# Ekadashi 2025: 27 अगस्त को है पुत्रदा एकादशी, जानिए महत्व, पूजाविधि और पौराणिक कथा
पुत्रदा एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और पुत्रदा एकादशी इनमें से एक पावन तिथि है। यह व्रत संतान प्राप्ति और उनकी दीर्घायु के लिए किया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की कृपा से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
पुत्रदा एकादशी क्यों मनाई जाती है?
- संतान सुख की कामना पूरी करने के लिए
- पुत्र/पुत्री की रक्षा और दीर्घायु के लिए
- पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए
- भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए
पुत्रदा एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2025 में पुत्रदा एकादशी 27 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी।
एकादशी तिथि प्रारंभ और समाप्ति
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 अगस्त 2025, रात 09:28 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 27 अगस्त 2025, रात 11:49 बजे
पारण का समय (व्रत तोड़ने का मुहूर्त)
28 अगस्त 2025, सुबह 06:12 से 08:39 तक
पुत्रदा एकादशी व्रत की पूजाविधि
इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:
व्रत से पहले की तैयारी
- दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें और मन को शांत रखें।
- एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
पूजा विधान
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर में या किसी पवित्र स्थान पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- तुलसी दल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- निम्न मंत्र का जाप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” (108 बार)
व्रत कथा का श्रवण
पूजा के बाद पुत्रदा एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें। कथा सुनने मात्र से ही व्रत का पुण्य प्राप्त होता है।
पुत्रदा एकादशी की पौराणिक कथा
प्राचीन काल में भद्रावती नगरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी, जिसके कारण वे बहुत दुखी रहते थे। एक बार महर्षि लोमेश उनके राज्य में आए। राजा ने उन्हें अपनी व्यथा सुनाई।
महर्षि ने बताया कि पूर्व जन्म में राजा ने एक ब्राह्मण को प्यासे होने पर भी पानी नहीं दिया था, जिसके कारण उन्हें संतान सुख नहीं मिल रहा है। महर्षि ने उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
राजा ने पत्नी सहित विधि-विधान से व्रत किया। कुछ समय बाद रानी गर्भवती हुई और उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। इस प्रकार, इस व्रत के प्रभाव से राजा को संतान सुख मिला।
पुत्रदा एकादशी व्रत के नियम
- इस दिन अन्न ग्रहण न करें। फलाहार या दूध-फल से ही व्रत तोड़ें।
- क्रोध, झूठ और किसी का अपमान न करें।
- पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण करें।
- रात्रि जागरण करके भजन-कीर्तन करें।
पुत्रदा एकादशी व्रत के लाभ
- संतान प्राप्ति में सहायक
- पितृ दोष से मुक्ति
- मोक्ष की प्राप्ति
- धन-धान्य की वृद्धि
निष्कर्ष
पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी है। इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। आप सभी को यह व्रत करके मनोवांछित फल प्राप्त हो, यही हमारी कामना है।
हरि ॐ तत्सत्।
