# Chhath Puja 2025: आज है खरना, भूलकर भी ना करें ये गलतियां, जानिए कैसे ग्रहण करें प्रसाद
प्रस्तावना: खरना का पावन अवसर
चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा के दूसरे दिन खरना का विशेष महत्व होता है। यह व्रत और भक्ति का दिन है, जहां श्रद्धालु सूर्य देव और छठी मैया की कृपा पाने के लिए नियमों का पालन करते हैं। खरना के दिन कुछ गलतियां भक्तों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। आइए जानते हैं खरना के नियम, प्रसाद ग्रहण करने का सही तरीका और वो गलतियां जिनसे बचना चाहिए।
खरना क्या है और इसका महत्व
खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है, जिसे लोहंडा या खरना के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं और पुरुष पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं और शाम को प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद को खीर-रोटी कहा जाता है, जो गुड़ की खीर और गेहूं की रोटी से बनाया जाता है।
खरना का धार्मिक महत्व
- यह दिन शुद्धता और संयम का प्रतीक है।
- खरना के प्रसाद को ग्रहण करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।
- इस दिन छठी मैया की विशेष कृपा बनी रहती है।
खरना के दिन क्या करें?
1. सुबह की शुरुआत स्नान और पूजा से
खरना के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। घर की सफाई करने के बाद छठी मैया और सूर्य देव की पूजा करें। मंत्रों का उच्चारण करते हुए आरती करें:
“ॐ सूर्याय नमः, छठी मैया की जय”
2. व्रत का पालन सख्ती से
खरना के दिन व्रती को निर्जला व्रत रखना होता है। पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। शाम तक बिना कुछ खाए-पिए व्रत रखें।
3. प्रसाद तैयार करने के नियम
- प्रसाद बनाने से पहले हाथ धोकर शुद्ध हो लें।
- खीर बनाने के लिए नया बर्तन और चूल्हे की आग का उपयोग करें।
- गुड़ की खीर और गेहूं की रोटी बनाते समय मन में छठी मैया का स्मरण करें।
खरना के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां
1. प्रसाद में नमक या मसाले का उपयोग
खरना का प्रसाद पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। इसमें नमक, मिर्च या किसी भी तरह के मसाले का उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का फल नहीं मिलता।
2. व्रत तोड़ने की गलती
कुछ लोग दिनभर भूखे-प्यासे रहने की तकलीफ नहीं झेल पाते और बीच में ही व्रत तोड़ देते हैं। यह गलती न करें, वरना पूजा का पुण्य प्राप्त नहीं होगा।
3. प्रसाद ग्रहण करने का गलत तरीका
खरना का प्रसाद ग्रहण करते समय जमीन पर बैठकर ही खाना चाहिए। कुर्सी या टेबल पर बैठकर प्रसाद न लें। साथ ही, प्रसाद को हाथ से ही खाएं, कटोरी-चम्मच का उपयोग न करें।
प्रसाद ग्रहण करने का सही तरीका
1. सूर्यास्त के बाद ही प्रसाद लें
खरना के दिन प्रसाद सूर्यास्त के बाद ही ग्रहण करना चाहिए। पहले नहीं। प्रसाद लेने से पहले छठी मैया और सूर्य देव को भोग लगाएं।
2. प्रसाद बांटने का नियम
- सबसे पहले परिवार के सदस्यों को प्रसाद दें।
- फिर पड़ोसियों और गरीबों में प्रसाद बांटें।
- प्रसाद बांटते समय “छठी मैया की जय” बोलें।
3. प्रसाद खाने के बाद का नियम
प्रसाद ग्रहण करने के बाद फिर से निर्जला व्रत शुरू कर देना चाहिए। अगले दिन सुबह अर्घ्य देने तक कुछ भी नहीं खाना-पीना चाहिए।
छठ पूजा की तैयारी: अगले दिन का संकल्प
खरना के बाद तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन सुबह का अर्घ्य दिया जाता है। इन दिनों के लिए पहले से तैयारी कर लें:
- नदी या तालाब के किनारे जाने की व्यवस्था करें।
- अर्घ्य के लिए नए बर्तन, फल, फूल और दीपक तैयार रखें।
- पूजा के मंत्र और विधि याद कर लें।
निष्कर्ष: श्रद्धा और विश्वास का महत्व
छठ पूजा का हर दिन अपना एक अलग महत्व रखता है। खरना के दिन शुद्धता, संयम और भक्ति का पालन करने से छठी मैया की कृपा बनी रहती है। गलतियों से बचकर और सही विधि से प्रसाद ग्रहण करने से व्रत का पूरा फल मिलता है। आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं! छठी मैया आप सभी की मनोकामनाएं पूरी करें!
“उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दे, छठी मैया का आशीर्वाद पाए।”
