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Chaitra Navratri 2025: Maa Katyayani Puja Vidhi Katha Mantra Mahatva

चैत्र नवरात्रि 2025 के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा विधि, कथा, मंत्र और महत्व जानें। इस दिन की विशेष पूजा करके आशीर्वाद पाएं और जीवन में सुख-समृद्धि लाएं।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

नवरात्रि के पावन पर्व का छठा दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित है। यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मां कात्यायनी साहस, न्याय और आध्यात्मिक शक्ति की प्रतीक हैं। इस लेख में हम आपको मां कात्यायनी की पूजा विधि, कथा, मंत्र और उनके महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
मां कात्यायनी का परिचयमां कात्यायनी का स्वरूपमां कात्यायनी पूजा विधिसुबह की पूजा तैयारीमुख्य पूजा विधिमां कात्यायनी के मंत्रमूल मंत्रध्यान मंत्रस्तुति मंत्रमां कात्यायनी की कथामां कात्यायनी पूजा का महत्वनिष्कर्ष

मां कात्यायनी का परिचय

मां कात्यायनी दुर्गा का छठा रूप हैं, जिन्हें कात्यायन ऋषि की पुत्री माना जाता है। इनका नाम कात्यायन गोत्र से जुड़ा है। इन्हें “विद्या और बुद्धि की देवी” भी कहा जाता है। मां कात्यायनी का वाहन सिंह है और यह चार भुजाओं वाली हैं, जिनमें तलवार, कमल, अभय मुद्रा और वरद मुद्रा धारण किए हुए हैं।

मां कात्यायनी का स्वरूप

  • वर्ण: स्वर्णिम (सोने जैसा)
  • वाहन: सिंह
  • आयुध: तलवार, कमल
  • मुद्रा: अभय और वरद मुद्रा

मां कात्यायनी पूजा विधि

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है। पूजा की संपूर्ण विधि इस प्रकार है:

सुबह की पूजा तैयारी

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • लाल रंग के फूल और वस्त्र तैयार करें (मां कात्यायनी को लाल रंग प्रिय है)
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें

मुख्य पूजा विधि

  • सर्वप्रथम मां कात्यायनी को लाल फूल अर्पित करें
  • धूप, दीप, नैवेद्य (मधुर भोग) चढ़ाएं
  • लाल चंदन का तिलक लगाएं
  • मां को शहद या मधु का भोग लगाएं
  • नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें

मां कात्यायनी के मंत्र

मां कात्यायनी की आराधना के लिए निम्न मंत्रों का जाप करें:

मूल मंत्र

“ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥”

ध्यान मंत्र

“चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥”

स्तुति मंत्र

“या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

मां कात्यायनी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, कात्यायन नाम के एक महान ऋषि थे। उन्होंने भगवती पराम्बा की कठोर तपस्या की और मांग की कि वे उनके घर पुत्री रूप में जन्म लें। देवी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और कात्यायन ऋषि के आश्रम में पुत्री रूप में प्रकट हुईं। इसलिए इन्हें कात्यायनी कहा जाने लगा।

कथा यह भी कहती है कि जब महिषासुर के अत्याचार बढ़ गए, तो देवताओं ने मां कात्यायनी से प्रार्थना की। मां ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।

मां कात्यायनी पूजा का महत्व

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व है:

  • साहस और निर्भयता: मां कात्यायनी की आराधना से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है
  • विद्या प्राप्ति: विद्यार्थियों को बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है
  • विवाह में बाधा दूर: कुंवारी कन्याएं मां कात्यायनी की पूजा करके योग्य वर की प्राप्ति कर सकती हैं
  • रोग मुक्ति: मां की कृपा से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है

निष्कर्ष

नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी की भक्ति और साधना के लिए समर्पित है। इस दिन सच्चे मन से मां की आराधना करने वाले भक्तों को मां अपनी विशेष कृपा प्रदान करती हैं। मां कात्यायनी की कृपा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आइए, हम सभी नवरात्रि के इस पावन दिन मां कात्यायनी की शरण में जाएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

जय मां कात्यायनी!

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