बड़ा होकर महान विद्वान बना। इस प्रकार, इस व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।
दत्त पूर्णिमा का पर्व भक्तों के लिए अत्यंत पावन अवसर होता है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है। 18 दिसंबर 2023 को इस पुण्य दिवस पर पूर्ण श्रद्धा से पूजा करें और भगवान की कृपा प्राप्त करें।
॥ हरि ॐ तत्सत् ॥
