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Sawan 2025 पार्थिव शिवलिंग पूजा विधि और महत्व

Published June 26, 2026
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6 Min Read

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Contents
पार्थिव शिवलिंग क्या है?सावन में पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्वपार्थिव शिवलिंग पूजा की तैयारीआवश्यक सामग्रीपूजा का शुभ मुहूर्तपार्थिव शिवलिंग पूजा विधिशिवलिंग निर्माणपूजा की विधिमंत्रोच्चारपार्थिव शिवलिंग पूजा के लाभविशेष सावधानियांपार्थिव शिवलिंग पूजा से जुड़ी पौराणिक कथाअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नक्या पार्थिव शिवलिंग को घर में रख सकते हैं?क्या स्त्रियां पार्थिव शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं?पार्थिव शिवलिंग पूजा के लिए कौन सा दिन श्रेष्ठ है?निष्कर्ष

Sawan 2025: सावन मास में पार्थिव शिवलिंग की ऐसे करें पूजा, जानें पूजा विधि और महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह लेख आपको सावन 2025 में पार्थिव शिवलिंग की पूजा विधि, मंत्र और इसके महत्व के बारे में विस्तार से बताएगा।

पार्थिव शिवलिंग क्या है?

पार्थिव शिवलिंग का निर्माण मिट्टी या बालू से किया जाता है। यह शिवलिंग अस्थायी होता है और पूजा के बाद जल में विसर्जित कर दिया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से भक्त को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

  • मिट्टी से बना होने के कारण इसे पार्थिव (पृथ्वी से संबंधित) कहा जाता है
  • इसकी पूजा से घर में सुख-शांति बनी रहती है
  • यह शिव भक्तों के लिए सर्वसुलभ और सरल पूजा विधि है

सावन में पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्व

सावन मास में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, इसी महीने में समुद्र मंथन हुआ था और निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने किया था।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • सावन के प्रत्येक सोमवार को पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
  • इस पूजा से रोग, दरिद्रता और संकटों से मुक्ति मिलती है
  • पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है

पार्थिव शिवलिंग पूजा की तैयारी

आवश्यक सामग्री

पार्थिव शिवलिंग की पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:

  • शुद्ध मिट्टी या बालू (गंगाजल मिला हुआ)
  • दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत)
  • बिल्व पत्र, धतूरा, आक के फूल
  • चंदन, अक्षत, फल
  • दीपक, अगरबत्ती
  • जल से भरा कलश

पूजा का शुभ मुहूर्त

सावन 2025 में पार्थिव शिवलिंग पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:30 से 6:00 बजे तक) सर्वोत्तम माना गया है। इसके अलावा आप संध्याकाल में भी यह पूजा कर सकते हैं।

पार्थिव शिवलिंग पूजा विधि

शिवलिंग निर्माण

सबसे पहले शुद्ध मिट्टी या बालू लेकर उसमें थोड़ा गंगाजल मिलाएं। फिर इससे लगभग 3 से 4 इंच ऊंचा शिवलिंग बनाएं। शिवलिंग का आधार (आधारशिला) थोड़ा चौड़ा रखें।

पूजा की विधि

  1. सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  2. लकड़ी के पाटे या तांबे के पात्र पर सफेद कपड़ा बिछाएं
  3. उस पर पार्थिव शिवलिंग स्थापित करें
  4. शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं
  5. पंचामृत से अभिषेक करें
  6. बिल्व पत्र, धतूरा और फूल चढ़ाएं
  7. दीपक जलाकर आरती करें

मंत्रोच्चार

पूजा के दौरान निम्न मंत्रों का जाप करें:

“ॐ नमः शिवाय”

“कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥”

पार्थिव शिवलिंग पूजा के लाभ

सावन मास में नियमित रूप से पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • मानसिक शांति प्राप्त होती है
  • पारिवारिक कलह दूर होती है
  • आर्थिक समृद्धि में वृद्धि होती है
  • कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं
  • संतान प्राप्ति में सहायक

विशेष सावधानियां

पार्थिव शिवलिंग की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करें
  • पूजा के दौरान मन शांत और भावना पवित्र रखें
  • बिल्व पत्र कभी भी टूटा हुआ न चढ़ाएं
  • पूजा के बाद शिवलिंग को किसी पवित्र नदी या जलाशय में विसर्जित कर दें
  • सावन में मांसाहार और मदिरा का सेवन वर्जित है

पार्थिव शिवलिंग पूजा से जुड़ी पौराणिक कथा

स्कंद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने माता पार्वती को पार्थिव शिवलिंग की पूजा का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक मिट्टी के शिवलिंग का निर्माण कर उसकी पूजा करता है, उसे साक्षात शिव की कृपा प्राप्त होती है।

एक अन्य कथा के अनुसार, रावण ने भी पार्थिव शिवलिंग की पूजा करके शिव से वरदान प्राप्त किया था। इससे इस पूजा विधि की महत्ता और बढ़ जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पार्थिव शिवलिंग को घर में रख सकते हैं?

नहीं, पार्थिव शिवलिंग को पूजा के बाद जल में विसर्जित कर देना चाहिए। इसे घर में नहीं रखना चाहिए।

क्या स्त्रियां पार्थिव शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं?

हां, स्त्रियां पूरी श्रद्धा के साथ पार्थिव शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं। कोई प्रतिबंध नहीं है।

पार्थिव शिवलिंग पूजा के लिए कौन सा दिन श्रेष्ठ है?

सावन के सोमवार को पार्थिव शिवलिंग पूजा का विशेष महत्व है। इसके अलावा प्रदोष और शिवरात्रि पर भी यह पूजा फलदायी होती है।

निष्कर्ष

सावन 2025 में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करके आप भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह पूजा विधि सरल होने के साथ-साथ अत्यंत फलदायी भी है। इस लेख में बताई गई विधि के अनुसार पूजा करके आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकते हैं।

भगवान शिव सभी भक्तों पर कृपा बनाए रखें! हर हर महादेव!

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