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Vijaya Ekadashi 2025: विजया एकादशी महत्व पूजा मंत्र

Published June 26, 2026
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5 Min Read

# विजया एकादशी 2025: विजया एकादशी आज, जानिए महत्व, पूजा विधि और मंत्र

Contents
प्रस्तावनाविजया एकादशी का महत्वपौराणिक कथाविजया एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्तविजया एकादशी व्रत की पूजा विधि1. व्रत की तैयारी2. पूजा सामग्री3. पूजन विधि4. रात्रि जागरण5. दान-पुण्यविजया एकादशी के मंत्र1. विष्णु मंत्र2. विजय प्राप्ति हेतु मंत्र3. पाप नाशक मंत्रव्रत में क्या न करें?पारण विधि (व्रत तोड़ने का समय)निष्कर्ष

प्रस्तावना

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और हर माह के कृष्ण व शुक्ल पक्ष में आती है। विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी है, जो साधकों को जीवन के हर संघर्ष में विजय दिलाने वाली मानी जाती है। इस वर्ष, विजया एकादशी 2025 में [तिथि डालें] को मनाई जाएगी। आइए, जानते हैं इस पावन एकादशी का महत्व, पूजा विधि और मंत्र।

विजया एकादशी का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को हर प्रकार की बाधाओं पर विजय प्राप्त होती है। इसका उल्लेख पद्म पुराण में मिलता है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस व्रत की कथा सुनाई थी। मान्यता है कि:

  • इस व्रत से पापों का नाश होता है और आत्मिक शुद्धि मिलती है।
  • संकटों से मुक्ति और सफलता प्राप्त होती है।
  • भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, जब भगवान राम वनवास के दौरान लंका जाने का मार्ग ढूंढ रहे थे, तब समुद्र पार करने के लिए ऋषि बकदालभ्य ने उन्हें विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत के प्रभाव से ही श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की। तभी से यह एकादशी “विजया” नाम से जानी जाती है।

विजया एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • तिथि: [तिथि डालें]
  • एकादशी प्रारंभ: [समय डालें]
  • एकादशी समाप्त: [समय डालें]
  • पारण मुहूर्त: [समय डालें] (द्वादशी तिथि में)

विजया एकादशी व्रत की पूजा विधि

इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:

1. व्रत की तैयारी

  • दशमी की रात से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. पूजा सामग्री

  • तुलसी दल, फूल, फल, धूप-दीप
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र
  • गंगाजल, चंदन, तिल

3. पूजन विधि

  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  • उन्हें पंचामृत से स्नान कराएँ और वस्त्र अर्पित करें।
  • इस मंत्र का जाप करें:

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

  • विष्णु सहस्रनाम या “विजया एकादशी व्रत कथा” का पाठ करें।

4. रात्रि जागरण

रात में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें। विष्णु मंत्रों का जाप या “हरे राम हरे कृष्ण” का कीर्तन कर सकते हैं।

5. दान-पुण्य

  • गरीबों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दान करें।
  • तुलसी के पौधे लगाएँ या गाय को हरा चारा खिलाएँ।

विजया एकादशी के मंत्र

इस दिन इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना गया है:

1. विष्णु मंत्र

“ॐ नमो नारायणाय”

2. विजय प्राप्ति हेतु मंत्र

“ॐ विष्णवे नमः, जय जय श्रीधर”

3. पाप नाशक मंत्र

“ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।

यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥”

व्रत में क्या न करें?

  • अन्न ग्रहण न करें: एकादशी के दिन चावल, गेहूं आदि न खाएँ।
  • क्रोध या झूठ से बचें: मन को शांत रखें और सत्य बोलें।
  • तामसिक भोजन वर्जित: प्याज, लहसुन और मांसाहार से दूर रहें।

पारण विधि (व्रत तोड़ने का समय)

द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद पारण करें। सबसे पहले तुलसी दल युक्त जल ग्रहण करें, फिर फलाहार करें। इसके बाद सात्विक भोजन कर सकते हैं।

निष्कर्ष

विजया एकादशी का व्रत श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर जीवन के हर मोर्चे पर विजय दिलाता है। यह न केवल आध्यात्मिक बल देता है, बल्कि मनोकामनाओं को भी पूर्ण करता है। इसलिए, इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए पूर्ण श्रद्धा से व्रत करें।

ध्यान दें: तिथि और मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं। किसी विद्वान ब्राह्मण से सलाह लेकर ही व्रत करें।

हरि ॐ! 🙏

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