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Kalashtami 2025 सावन कालाष्टमी आज पढ़ें भैरव चालीसा

सावन माह की कालाष्टमी 2025 में बाबा काल भैरव की कृपा पाने के लिए भैरव चालीसा का पाठ करें। जानें पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व, आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का सही तरीका।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

Kalashtami 2025: सावन माह की कालाष्टमी तिथि आज, बाबा काल भैरव की कृपा पाने के लिए करें भैरव चालीसा का पाठ

प्रस्तावना: कालाष्टमी का पावन पर्व

आज सावन माह की कालाष्टमी का पावन दिन है, जब भक्तजन भैरव बाबा की विशेष कृपा पाने के लिए व्रत, पूजा और भैरव चालीसा का पाठ करते हैं। यह तिथि भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है, जो भक्तों के सभी कष्टों का नाश करते हैं। इस लेख में जानिए कालाष्टमी का महत्व, पूजा विधि और मंत्रों का रहस्य।

Contents
Kalashtami 2025: सावन माह की कालाष्टमी तिथि आज, बाबा काल भैरव की कृपा पाने के लिए करें भैरव चालीसा का पाठप्रस्तावना: कालाष्टमी का पावन पर्वकालाष्टमी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्तक्यों मनाई जाती है कालाष्टमी?काल भैरव पूजा की विशेष विधिसामग्री तैयार करेंपूजा विधि: चरणबद्ध मार्गदर्शनभैरव चालीसा का महत्वचालीसा के प्रमुख श्लोककालाष्टमी व्रत कथाकालाष्टमी के विशेष उपायध्यान रखें ये सावधानियांकालाष्टमी का आध्यात्मिक संदेशसमापन: भैरव कृपा का दिन

कालाष्टमी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष सावन मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी 15 अगस्त 2025 को पड़ रही है। ज्योतिषियों के अनुसार:

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 14 अगस्त रात 10:17 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 15 अगस्त रात 11:43 बजे
  • पूजा का शुभ समय: प्रात: 5:30 से 8:30 बजे तक

क्यों मनाई जाती है कालाष्टमी?

पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने ब्रह्माजी के पांचवें सिर को काटने के बाद काल भैरव का रूप धारण किया था। यह तिथि न्याय और दंड का प्रतीक मानी जाती है।

काल भैरव पूजा की विशेष विधि

सामग्री तैयार करें

  • मुख्य पूजा सामग्री: काले तिल, उड़द की दाल, सरसों का तेल
  • प्रसाद: मदिरा, पान के पत्ते, नारियल
  • विशेष आवश्यकता: भैरव यंत्र या मूर्ति

पूजा विधि: चरणबद्ध मार्गदर्शन

  1. प्रात: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  2. लाल या काले आसन पर बैठकर भैरव जी का ध्यान करें
  3. काले तिल और जल से अभिषेक करें
  4. “ॐ भैरवाय नम:” मंत्र का जाप करें
  5. भैरव चालीसा और अष्टक का पाठ करें

भैरव चालीसा का महत्व

भैरव चालीसा का पाठ कालाष्टमी पर विशेष फलदायी माना जाता है। इसमें बाबा भैरव के 40 चरणों की स्तुति की गई है जो:

  • भय और शत्रुओं का नाश करती है
  • कर्ज से मुक्ति दिलाती है
  • आत्मबल और साहस बढ़ाती है

चालीसा के प्रमुख श्लोक

संस्कृत:
“जय जय काल भैरव देवा, शरणागत की लज्जा खेवा।
काल के भी करते काल, संकट हरो महाकाल॥”

कालाष्टमी व्रत कथा

पुराणों में वर्णित है कि एक बार एक गरीब ब्राह्मण ने पूरी श्रद्धा से कालाष्टमी का व्रत रखा। रात में बाबा भैरव स्वप्न में आकर उसे एक स्वर्ण मुद्रा दी। जागने पर उसके घर में धन की वर्षा हो गई। इसीलिए इस व्रत को मनोकामना पूर्ति का सर्वोत्तम उपाय माना जाता है।

कालाष्टमी के विशेष उपाय

  • काले कुत्ते को रोटी खिलाएं – भैरव का वाहन माना जाता है
  • निर्धनों को काले वस्त्र दान करें
  • श्मशान या भैरव मंदिर में दीप दान करें

ध्यान रखें ये सावधानियां

  • पूजा के समय क्रोध या नकारात्मक विचार न लाएं
  • मदिरा अर्पित करते समय शुद्धता का ध्यान रखें
  • रात्रि में अकेले बाहर जाने से बचें

कालाष्टमी का आध्यात्मिक संदेश

यह पर्व हमें सिखाता है कि काल (समय) सबसे बलवान है। बाबा भैरव का रूप हमें अनुशासन, न्याय और आत्मसंयम का पाठ पढ़ाता है। इस दिन मन से की गई प्रार्थना जीवन के सभी अंधकारों को दूर कर देती है।

समापन: भैरव कृपा का दिन

आज का यह पावन दिन भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम है। भैरव चालीसा का पाठ करके आप न सिर्फ बाबा की कृपा पा सकते हैं, बल्कि जीवन के सभी संकटों से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं। ॐ कालभैरवाय नम: के जाप के साथ इस पर्व को पूरी श्रद्धा से मनाएं।

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