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भगवान गणेश को बुधवार को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं? जानें रोचक कथा

Published June 27, 2026
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आस्था: बुधवार के दिन क्यों चढ़ाई जाती है भगवान गणेशजी को दूर्वा? जानिए रोचक कथादूर्वा का महत्व और गणेश पूजाबुधवार को दूर्वा चढ़ाने की पौराणिक कथाबुधवार को ही क्यों?दूर्वा चढ़ाने का सही तरीकादूर्वा से जुड़े अन्य रोचक तथ्यनिष्कर्ष

आस्था: बुधवार के दिन क्यों चढ़ाई जाती है भगवान गणेशजी को दूर्वा? जानिए रोचक कथा

हिंदू धर्म में हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। बुधवार का दिन भगवान गणेशजी को समर्पित माना जाता है। इस दिन गणपति की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुधवार को गणेशजी को दूर्वा (हरी घास) क्यों चढ़ाई जाती है? इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा छुपी हुई है, जो गणेश भक्ति की गहराई को दर्शाती है। आइए, जानते हैं इसका पूरा रहस्य…

दूर्वा का महत्व और गणेश पूजा

दूर्वा यानी हरी घास, जिसे संस्कृत में ‘दूर्वा’ या ‘अमृततृण’ कहा जाता है, गणेशजी को अत्यंत प्रिय है। शास्त्रों के अनुसार, दूर्वा चढ़ाने से गणपति प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। इसके पीछे कुछ विशेष कारण हैं:

  • दूर्वा की 3 या 5 गांठें शुभ मानी जाती हैं, जो त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और पंचतत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतीक हैं।
  • इसकी हरियाली सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जो मन को शांति देती है।
  • आयुर्वेद के अनुसार, दूर्वा में औषधीय गुण होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।

बुधवार को दूर्वा चढ़ाने की पौराणिक कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश निकला। अमृत पाने के लिए असुरों ने देवताओं से छीनने का प्रयास किया। इसी संघर्ष के दौरान अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिर गईं, जहाँ-जहाँ ये बूंदें गिरीं, वहाँ दूर्वा घास उग आई। इसलिए इसे ‘अमृततृण’ भी कहा जाता है।

कहते हैं कि एक बार भगवान गणेश ने एक राक्षस का वध किया, लेकिन उसके बाद उनका शरीर अत्यधिक गर्म हो गया। सभी देवताओं ने उन पर दूर्वा घास अर्पित की, जिससे उनकी गर्मी शांत हुई। तभी से गणेशजी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

बुधवार को ही क्यों?

बुधवार को बुद्धि और समृद्धि का दिन माना जाता है। गणेशजी विघ्नहर्ता और बुद्धिदाता हैं, इसलिए इस दिन उनकी पूजा विशेष फलदायी होती है। दूर्वा चढ़ाने का संबंध ग्रहों से भी है:

  • बुध ग्रह का रंग हरा होता है, और दूर्वा भी हरी होती है।
  • इस दिन दूर्वा अर्पित करने से बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे बुद्धि और वाणी में वृद्धि होती है।

दूर्वा चढ़ाने का सही तरीका

गणेशजी को दूर्वा चढ़ाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • दूर्वा को गणेश मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” बोलते हुए चढ़ाएं।
  • दूर्वा की 21 गांठें (या कम से कम 3) चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • इसे गणेशजी के दाएं कान के पास रखें, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यहाँ रखने से विशेष आशीर्वाद मिलता है।
  • दूर्वा को दूध या शक्कर के साथ मिलाकर भी अर्पित किया जा सकता है।

दूर्वा से जुड़े अन्य रोचक तथ्य

  • दूर्वा को श्री गणेश की दूसरी पत्नी भी माना जाता है (पहली पत्नी रिद्धि-सिद्धि हैं)।
  • कुछ मान्यताओं के अनुसार, दूर्वा चढ़ाने से कुंडली के दोष दूर होते हैं।
  • इसे नवग्रह पूजा में भी उपयोग किया जाता है, खासकर बुध ग्रह की शांति के लिए।

निष्कर्ष

भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा न केवल एक धार्मिक रिवाज है, बल्कि यह प्रकृति और देवत्व के बीच के गहरे संबंध को दर्शाती है। बुधवार के दिन दूर्वा अर्पित करने से गणपति की कृपा तो मिलती ही है, साथ ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है। अगर आप भी गणेश भक्त हैं, तो इस बुधवार से इस परंपरा को अपनाएं और भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें।

ॐ गं गणपतये नमः।

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