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पितरों को खुश करने का उपाय हर दिन 12 बजे

पितरों को खुश करने का आसान उपाय: हर दिन 12 बजे यह काम करें और पाएं आशीर्वाद। जानें कैसे पूर्वजों की कृपा पाने के लिए यह समय सबसे शुभ है।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

पितरों को खुश करना है, हर दिन 12 बजे करें यह काम

हिंदू धर्म में पितृ दोष और पितरों की शांति का विशेष महत्व है। पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए शास्त्रों में कई उपाय बताए गए हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दोपहर 12 बजे का समय पितरों से जुड़े कर्मकांडों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है? इस लेख में जानिए कैसे आप प्रतिदिन मध्याह्न के इस पावन समय पर सरल क्रियाएँ करके अपने पूर्वजों को प्रसन्न कर सकते हैं।

Contents
पितरों को खुश करना है, हर दिन 12 बजे करें यह कामक्यों महत्वपूर्ण है पितरों की कृपा?दोपहर 12 बजे क्यों? वैज्ञानिक और धार्मिक महत्वसनातन मान्यताएँवैज्ञानिक दृष्टिकोणप्रतिदिन 12 बजे करने योग्य 5 सरल उपाय1. जल तर्पण की विधि2. अन्न दान का महत्व3. पीपल वृक्ष की सेवा4. श्राद्ध मंत्र जाप5. काले तिल का उपयोगविशेष पर्वों पर विधिसावधानियाँ एवं विशेष टिप्सनिष्कर्ष

क्यों महत्वपूर्ण है पितरों की कृपा?

गरुड़ पुराण में कहा गया है: “पितृणां प्रीतये यत्नः कार्यः सर्वात्मना सदा” (हमेशा पितरों की प्रसन्नता के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए)। पितर हमारे जीवन के तीन ऋणों में से एक हैं और उनकी असंतुष्ट आत्माएँ पारिवारिक समस्याओं का कारण बन सकती हैं:

  • कुटुंब में अचानक आर्थिक संकट
  • संतान प्राप्ति में बाधाएँ
  • बार-बार असफलताएँ
  • अस्पष्टीकृत स्वास्थ्य समस्याएँ

दोपहर 12 बजे क्यों? वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व

सनातन मान्यताएँ

स्कंद पुराण के अनुसार, मध्याह्न काल (11:30 AM से 12:30 PM) वह समय है जब पितृलोक के द्वार खुलते हैं। इस दौरान किया गया तर्पण या दान सीधे पितरों तक पहुँचता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आधुनिक विज्ञान के अनुसार, दोपहर के इस समय सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं जो जल को शुद्ध करने और ऊर्जा संचारित करने में सहायक होती हैं। यही कारण है कि जल तर्पण के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जाता है।

प्रतिदिन 12 बजे करने योग्य 5 सरल उपाय

1. जल तर्पण की विधि

  • साफ तांबे के लोटे में जल लें
  • उसमें काले तिल और दूर्वा घास मिलाएँ
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें
  • इस मंत्र का उच्चारण करें: “ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः”

2. अन्न दान का महत्व

कौए, गाय या कुत्ते को इस समय भोजन देना पितृ तर्पण के समान माना जाता है। गरुड़ पुराण में वर्णित है: “अन्नदानं परं दानं पितृणां प्रीतये सदा” (पितरों की प्रसन्नता के लिए अन्न दान सर्वोत्तम है)।

3. पीपल वृक्ष की सेवा

  • पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाएँ
  • सरसों के तेल का दीपक जलाएँ
  • इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो पितृदेवताभ्यः”

4. श्राद्ध मंत्र जाप

इस समय निम्न मंत्रों का 11 बार जाप करें:

  • “ॐ पितृ देवाय विद्महे, जगत धारिणे धीमहि, तन्नो पितृः प्रचोदयात्”
  • “ॐ सर्वपितृदेवाय नमः”

5. काले तिल का उपयोग

काले तिल को पितरों का प्रिय अन्न माना जाता है। प्रतिदिन 12 बजे:

  • काले तिल से भरे पात्र को दक्षिण दिशा में रखें
  • उसमें से थोड़े तिल निकालकर पक्षियों को खिलाएँ
  • शेष तिलों को बहते जल में प्रवाहित करें

विशेष पर्वों पर विधि

अमावस्या, पितृ पक्ष या ग्रहण काल में उपरोक्त क्रियाओं का विशेष महत्व है। इन दिनों में:

  • पितृ गायत्री मंत्र का जाप करें: “ॐ पितृगणाय विद्महे, जगतधारिणे धीमहि, तन्नो पितृः प्रचोदयात्”
  • ब्राह्मण भोजन का आयोजन करें
  • पितृ तीर्थों पर जल दान करें

सावधानियाँ एवं विशेष टिप्स

  • तर्पण हमेशा स्नान के बाद ही करें
  • मध्याह्न काल में नमक युक्त भोजन न करें
  • इस समय क्रोध या नकारात्मक विचार से बचें
  • पितरों का स्मरण आदर और भक्ति से करें

निष्कर्ष

पितृ ऋण से मुक्ति और पूर्वजों की आशीर्वाद प्राप्ति के लिए दोपहर 12 बजे का समय सर्वोत्तम है। प्रतिदिन के इन सरल उपायों को करने से न केवल पितृ दोष शांत होता है, बल्कि कुटुंब में सुख-समृद्धि का वास भी होता है। याद रखें, “प्रसन्नाः पितरः यस्य, प्रसन्नाः सर्वदेवताः” (जिसके पितर प्रसन्न हैं, उसके सभी देवता प्रसन्न रहते हैं)।

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