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Sarva Pitru Amavasya 2025 6 अक्टूबर को जानें महत्व और श्राद्ध विधि

सर्वपितृ अमावस्या 2025 (6 अक्टूबर) का महत्व जानें और पितरों का श्राद्ध करने का सही तरीका सीखें। इस पवित्र दिन पर पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए जरूरी रीति-रिवाज और मंत्रों की जानकारी पाएं।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

Sarva Pitru Amavasya 2025: पितृपक्ष का अंतिम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन

हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। यह वह पावन तिथि है जब हम अपने पितरों को तर्पण, श्राद्ध और तिलांजलि देकर उनकी आत्मा की शांति की कामना करते हैं। 6 अक्टूबर 2025 को पड़ने वाली यह तिथि पितृपक्ष का समापन करती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया श्राद्ध सभी पूर्वजों तक पहुँचता है, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो।

Contents
Sarva Pitru Amavasya 2025: पितृपक्ष का अंतिम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिनसर्वपितृ अमावस्या का आध्यात्मिक महत्वसर्वपितृ अमावस्या 2025 की तिथि और मुहूर्तकिनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है?सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध विधि1. सुबह की तैयारी2. पिंडदान और तर्पण3. ब्राह्मण भोज4. दान-पुण्यसर्वपितृ अमावस्या के विशेष नियमसर्वपितृ अमावस्या का वैज्ञानिक और सामाजिक महत्वनिष्कर्ष

सर्वपितृ अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

शास्त्रों में कहा गया है:

“पितृदेवो भव” अर्थात पितर ही देवता हैं। इस दिन का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि:

  • यह महालय पक्ष का अंतिम दिन होता है
  • जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है
  • इस दिन दान-पुण्य का विशेष फल मिलता है
  • पितृदोष शांति के लिए यह सर्वोत्तम तिथि मानी जाती है

सर्वपितृ अमावस्या 2025 की तिथि और मुहूर्त

6 अक्टूबर 2025, सोमवार को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 5 अक्टूबर 2025 को रात 09:34 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 6 अक्टूबर 2025 को रात 11:24 बजे
  • श्राद्ध का सर्वोत्तम समय: प्रातः 06:15 से 11:45 तक (कुतुप मुहूर्त)
  • तर्पण का समय: दोपहर 12:00 से 01:30 तक

किनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है?

सर्वपितृ अमावस्या के दिन निम्नलिखित पितरों का विशेष रूप से श्राद्ध किया जाता है:

  • जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो
  • जिनका निधन अमावस्या को हुआ हो
  • सभी पूर्वज जिनका श्राद्ध विशेष तिथियों पर नहीं किया गया हो
  • समस्त कुल के पितर जिन्हें हम भूल गए हों

सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध विधि

इस दिन श्राद्ध करने की विशेष विधि है जिसका पालन करना चाहिए:

1. सुबह की तैयारी

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पितरों का स्मरण करते हुए संकल्प लें
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें

2. पिंडदान और तर्पण

  • कुशा के आसन पर बैठकर काले तिल, जौ और जल से तर्पण करें
  • चावल के पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें
  • इस मंत्र का उच्चारण करें: “ॐ पितृभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधा नम:”

3. ब्राह्मण भोज

  • योग्य ब्राह्मणों को भोजन कराएं
  • भोजन में चावल, दाल, सब्जी, दही और खीर अवश्य शामिल करें
  • भोजन के बाद दक्षिणा और वस्त्र दान करें

4. दान-पुण्य

  • काले तिल, गुड़, कंबल या अनाज का दान करें
  • गरीबों को भोजन कराएं
  • पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करें

सर्वपितृ अमावस्या के विशेष नियम

इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए:

  • इस दिन लहसुन-प्याज का सेवन न करें
  • मांसाहार और मदिरा से पूर्णतः परहेज करें
  • किसी भी प्रकार का अनिष्ट कर्म न करें
  • पितरों का स्मरण करते हुए दिन व्यतीत करें

सर्वपितृ अमावस्या का वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व

यह परंपरा न केवल आध्यात्मिक बल्कि वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है:

  • परिवार के बंधन मजबूत होते हैं
  • पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त होती है
  • सामूहिक स्मरण से मनोवैज्ञानिक शांति मिलती है
  • दान-पुण्य से समाज का कल्याण होता है

निष्कर्ष

सर्वपितृ अमावस्या हमें अपने मूलों से जोड़ने वाली पावन तिथि है। 6 अक्टूबर 2025 को इस दिन पूरी श्रद्धा से पितरों का श्राद्ध, तर्पण और दान करने से न केवल पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है बल्कि पारिवारिक सुख-समृद्धि भी प्राप्त होती है। शास्त्रों में कहा गया है – “पितृणां तृप्तिमायान्ति तर्पणाद्देवतास्तथा” अर्थात तर्पण से पितर और देवता दोनों प्रसन्न होते हैं।

आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर अपने पूर्वजों को याद करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म करें।

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