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मंगलसूत्र धारण क्यों किया जाता है जानें नियम और महत्व

Published June 26, 2026
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Contents
क्यों किया जाता है मंगलसूत्र धारण? जानें नियम और इसका महत्वमंगलसूत्र का धार्मिक महत्ववैज्ञानिक दृष्टिकोणमंगलसूत्र धारण के नियमशुभ मुहूर्तडिज़ाइन संबंधी निर्देशमंगलसूत्र से जुड़ी मान्यताएँपौराणिक कथाआधुनिक संदर्भक्या करें अगर टूट जाए मंगलसूत्र?निष्कर्ष

क्यों किया जाता है मंगलसूत्र धारण? जानें नियम और इसका महत्व

हिंदू संस्कृति में मंगलसूत्र सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि सुहाग का पवित्र प्रतीक है। यह विवाहित स्त्री के लिए सौभाग्य, सुरक्षा और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद लेकर आता है। आइए, जानते हैं कि इस छोटे से धागे में क्यों छिपा है इतना बड़ा रहस्य…

मंगलसूत्र का धार्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, मंगलसूत्र में समाहित हैं तीन दिव्य शक्तियाँ:

  • त्रिदेवों का आशीर्वाद: सोने के दो मनके ब्रह्मा, विष्णु, महेश के प्रतीक हैं।
  • शक्ति का केंद्र: काला मोती या पवित्र धागा माँ पार्वती की कृपा दर्शाता है।
  • यज्ञोपवीत समान: जैसे पुरुषों के लिए जनेऊ, वैसे ही स्त्रियों के लिए मंगलसूत्र धार्मिक कर्तव्य है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार:

  • काले मोती में होता है नकारात्मक ऊर्जा से बचाव का गुण।
  • सोना हृदय चक्र को संतुलित कर रक्तचाप नियंत्रित करता है।
  • गले के पास धारण करने से थायरॉयड ग्रंथि सक्रिय रहती है।

मंगलसूत्र धारण के नियम

शुभ मुहूर्त

विवाह के समय वर-वधू के माथे पर बाँधा जाता है मंगलसूत्र, पर कुछ विशेष नियम हैं:

  • शुभ नक्षत्र: रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त में धारण करना उत्तम।
  • वर्जित समय: ग्रहण, अमावस्या और सूतक काल में नया मंगलसूत्र न पहनें।

डिज़ाइन संबंधी निर्देश

  • स्वर्ण मनके: 9, 11 या 21 की संख्या में होने चाहिए।
  • धागा: काला रेशमी या सूती धागा ही शुभ माना जाता है।
  • लंबाई: हृदय तक पहुँचे, न अधिक लंबा न छोटा।

मंगलसूत्र से जुड़ी मान्यताएँ

पौराणिक कथा

स्कंद पुराण में वर्णित है कि देवी सती ने अपने प्राण त्यागते समय शिवजी को वचन दिया था कि अगले जन्म में उनका मंगलसूत्र ही उन्हें पहचनाएगा। इसीलिए पार्वतीजी के गले में शिवजी ने स्वयं बाँधा था मंगलसूत्र।

आधुनिक संदर्भ

  • विवाहिताएँ आज भी सिंदूर और मंगलसूत्र को सुहाग की अनिवार्य निशानी मानती हैं।
  • दक्षिण भारत में इसे थाली या पुस्तलु हार कहा जाता है।

क्या करें अगर टूट जाए मंगलसूत्र?

शास्त्रों के अनुसार:

  • टूटे हुए मंगलसूत्र को तुलसी के पेड़ के नीचे रख दें।
  • नया धारण करने से पहले गणपति पूजन अवश्य करें।
  • पुराने सोने को दान करने से बचें, नया बनवाएँ।

निष्कर्ष

मंगलसूत्र केवल परंपरा नहीं, बल्कि नारी के आत्मबल का प्रतीक है। जिस प्रकार सूर्य अपनी किरणों से संसार को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार यह पवित्र धागा स्त्री के समस्त मंगल कार्यों की रक्षा करता है। आधुनिक युग में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है, बस जरूरत है तो इसके गूढ़ रहस्य को समझने की।

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